West Bengal elections:ओवैसी की एंट्री पर बंट गया सिद्दीकी परिवार, मुस्लिम धर्मगुरुओं ने क्या कहा जानिए
West Bengal assembly elections 2021:हैदराबाद के सांसद और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने पश्चिम बंगाल चुनाव में अपनी पार्टी की दावेदारी मजबूत करने के लिए हुगली जिले के मशहूर फुरफुरा शरीफ (Furfura Sharif) के मौलाना पीरजादा अब्बासुद्दीन सिद्दीकी (Pirzada Abbasuddin Siddiqui) से तालमेल की कोशिश शुरू की है। लेकिन, पश्चिम बंगाल के बड़े मुस्लिम धर्मगुरु, इमाम और कई राजनीतिक जानकारों को लगता है कि अब्बास सिद्दीकी और ओवैसी की साठगांठ से चुनावों पर कोई खास असर नहीं पड़ने वाला। यहां तक कि सिद्दीकी के परिवार में भी इस बात पर मतभेद उजागर हो गया है।

ओवैसी के बंगाल में एंट्री से मुस्लिम नेता नाखुश
असदुद्दीन ओवैसी पर अबतक पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और वामपंथी पार्टियां ही बीजेपी की मदद के लिए मुस्लिम वोटों को बांटने की कोशिश का आरोप लगा रही थीं, लेकिन हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक अब प्रदेश के कई मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी उनके कदम से असहमति जताते हुए दावा किया है कि वोटर उनकी राजनीति को मंजूर नहीं करेंगे। जबकि, ममता सरकार (Mamata Banerjee Government) में मंत्री और जमीयत उलेमा-ए-हिंद(Jamiat Ulema - e -Hind) के राज्य इकाई के अध्यक्ष सिद्दीकुल्ला चौधरी (Siddiqullah Chowdhury) ने दावा किया है कि उनके लिए बंगाल की राजनीति में कोई जगह नहीं है। बंगाल में मुस्लिमों की आबादी के मद्देनजर प्रभावशाली मुसलमान नेताओं की ओर से आई यह प्रतिक्रिया काफी अहम मानी जा सकती है।

बंगाल के कई जिलों में बहुसंख्यक हुए मुसलमान
दरअसल, एक अनुमान के मुताबिक बीते 10 साल में बंगाल में मुसलमानों की जनसंख्या में करीब 3 फीसदी इजाफे का अनुमान है। मतलब, 2011 में यह 27.01 फीसदी थी, जो अब 30 फीसदी के करीब बताई जा रही है। कुछ जिले तो ऐसे हैं जहां मुसलमान अब बहुसंख्य बन चुके हैं। मसलन, मुर्शीदाबाद (66.28%), मालदा(51.27%) में उनकी आबादी आधे से ज्यादा हो चुकी है। लेकिन, इनके अलावा भी कई जिले हैं, जहां वह भारी तादाद में हो चुके हैं। मसलन, उत्तरी दिनाजपुर में 49.92%, दक्षिण 24 परगना में 35.57% और बीरभूम में 37.06%. इनके अलावा पूर्वी और पश्चिमी बर्दवान, उत्तरी 24 परगना और नादिया जिले में भी इनकी बहुत ज्यादा आबादी है।

सिद्दीकी को मुसलमानों के अपने साथ होने का यकीन
यही वजह है कि बीते रविवार को ओवैसी ने फुरफुरा शरीफ के मौलाना अब्बास सिद्दीकी से मुलाकात की थी। खुद सिद्दीकी भी अपना चुनावी मंसूबा पहले ही जाहिर कर चुके हैं और वह ममता बनर्जी से सुलह करने की एवज में अपने पसंद के उम्मीदवारों के लिए 44 सीटें भी मांग चुके हैं। मुसलमानों के लिए बंगाल की फुरफुरा शरीफ ( Furfura Sharif) स्थित पीर अबु बकर सिद्दीकी (Pir Abu Bakr Siddiqui) की दरगाह की काफी अहमियत है। यहां एक मस्जिद भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह 1375 में बनी थी। सालाना उर्स के दौरान यहां लाखों की भीड़ उमड़ती है। यही वजह है कि अब्बास सिद्दीकी को यकीन है कि बंगाल के मुसलमान उनके इशारे पर ही वोटिंग करेंगे; और ओवैसी भी इसी कारण उनके साथ गठबंधन करने में लगे हुए हैं।

