आपके डेटा से बड़ी ऑनलाइन कंपनियाँ करती क्या हैं?
'फ़ोन को ट्रैक करना, फ़ोन के मैसेज खंगालना और फ़ोन के यूज़र की जानकारी कुछ थर्ड पार्टी कंपनियों को देना.'
जब किसी नए ऐप या वेबसाइट को आप इस्तेमाल करना शुरू करते हैं, तो मोटे तौर पर ये तीन अनुमतियाँ होती हैं जो आप किसी भी ऐप बनाने वाली कंपनी को जाने या अनजाने में दे देते हैं.
पर क्या ये यहीं तक सीमित है? और इस्तेमाल की जो शर्तें कंपनी ने शुरुआत में पढ़ने को दी होती हैं, क्या उसकी शब्दावली समझ पाना आसान होता है.
बीबीसी की रिसर्च टीम ने 15 बेहद लोकप्रिय ऐप्स और वेबसाइट्स की प्राइवेसी पॉलिसी पढ़ने के बाद ये पाया कि ऐप बनाने वाली कंपनियाँ जो गोपनीयता की नीतियाँ और इस्तेमाल की शर्तें उपभोक्ताओं को देती हैं, उन्हें समझने के लिए कम से कम यूनिवर्सिटी स्तर की शिक्षा होना आवश्यक है.
अक्सर ऐसे दस्तावेज़ तैयार करते समय कंपनियाँ बेहद जटिल शब्दों और घुमावदार वाक्यों का इस्तेमाल करती हैं.
लेकिन इन दस्तावेज़ों को तसल्ली से पढ़ा जाये तो कुछ आश्चर्यजनक वास्तविकताओं से सामना होता है.
1. लोकेशन ट्रैकिंग
आपके मोबाइल की लोकेशन क्या है, ये हमेशा ट्रैक किया जाता है. भले ही आप इसकी अनुमति दें या न दें. कई ऐप उपभोक्ताओं से लिखित अनुमति मांगते हैं कि क्या उनके मोबाइल की ट्रैकिंग की जा सकती है? लेकिन यूज़र मना कर भी दे, तब भी कंपनियों को पता होता है कि आपके मोबाइल की लोकेशन क्या है. फ़ेसबुक और ट्विटर जैसे नामी ऐप भी इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस की मदद से ऐसा करते हैं.
2. सहयोगी कंपनियों को डेटा देना
कई ऐप ऐसे हैं जो आपसे एकत्र हुई सूचनाओं को अपने प्रतिद्वंद्वी और सहयोगी कंपनियों को बेचते हैं. इन ऐप निर्माता कंपनियों का तर्क होता है कि वो बेहतर उपभोक्ता सेवा और 'सहीं लोगों तक' अपने विज्ञापन पहुँचाने के लिए ऐसा करते हैं. मसलन, टिंडर जैसे डेटिंग ऐप जो सूचनायें अपने उपभोक्ताओं से लेते हैं वो ओके-क्यूपिड, प्लेन्टी ऑफ़ फ़िश और मैच डॉट कॉम जैसे अन्य डेटिंग ऐप्स के साथ शेयर करते हैं.
- अपने डेटा को सुरक्षित रखने के लिए उठाएं ये कदम
- फ़ेसबुक, ट्विटर पर लोग क्यों करते हैं गाली-गलौज?
- गूगल ग्लास के लिए सात चमत्कारी ऐप
3. थर्ड पार्टी की बंदिश
अमेज़ॉन लिखता है कि वो आपका डेटा थर्ड पार्टी ऐप्स के साथ शेयर कर सकता है. अमेज़ॉन ने ये स्पष्ट लिखा है कि यूज़र सावधानी से उनकी गोपनीयता की नीतियों को पढ़ें. फ़ोन निर्माता कंपनी एप्पल भी ऐसा करती है. हाल ही में लागू हुईं यूरोपियन यूनियन की जेनेरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन में भी ये नहीं कहा गया है कि कंपनियाँ अपनी थर्ड पार्टी लिस्ट जारी करें. कानून के कई जानकार मानते हैं कि कंपनियों का यूँ किसी थर्ड पार्टी कंपनी को डेटा देना, ख़तरनाक साबित हो सकता है.
वहीं दूसरी तरफ, विकिपीडिया अपने यूज़र्स की पर्सनल जानकारी मार्केटिंग के लिए कभी किसी थर्ड पार्टी कंपनी को नहीं देता.
4. टिंडर की डेटा शेयरिंग
कई बार 'डेटा शेयर' करने का मतलब किसी यूज़र का नाम, उम्र और उसकी लोकेशन शेयर करने तक ही सीमित नहीं होता. मसलन, डेटिंग ऐप टिंडर ये साफ़ तौर पर कहता है कि वो कई अन्य बारीक जानकारियाँ भी जुटाता है. जैसे- यूज़र ने फ़ोन किस कोण (एंगल) पर पकड़े रखा और ऐप इस्तेमाल करते वक़्त फ़ोन की मूवमेंट कितना था. कंपनी के पास इसका कोई जवाब नहीं है कि ये डेटा किस काम में आता है.
5. फ़ेसबुक सर्च
फ़ेसबुक पर आपने क्या-क्या सर्च किया, उसे डिलीट करने का विकल्प फ़ेसबुक अपने यूज़र्स को देता है. लेकिन डिलीट करने के बावजूद फ़ेसबुक अपने पास छह महीने तक ये रिकॉर्ड संभालकर रखता है कि उपभोक्ता ने बीते दिनों क्या-क्या सर्च किया.
