Wayanad Landslide: सेना ने संभाला सर्च ऑपरेशन, तीसरे दिन भी रेस्क्यू जारी, तैयार हो रहा बेली ब्रिज
Wayanad Landslide Rescue Update: केरल के वायनाड जिले में हुए विनाशकारी भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर 173 हो गई है। घटना में कई लोग लापता हैं, जबकि रेस्क्यू टीम ने मलबे में फंसे लोगों को खोजने के प्रयास तेज कर दिए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन का मोर्चा सेना ने अपने कंधों पर उठा लिया है। बेली ब्रिज (अस्थायी, पोर्टेबल पुल) का निर्माण किया जा रहा है।
मेजर जनरल वीएल मैथ्यू ने वायनाड में बचाव अभियान के बारे में बताया कि चुरलमाला-मुंडाकाई (Chooralmala-Mundakkai) भूस्खलन क्षेत्र में तीसरे दिन भी बचाव अभियान जोरों पर है। बेली ब्रिज का निर्माण जल्द पूरा हो जाएगा। इसकी मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन को तेजी मिलेगी। अधिक मशीनरी लाना और तेजी से खोज करना संभव हो जाएगा। आइए जानते हैं वीएल मैथ्यू ने वनइंडिया को और क्या क्या बताया?....

- मैथ्यू ने कहा कि छह टीमों में करीब 500 सैन्यकर्मी मुंडाकाई के विभिन्न हिस्सों में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।
- हाल के दिनों में यह सबसे कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन है। रात में रेस्क्यू ऑपरेशन काफी मुश्किल हो रही है।
- सेना अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रही है। सेना के पास सर्च ऑपरेशन के लिए विशेष उपकरण हैं। लेकिन, पुल न होने के कारण कुछ भी नहीं ले जाया जा सकता।
- अभी तक मैनुअल और अन्य रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहे हैं। बेली ब्रिज बनने के बाद और रेस्क्यू मशीनरी पहुंचाई जाएगी। पुल का निर्माण पूरा होने के बाद सभी उपकरण मुंदकई और चूरलमाला की तरफ लाए जाएंगे।
- दो सौ फीट लंबा पुल बनाया जा रहा है। सेना का मिशन यहां बचे आखिरी व्यक्ति को भी बाहर निकालना है।
क्या है बेली ब्रिज?
बेली ब्रिज एक प्रकार का अस्थायी, पोर्टेबल पुल होता है, जिसे सैन्य अभियानों के दौरान और आपातकालीन परिस्थितियों में तेजी से स्थापित करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका आविष्कार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सर डोनाल्ड बेली ने किया था, और इसका उपयोग आज भी व्यापक रूप से होता है।
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बेली ब्रिज की खासियत
- मॉड्यूलर डिजाइन: बेली ब्रिज को मॉड्यूलर पैनलों से बनाया जाता है, जिन्हें आपस में जोड़कर पुल का निर्माण किया जा सकता है।
- जल्दी निर्माण: इसे तेजी से और बिना भारी उपकरणों के स्थापित किया जा सकता है, जिससे समय की बचत होती है।
- मजबूती और स्थायित्व: यह पुल मजबूत और स्थायी होते हैं, जो भारी वाहनों और सैन्य उपकरणों का भार सह सकते हैं।
- संरचना: यह विभिन्न प्रकार की संरचनाओं जैसे कि सिंगल लेन, डबल लेन, आदि में बनाया जा सकता है।
- दोबारा इस्तेमाल की गुंजाइश: इसे बार-बार उपयोग किया जा सकता है, जिससे इसकी लागत कम होती है।
वायनाड के लिए कैसे मददगार साबित होगा बेली ब्रिज?
- आपातकालीन रास्ता: बेली ब्रिज को तेजी से स्थापित कर आपातकालीन मार्ग बनाया जा सकता है, जिससे बचाव और राहत कार्यों में सहायता मिलती है।
- राहत सामग्री और सेवाओं की आपूर्ति: बेली ब्रिज के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, जैसे कि खाद्य सामग्री, दवाइयां, और अन्य आवश्यक वस्तुएं, तेजी से पहुंचाई जा सकेंगी। साथ ही, मेडिकल और रेस्क्यू टीमों को भी तेजी से पहुंचने में मदद मिलती है।
- अस्थायी समाधान: बेली ब्रिज एक अस्थायी समाधान प्रदान करता है, जिससे तब तक आवागमन जारी रह सकता है जब तक कि स्थायी संरचनाएं नहीं बन जातीं।
- सुरक्षित मार्ग प्रदान करना: भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों में फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए बेली ब्रिज एक उपयोगी व्यवस्था है। यह लोगों को जल्दी और सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने में मदद करता है।

वायनाड पहुंचे राहुल-प्रियंका
वहीं, घटना का जायजा लेने लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी अपनी बहन और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ वायनाड पहुंचे। दोनों ने यहां स्थिति का जायजा लिया। आपको बता दें कि वायनाड में आगामी लोकसभा उपचुनाव होने हैं। कांग्रेस ने प्रियंका गांधी का नाम आगे किया है। हाल ही 2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी वायनाड से जीते थे, लेकिन उन्होंने अपनी रायबरेली सीट को कायम रखते हुए इसे छोड दिया था।












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