'जय श्रीराम' के नारे पर ममता बनर्जी के भड़कने पर क्या बोले नेताजी के परपोते ?

West Bengal assembly elections 2021:पराक्रम दिवस के मौके पर कोलकाता (Kolkata) के विक्टोरिया मेमोरियल (Victoria Memorial)में 'जय श्रीराम' के नारे से नाराज होकर ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के भाषण नहीं देने पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Netaji Subhash Chandra Bose)के परपोते सीके बोस (CK Bose) ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी को इसपर ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर यह कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें अपने भाषण से पहले 'जय श्रीराम' के नारे लगने से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इतनी नाराज हो गईं कि उन्होंने तुरंत भाषण ही बंद कर दिया और कहा कि निमंत्रण देकर किसी की इस तरह की बेइज्जती नहीं करनी चाहिए।

'जय हिंद' हो या 'जय श्रीराम' इसपर भड़कना ठीक नहीं'

'जय हिंद' हो या 'जय श्रीराम' इसपर भड़कना ठीक नहीं'

नेताजी के परपोते सीके बोस ने विक्टोरिया मेमोरियल में ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया गैर-जरूरी बताया है। सीके बोस ने कहा है कि ' नेताजी सुभाष चंद्र बोस एकता के लिए खड़े रहे। उनके आजाद हिंद फौज में सभी समुदायों के लोग थे। आप 'जय हिंद' कहें या 'जय श्रीराम', मुझे इनमें कोई अंतर नहीं लगता। 'जय श्रीराम' ऐसा नारा नहीं है, जिसपर किसी को इस कदर से भड़कना चाहिए।' यही नहीं उनके मुताबिक, 'मैं समझता हूं कि चाहे 'जय हिंद' हो या 'जय श्रीराम' सीएम को इतनी तीखी प्रतिक्रिया नहीं देने की जरूरत नहीं थी। यह कोई राजनीति करने का दिन नहीं है। यह उत्सव मनाने का दिन है, यह इंडियन नेशनल आर्मी के जवानों और शहीदों को श्रद्धांजलि देने का दिन है।' गौतरलब है कि सीके बोस अभी भाजपा में हैं।

विरोध में ममता ने नहीं दिया था भाषण

विरोध में ममता ने नहीं दिया था भाषण

गौरतलब है कि नेताजी की 125वीं जयंती पर आयोजित सरकारी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बनर्जी 'जय श्रीराम' के नारे लगने के विरोध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भाषण छोड़कर चली गई थीं। जाते-जाते उन्होंने कहा कि 'सरकारी कार्यक्रम की कुछ गरिमा होनी चाहिए।' यही नहीं वो बोलीं कि 'जिसे आपने आमंत्रित किया है, उसकी बेइज्जती करना सही नहीं है।' ममता बनर्जी चेहरे से भी काफी नाराज नजर आ रही थीं और उन्होंने कहा कि यह एक सरकारी कार्यक्रम है ना कि किसी राजनीतिक पार्टी का। हालांकि, उन्होंने नेताजी पर यह कार्यक्रम कोलकाता में आयोजित करने के लिए पीएम मोदी और संस्कृति मंत्रालय के प्रति आभार भी जताया।

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    मेरे पिता एक धर्मनिष्ठ हिंदू थे-नेताजी की बेटी

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    इस बीच जर्मनी में रह रहीं नेताजी सुभाष चंद्र की बेटी अनीता बोस फाफ ( Anita Bose Pfaff) ने अपने पिता को एक धर्मनिष्ठ हिंदू (devout Hindu) बताया है। उन्होंने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा है कि 'नेताजी बहुत ही धर्मनिष्ठ व्यक्ति थे। वह बहुत ही धर्मनिष्ठ हिंदू थे। लेकिन, निश्चित तौर पर वह एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के समर्थक थे और जहां तक उनके निजी व्यक्तित्व का सवाल है तो उनका बाकी सभी धर्मों के लिए भी बहुत ज्यादा सम्मान था। वह नैतिक मूल्यों पर चलने वाले एक सत्यनिष्ठ व्यक्ति थे। और मैं समझती हूं कि वह निश्चित तौर पर भारत को एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में देखना चाहते थे।'

    मेरे पिता को वो सम्मान नहीं मिला जिसके वो हकदार थे- अनीता बोस

    मेरे पिता को वो सम्मान नहीं मिला जिसके वो हकदार थे- अनीता बोस

    इसके अलावा एक वीडियो संदेश में नेताजी की बेटी ने अपने पिता के बारे में कहा कि वो चाहते थे कि भारत आधुनिक होने के साथ-साथ दुनिया में सबसे आगे हो, जिसकी जड़ें धार्मिक परंपराओं, दर्शन और इतिहास के संबंध में भी उतनी ही सशक्त हों। वो यह भी बोलीं कि उन्हें खुशी है कि 125वीं जयंती पर उनके पिता को इतना सम्मान मिल रहा है कि प्रधानमंत्री उन्हें श्रद्धांजलि देने कोलकाता आए। इसके साथ ही उन्होंने जोड़ा कि उनके पिता जिस सम्मान के हकदार थे, वो अबतक उन्हें नहीं मिला। वो बोलीं कि भारत के इतिहास में भी उन्हें वह जगह नहीं दी गई, जितने के वो हकदार थे। वो बोलीं कि आजादी के बाद शुरू में कागज मौजूद नहीं थे, जिसके बारे में बाद में जानकारी मिली कि भारत की आजादी में आईएनए (INA) की भूमिका कितनी बड़ी थी। (अनीता बोस की तस्वीरें-फाइल)

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