किसानों के भारत बंद को लेकर पूर्व AAP नेता कुमार विश्वास ने क्या कहा?

आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता कुमार विश्वास ने किसानों के भारत बंद को लेकर ट्वीट किया है...

नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की तरफ से हाल ही में लाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ आज किसानों ने भारत बंद का आह्वान किया है। पंजाब और हरियाणा सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान पिछले कई दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं और कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। किसानों के इस भारत बंद को समाजसेवी अन्ना हजारे का भी समर्थन मिला है और उन्होंने आज अनशन करने का ऐलान किया है। अन्ना हजारे ने कहा कि किसानों का आंदोलन पूरे देश में फैलना चाहिए। इस बीच आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता कुमार विश्वास ने भी किसानों के भारत बंद को लेकर ट्वीट किया है।

'आज दिनभर उपवास'

'आज दिनभर उपवास'

कुमार विश्वास ने किसानों के भारत बंद के बीच आज उपवास रखा है। कुमार विश्वान ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'आज दिनभर उपवास..'। कुमार विश्वास ने इससे पहले भी किसानों के आंदोलन को लेकर ट्वीट किया था। कुमार विश्वास ने बीते 2 दिसंबर को ट्वीट करते हुए लिखा था, 'अपने बंगलों और अपार्टमेंटों की बालकनियों में बैठकर बौद्धिक जुगाली कर रहे अभिनेताओं और ज्ञानियों से सादर अनुरोध है कि वे किसान आंदोलन का समर्थन करें न करें, पर कम से कम किसानों की वास्तविक समस्याओं पर अपना अधकचरा तपसरा तो बंद करें। किसान धान उगाता है तो समाधान भी उगा ही लेगा।'

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    किसानों को लेकर पहले भी ट्वीट कर चुके हैं विश्वास

    किसानों को लेकर पहले भी ट्वीट कर चुके हैं विश्वास

    इसके बाद एक और ट्वीट करते हुए कुमार विश्वास ने लिखा, 'आशा है दिल्ली दरबार द्वार पर आए चिंतित भूमिपुत्रों को उसी सम्मान-समाधान के साथ विदा करेगा जैसे साधुताभरे कृषक सुदामा को हर द्वारिकाधीश विदा करता रहा है। जगत को अमृत मिले इस सदिच्छा के लिए जहर पीनेवाले शंकर के पुण्यधाम से सांसद नरेंद्र मोदी जी से प्रार्थना।'

    9 दिसंबर को किसानों के साथ होगी बैठक

    9 दिसंबर को किसानों के साथ होगी बैठक

    आपको बता दें कि केंद्र सरकार और किसानों के बीच अभी तक दिल्ली के विज्ञान भवन में पांच दौर की बैठक हो चुकी है। हालांकि इन बैठकों में किसानों और सरकार के बीच हुई बातचीत से कोई हल नहीं निकला और 9 दिसंबर को छठें दौर की बैठक का निर्णय लिया गया। सूत्रों की मानें तो सरकार इन कृषि कानूनों को वापस लेने के मूड में नहीं है, बल्कि संशोधन के लिए तैयार है। वहीं, किसानों का कहना है कि ये कानून पूरी तरह से किसान विरोधी हैं, इसलिए इन्हें तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।

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