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West Bengal elections:क्या ममता के 'बाहरी' के जवाब में पीएम मोदी ने जोड़ा टैगोर का गुजरात कनेक्शन?

नई दिल्ली- ऐसे कई मौके आए हैं, जब पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने बंगाल पहुंचने वाले भाजपा नेताओं को 'बाहरी' कहकर राजनीतिक हमले की कोशिश की है। चाहे गृहमंत्री अमित शाह हों या फिर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, उन्होंने सब पर बाहरी होने का ताना मारकर सियासत को बाहरी बनाम बंगाली शक्ल देने की कोशिश की है। यही नहीं वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और अमित शाह (Amit Shah) पर भी उनके गुजरात (Gujarat) से होने को लेकर निशाना साधने की कोशिश कर चुकी हैं। लेकिन, गुरुवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअल माध्यम से पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन (Santiniketan) स्थित विश्व-भारती यूनिवर्सिटी (Visva Bharati University) के शताब्दी समारोह (Centenary Celebrations) पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे तो उन्होंने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर (Gurudev Rabindranath Tagore) का गुजरात से पुराना कनेक्शन सामने रख दिया। हालांकि, प्रधानमंत्री यह सब बातें बिल्कुल दूसरे संदर्भों में कह रहे थे, लेकिन कार्यक्रम के लिए उनके गेटअप को देखें तोउन्होंने जो कुछ कहा है, उसका दायरा बहुत ही बड़ा लग रहा है।

ममता के 'बाहरी बनाम बंगाली' पर पलटवार?

ममता के 'बाहरी बनाम बंगाली' पर पलटवार?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi)ने विश्वभारती विश्वविद्यालय (Visva Bharati University)के कार्यक्रम में जिस तरह से नोबल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर (Gurudev Rabindranath Tagore)और उनके गुजरात (Gujarat) से गहरे रिश्तों का जिक्र किया वह बहुत ही दिलचस्प है। पीएम मोदी ने टैगोर के गुजरात कनेक्शन की शुरुआत कुछ ऐसे की "मैं जब गुरुदेव के बारे में बात करता हूं,......तो एक मोह से खुद को रोक नहीं पाता..... पिछली बार आपके यहां आया था, तब भी मैंने इसका थोड़ा सा जिक्र किया था। मैं फिर से....... गुरुदेव और गुजरात की आत्मीयता का स्मरण कर रहा हूं।...... ये बार-बार याद करना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि ये हमें एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना से भरता है। ये दिखाता है कि अलग-अलग भाषाओं, बोलियां, खान-पान, पहनावे वाला हमारा देश, एक दूसरे से कितना जुड़ा हुआ है। ये दिखाता है कि कैसे विविधताओं से भरा हमारा देश एक है........ एक दूसरे से बहुत कुछ सीखता रहा है।" पीएम मोदी ने बात तो भारत की 'अनेकता में एकता' वाले भावना कि की है, लेकिन इसे सीधा 'बाहरी बनाम बंगाली' की सियासत पर धारदार पलटवार माना जा रहा है।

ममता गुजरात और भाजपा नेताओं को लेकर क्या कहती हैं?

ममता गुजरात और भाजपा नेताओं को लेकर क्या कहती हैं?

पीएम मोदी ने टैगोर के गुजरात से कनेक्शन के बारे में क्या कुछ कहा है, उससे पहले यह जान लीजिए कि ममता बनर्जी (Mamata Banerjee)ऐसा क्या कुछ कह रही हैं, जिसके बाद शायद पीएम ने मोदी उन्हें आईना दिखाने की कोशिश की है। दरअसल, तृणमूल (TMC) सुप्रीमो अक्सर बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 'बाहरी' पार्टी बताने की कोशिश करती रही हैं। उनपर आरोप है कि वह रैलियों में कहती हैं कि भाजपा बाहरी लोगों की पार्टी है और राज्य में उनकी कोई जगह नहीं है। ममता बनर्जी के मुताबिक 'बंगाल में बाहरी लोगों के लिए कोई जगह नहीं है......जो लोग सिर्फ चुनावों के दौरान राज्य में आते हैं और राज्य की शांति को बाधित करने की कोशिश करते हैं, उनका कोई स्वागत नहीं है.....' वह ये भी कहती हैं कि वो 'पश्चिम बंगाल को गुजरात नहीं बनने देंगी।'

