Waqf बोर्ड पर नकेल कसने की तैयारी, मुसलमान भी कर रहे डिमांड! क्या होगा सियासी अंजाम?
Waqf Act Amendment news: केंद्र सरकार वक्फ कानून में संशोधन करना चाहती है। जानकारी के मुताबिक केंद्रीय कैबिनेट की ओर से पहले ही इन बदलावों को मंजूरी भी मिल चुकी है। संभावना है कि 5 अगस्त, 2024 (सोमवार) से शुरू हो रहे हफ्ते में इसको लेकर विधेयक भी संसद में लाया जा सकता है।
अटकलों के मुताबिक मोदी सरकार वक्फ कानून में जो बदलाव करने की तैयारी में है, उसमें किसी की भी संपत्ति को अपनी संपत्ति घोषित करने के उसके 'मनमानी' वाला अधिकार शामिल है।

हमेशा विवादों पर रहा है वक्फ बोर्ड का अधिकार
भारत में इस समय 28 राज्यों और केंद्र शाषित प्रदेशों में कुल 30 वक्फ बोर्ड हैं और एक सेंट्रल वक्फ काउंसिल है। वक्फ बोर्ड के किसी की भी संपत्ति को अपनी संपत्ति घोषित करने का अधिकार हमेशा से विवादों में रहा है।
वक्फ बोर्ड से जुड़े कौन से विवाद हुए हैं चर्चित?
पिछले साल मई में दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि वह दिल्ली वक्फ बोर्ड के कब्जे वाली 123 संपत्तियों की फिजिकल इंस्पेक्शन कर सकती है। इसी के बाद केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने दिल्ली वक्फ बोर्ड की ओर से दावा जताए जाने वाली उन सभी संपत्तियों को नोटिस जारी किया था।
जब हिंदू बहुल गांव पर वक्फ बोर्ड ने ठोक दिया दावा!
वैसे बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार की ओर से वक्फ कानून में बदलाव को लेकर जो विधेयक लाने की चर्चा है, उसके पीछे तमिलानाडु के तिरुचेंदुरई की एक कुख्यात घटना है। सितंबर 2022 में तमिलनाडु वक्फ बोर्ड ने इस पूरे हिंदू बहुल गांव पर मालिकाना हक जता दिया था। इसमें गांव के एक मंदिर की जमीन भी शामिल थी, जो करीब डेढ़ हजार साल पुराना बताया जा रहा है।
वक्फ बोर्ड पर नकेल कसने की तैयारी?
सूत्रों के हवाले से जो जानकारी आ रही है, उसके तहत केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार वक्फ कानून में जो बदलाव करना चाहती है, उसमें 'वक्फ की ओर से दावा किए जाने वाली सभी प्रॉपर्टी की अनिवार्य रूप से सत्यापित कराने और वक्फ बोर्ड की तमाम विवादित संपत्ति का भी सत्यापन कराने की अनिवार्यता शामिल होगी।'
मुस्लिम ऐक्टिविस्ट ने भी किया इस पहल का समर्थन
टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट के मुताबिक मानवाधिकार कार्यकर्ता शबनम खान ने इस पहल का स्वागत करते हुए दावा किया है कि जिन्होंने लोगों की कानूनी जमीनों पर कब्जा किया है, उनकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, 'मैं बिल का समर्थन करती हूं। यह अच्छी चीज है। मुसलमानों को खुश होना चाहिए, क्योंकि उन्हें अब न्याय मिलेगा।' उनका कहना है, 'जिन लोगों ने भी लोगों की कानूनी जमीनों ले ली हैं, उनकी जिम्मेदारी तय होगी। वक्फ बोर्ड कांग्रेस की वजह से ताकतवर हुए हैं, वे भारत की संपत्ति कब्जाना चाहते थे।'
इंडिया ब्लॉक को केंद्र सरकार की नीयत पर शक!
लेकिन, समाजवादी पार्टी प्रवक्ता फखरुल हसन का आरोप है कि बीजेपी सरकार की नजर वक्फ प्रॉपर्टी पर है। उन्होंने कहा, 'वे वक्फ की संपत्ति को सरकारी संपत्ति में बदलना चाहते हैं।' उन्होंने ये भी आरोप लगा दिया है कि पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) ने बीजेपी को वोट नहीं दिया, इसलिए इस तरह के कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने इस मामले में भाजपा की सहयोगी टीडीपी और जेडीयू से अपना नजरिया साफ करने की भी मांग कर दी है।
वहीं कांग्रेस के पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने यह माना है कि वक्फ बोर्ड के प्रबंधन में खामियां रही हैं, लेकिन उन्हें भाजपा के इरादे को लेकर आशंका है। उन्होंने कहा, 'हम असल में नहीं जानते कि इससे यह सरकार क्या पाना चाहती है....बीजेपी के साथ समस्या ये है कि वह जो लाते हैं, उसकी जरूरत पर सांप्रदायिकता और राजनीतिक फायदा उठाने की मंशा ज्यादा प्रभावी हो जाती है।'
30-40 वर्षों से हो रही है मांग- बीजेपी नेता
वहीं भाजपा नेता अजय आलोक का कहना है कि इसकी मांग पिछले 30-40 वर्षों से लंबित है। उन्होंने कहा, 'यहां तक कि मुस्लिम परिवारों की भी मांग रही है कि किसी की संपत्ति पर दावा करने का वक्फ को पूर्ण अधिकार नहीं मिलनी चाहिए।' उन्होंने सभी दलों से इसका समर्थन करने की अपील की है और इस पहल को सांप्रदायिक चश्मे से नहीं देखने को कहा है।
नायडू और नीतीश से मोदी सरकार को मिली झंडी!
अगर मोदी सरकार ने वाकई वक्फ कानून में बदलाव की ठान ली है तो निश्चित रूप से उसने अपने सबसे अहम सहयोगियों चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार को भरोसे में लिया होगा। क्योंकि, अगर इसे संसद से पास करवाने की पहल होती है तो उनके समर्थन की भी आवश्यकता पड़ेगी। क्योंकि, उनको विश्वास में लिए बिना इसे संसद से पास कराना आसान नहीं होगा।












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