6. ऑफ़लाइन ट्रैकिंग
अगर आपके फ़ोन में फ़ेसबुक ऐप है और आपने उसमें लॉग-इन नहीं कर रखा या अकाउंट ही नहीं बनाया, तब भी फ़ेसबुक आपका फ़ोन ट्रैक कर सकता है. फ़ेसबुक की डेटा पॉलिसी के अनुसार, कंपनी यूज़र की गतिविधियों पर फ़ेसबुक बिज़नेस टूल की मदद से नज़र रखती है, भले ही वो फ़ेसबुक का इस्तेमाल नहीं कर रहा हो. कंपनी के मुताबिक़, वो जानकारियाँ कुछ इस तरह की होती हैं, जैसे- यूज़र के पास कौनसा फ़ोन है, उसने कौनसी वेबसाइट देखीं, क्या-क्या ख़रीदारी की और किन विज्ञापनों को देखा.
7. प्राइवेट मैसेज
अगर आपको लगता है कि प्राइवेट मैसेज सिर्फ़ आपके अपने हैं, तो इस बारे में दोबारा सोचिये. अपनी प्राइवेसी पॉलिसी के अनुसार, लिंकडिन कथित तौर पर ऑटोमेटिक स्कैनिंग टेक्नोलॉजी की मदद से यूज़र के प्राइवेट संदेश पढ़ सकता है. ट्विटर आपके संदेशों का एक डेटा बेस अपने पास रखता है. कंपनियों का दावा है कि वो इसकी मदद से ये जानने की कोशिश करते हैं कि यूज़र ने कब और किससे संवाद किया. लेकिन ये कहा गया है कि वो प्राइवेट मैसेज का कंटेट नहीं पढ़ते.
8. बदलाव, बार-बार
एप्पल का कहना है कि 18 साल से कम उम्र के यूज़र्स को एप्पल की प्राइवेसी पॉलिसी अपने अभिभावकों के साथ बैठकर पढ़नी चाहिए और उसकी बारीकियों को समझना चाहिए. बीबीसी की रिसर्च टीम ने पाया कि एक व्यस्क, अगर एक बार में बैठकर एप्पल की पूरी प्राइवेसी पॉलिसी पढ़ता है, तो उसे औसतन 40 मिनट लगते हैं. क्या किसी किशोर मोबाइल यूज़र को 'प्राइवेसी पॉलिसी' पढ़ने के लिए इतने वक़्त तक रोका जा सकता है? वैसे समस्याएं और भी हैं. अमेज़ॉन कहता है कि यूज़र्स को उसकी पॉलिसी चेक करते रहना चाहिए क्योंकि उनका बिज़नेस बदलता रहता है.
बहरहाल, गूगल और फ़ेसबुक जैसी बड़ी कंपनियों का दावा है कि वो अपनी लिखित नीतियों को यूज़र्स के लिए सरल से सरल बनाने की कोशिश कर रही हैं.
लेकिन ऑनलाइन माध्यमों पर यूज़र्स की सुरक्षा, ख़ासकर बच्चों की सुरक्षा के लिए काम कर रहीं संस्थायें फिलहाल कंपनियों की इन कोशिशों को पर्याप्त नहीं मानतीं.
-
Rajat Dalal Caste: Bigg Boss 18 फेम रजत दलाल किस जाति से हैं? शेरवानी में गंगा किनारे रचाई शादी, दुल्हन कौन? -
Silver Rate Today: चांदी फिर हुई सस्ती, अचानक 11,000 गिरे दाम, दिल्ली से पटना तक ये है 100 ग्राम सिल्वर का रेट -
ट्रंप ने सऊदी प्रिंस का उड़ाया मजाक, की बेदह गंदी टिप्पणी, क्या टूट जाएगी अमेरिका-सऊदी अरब की दोस्ती? -
3 शादियां कर चुकीं 44 साल की फेमस एक्ट्रेस ने मोहनलाल संग शूट किया ऐसा इंटीमेट सीन, रखी 2 शर्तें और फिर जो हुआ -
Iran Vs Israel: 'सभी देश भुगतेंगे परिणाम', शांति प्रयासों के बीच ईरानी विदेश मंत्री की बड़ी चेतावनी -
37 साल से लापता है ये फेमस एक्ट्रेस, गुमनामी में लुट गया सबकुछ, ऋषि कपूर पर लगाया था ऐसा आरोप -
VIDEO: 10 साल की दुश्मनी! बीच मैदान पर एक झप्पी और सब खत्म! विराट-कुंबले का वीडियो देख दुनिया दंग -
Gold Rate Today: ईरान जंग के बीच सोना में भारी गिरावट, अबतक 16000 सस्ता! 22k और 18k का अब ये है लेटेस्ट रेट -
LPG Price Today Delhi NCR: दिल्ली में गैस सिलेंडर महंगा, 14.2Kg का नया रेट क्या है? जानें आज का ताजा भाव -
Kal Ka Match Kon Jeeta 28 March: कल का मैच कौन जीता- RCB vs SRH -
Iran Vs America War: कब खत्म होगा अमेरिका ईरान युद्ध, ट्रंप के विदेश मंत्री ने बता दी तारीख -
PM Kisan Yojana: 31 मार्च से पहले कर लें यह काम, वरना अटक जाएगी पीएम किसान की अगली किस्त












Click it and Unblock the Notifications