पीएम ने बताया टैगोर का गुजरात कनेक्शन

पीएम ने बताया टैगोर का गुजरात कनेक्शन

पीएम मोदी ने उनके इस नजरिए का करारा जवाब दिया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि "गुरुदेव के बड़े भाई सत्येन्द्रनाथ टैगोर (Satyendranath Tagore) जब आईसीएस (ICS)में थे तो उनकी नियुक्ति गुजरात में अहमदाबाद (Ahmedabad)में भी हुई थी। रवींद्रनाथ टैगोर जी (Rabindranath Tagore)अक्सर गुजरात जाते थे और उन्होंने वहां काफी लंबा समय भी बिताया था....... अहमदाबाद में रहते हुए ही उन्होंने अपनी दो लोकप्रिय बांग्ला कविताएं 'बंदी ओ अमार' और 'नीरोब रजनी देखो' ये दोनों रचनाएं की थीं....... अपने प्रसिद्ध रचना 'क्षुदित पाशान' का एक हिस्सा भी उन्होंने गुजरात प्रवास के दौरान ही लिखा था.........."दरअसल, यह वाक्या 1878 से शुरू होता है, जब गुरुदेव सिर्फ 17 वर्ष के थे और उन दिनों उनके बड़े भाई अहमदाबाद (Ahmedabad) में कमिश्नर पद पर तैनात थे। उन दिनों वे वहां 'मोतीशाही महल' में ठहरे थे, जिसे शाहजहां ने 1622 में बनवाया था। आज की तारीख में उस इमारत को सरदार पटेल स्मारक भवन के नाम से जानते हैं।

टैगोर परिवार का गुजरात से पारिवारिक नाता

टैगोर परिवार का गुजरात से पारिवारिक नाता

पीएम मोदी ने गुरुदेव के ज्ञान और उनके गुजरात प्रवास की बात की जानकारी देने के बाद उनका गुजरात से पारिवारिक कनेक्शन भी निकाला और फिर उसका पूरे भारत पर पड़ने वाले असर को भी बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि, ".......गुजरात की एक बेटी...... श्रीमती हटिसिंग गुरुदेव के घर में बहू बनकर भी आई थीं। इसके अलावा एक और तथ्य है जिस पर हमारे वीमेन एम्पावरमेंट (Women Empowerment) से जुड़े संगठनों को अध्ययन करना चाहिए......... सत्येन्द्रनाथ टैगोर जी (Satyendranath Tagore) की पत्नी ज्ञानंदिनी देवी जी जब अहमदाबाद में रहती थीं, तो उन्होंने देखा कि स्थानीय महिलाएं अपने साड़ी के पल्लू को दाहिने कंधे पर रखती हैं। अब दाएं कंधे पर पल्लू रहता था......... इसलिए महिलाओं को काम करने में भी कुछ दिक्कत होती थी.......... ये देखकर ज्ञानंदिनी देवी ने आइडिया निकाला कि क्यों न साड़ी के पल्लू को बाएं कंधे पर लिया जाए। अब मुझे ठीक-ठीक तो नहीं पता लेकिन कहते हैं कि बाएं कंधे पर साड़ी का पल्लू उन्हीं की देन है............."

राजनीतिक लाइन पर दिया भाषण-TMC

राजनीतिक लाइन पर दिया भाषण-TMC

शुरू में तो टीएमसी ने पीएम मोदी के भाषण को लेकर दावा किया कि उसमें कुछ तथ्यात्मक भूल हैं। बाद में पार्टी के विधायक ब्रत्या बासु ने कहा कि, 'भारत के प्रधानमंत्री को लोगों को हमेशा बंगाल और गुजरात का कनेक्शन याद दिलाने की जरूर क्यों पड़ती है और वह भी एक विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में? हमें लगता है कि इस भाषण को चालाकी से पॉलिटिकल लाइन पर ड्राफ्ट किया गया है और हम इसकी आलोचना करते हैं।'

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