'ओवैसी की राजनीति बंगाल में मंजूर नहीं'
लेकिन, बंगाल के इमामों के संगठन का दावा है कि राज्य में सांप्रदायिक राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है। पश्चिम बंगाल की करीब 40,000 मस्जिदों के करीब 26,000 मौलाना इसके सदस्य हैं। मसलन, इमाम एसोसिएशन के चेयरमैन मोहम्मद याहिया (Md Yahiya, chairman of the imams' association) ने कहा है, 'चाहे हिंदू हों या मुसलमान, राज्य के लोगों की सिर्फ एक पहचान है। ये सारे बंगाली हैं। एक तरफ बीजेपी की ओर से बंगालियों को घुसपैठिया कहा जाता है और दूसरी तरफ हैदराबाद और गुजरात के कुछ नेता बंगाल आकर लोगों को कम्यूनल लाइन पर बांटना चाहते हैं। यह मंजूर नहीं होगा।'

सिद्दीकी परिवार में ओवैसी पर मतभेद
लेकिन, असदुद्दीन ओवैसी के लिए मुश्किल बंगाल के सिर्फ मुस्लिम नेताओं का विरोध नहीं है। इस मामले में अब्बास सिद्दीकी का उनके परिवार के साथ ही मतभेद उजागर हो चुका है।मसलन, सिद्दीकी परिवार के सबसे बुजुर्ग पीरजादा तोहा सिद्दीकी ( Pirzada Toha Siddiqui) ने कहा है कि वह ऐसे किसी कदम का समर्थन नहीं करेंगे, जिससे की बीजेपी को फायदा हो। तोहा सिद्दीकी वही शख्स हैं, जो पहले सीपीएम(CPM) और टीएमसी(TMC) को काफी सहयोग कर चुके हैं। उन्होंने ओवैसी और अब्बास सिद्दीकी की मुलाकात पर कहा, 'राज्य की जनसंख्या में हिंदू 70 फीसदी हैं। अगर वो चाहते तो बीजेपी बहुत पहले ही सत्ता में आ गई होती। हम अपने हिंदू भाइयों को नीचा दिखाने के लिए कुछ नहीं करेंगे।'

सिद्दी को मिली परिवार से ही चुनौती
लेकिन, तोहा अकेले नहीं हैं। इसी परिवार के एक और सदस्य पीरजादा जियाउद्दीन सिद्दीकी तो अब्बास सिद्दीकी के फैसले को ही सीधी चुनौती दे दी है। उन्होंने कहा है कि फुरफुरा शरीफ को राजनीति में नहीं घसीटा जा सकता। उनके मुताबिक, 'ना तो पीर अबु बकर सिद्दीकी और ना ही हमारे किसी पूर्वज ही राजनीति में शामिल हुए। यह एक धार्मिक स्थान है और यही रहेगा। अब्बास जो कुछ भी कर रहे हैं यह पूरी तरह से उनका मामला है।' वहीं कोलकाता के एक चुनावी विश्लेषक और राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर उदय बंधोपाध्याय का कहना है कि, 'सिद्दीकी का प्रभाव मालदा, उत्तरी दिनाजपुर और दक्षिण 24 परगना के कुछ हिस्से में है। जबतक इमाम मदद नहीं करेंगे ओवैसी को बहुत ज्यादा फायदा नहीं मिलेगा। हालांकि, अगर वह 1 फीसदी मुस्लिम वोट भी जुटालेते हैं तो बहुत ज्यादा होगा।'
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