Waqf Bill: बीजू जनता दल ने वक्फ संशोधन विधेयक पर क्यों बदला स्टैंड? BJD के यू-टर्न के पीछे ये डर तो नहीं?
Waqf Bill: वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को लेकर बीजू जनता दल (BJD) ने जो रुख बदला है, वह राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। बीजेडी ने पहले इस विधेयक का विरोध करने की घोषणा की थी, लेकिन राज्यसभा में वोटिंग से ठीक पहले पार्टी ने सांसदों को अपने विवेक से मतदान की छूट दे दी।
यह बदलाव अचानक हुआ नहीं लगता है, बल्कि इसके पीछे कई राजनीतिक कारण और समीकरण काम करते नजर रहे हैं। नवीन पटनायक की पार्टी के हृदय परिवर्तन के पीछे की असलियत को समझना दिलचस्प हो सकता है।

Waqf Amendment Bill: बीजेडी का बदला हुआ स्टैंड
बीजू जनता दल के राष्ट्रीय प्रवक्ता सस्मित पात्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी कि पार्टी ने इस बिल पर कोई व्हिप जारी नहीं किया है।
उन्होंने लिखा, 'बीजू जनता दल हमेशा धर्मनिरपेक्षता और समावेशिता के सिद्धांतों का पालन करता रहा है। हम वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर अल्पसंख्यक समुदायों के विभिन्न वर्गों की चिंताओं का सम्मान करते हैं। हमारी पार्टी ने इन विचारों पर विचार-विमर्श करने के बाद अपने राज्यसभा सांसदों को विवेकानुसार मतदान करने की स्वतंत्रता दी है।'
हाल के दिनों में यह पहली बार है, जब बीजेडी ने इस तरह से विपक्षी दलों से अलग रुख अपनाया है। पहले पार्टी ने इस विधेयक का विरोध करने की घोषणा की थी।
Waqf Bill Naveen Panayak: बीजेडी का ऐतिहासिक रुख और वर्तमान राजनीति
बीजू जनता दल का बीजेपी के साथ संबंध हमेशा से लचीला रहा है। मोदी सरकार के पिछले दो कार्यकालों में पार्टी ने कई महत्वपूर्ण मौकों पर केंद्र का समर्थन किया है। जिनमें अनुच्छेद 370 हटाने,नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और तीन तलाक बिल का समर्थन शामिल है।
इन उदाहरणों से साफ है कि बीजेडी कई बार केंद्र सरकार के पक्ष में खड़ा रहा है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि पार्टी ने इस बार भी एक संतुलित रुख अपनाने की कोशिश की है, ताकि वह न तो पूरी तरह विपक्ष के साथ जाए और न ही सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलता नजर आए।
Waqf Bill Rajya Sabha: राज्यसभा में समीकरण और बीजेडी की स्थिति
अगर राज्यसभा की मौजूदा स्थिति को देखा जाए, तो बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को वक्फ संशोधन बिल पास कराने के लिए 119 वोटों की ही जरूरत थी, जबकि उसके पास 125 सांसदों का समर्थन है। वहीं, विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के पास केवल 88 सांसद हैं। ऐसे में अगर बीजेडी इस बिल का विरोध भी करता, तो भी इसका सरकार पर कोई असर नहीं पड़ता।
बीजेडी ने इस बात को भली-भांति समझते हुए अपने सांसदों को स्वतंत्र निर्णय लेने की छूट दी है। इसका मतलब यह हो सकता है कि पार्टी अपने सांसदों को किसी भी विवाद में उलझाने के बजाय उनके विवेक पर फैसला छोड़ना चाहती है।
Waqf Bill: BJD के यू-टर्न के पीछे ये डर तो नहीं?
बीजू जनता दल के इस रुख में बदलाव को देखते हुए सवाल उठता है कि क्या पार्टी किसी दबाव में है? क्योंकि, पिछले साल सितंबर में बीजेडी के सांसद सुजीत कुमार ने राज्यसभा से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया था।
दिलचस्प तथ्य यह है कि सुजीत कुमार ने जब बीजेडी को झटका दिया, उससे एक दिन पहले ही ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने वक्फ (संशोधन) बिल, 2024 के विरोध का एलान करते हुए कहा था कि इसको लेकर अल्पसंख्यकों में 'असुरक्षा की भावना' है।
उनसे पहले ममता मोहंता ने भी बीजद और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा दिया था। फिर तुरंत ही वो बीजेपी के सदस्य के रूप में चुनकर उच्च सदन में पहुंच गईं। इसका सीधा असर पार्टी की राज्यसभा में संख्या बल पर पड़ा है। पहले 9 सांसदों वाली बीजेडी अब 7 सांसदों तक सिमट चुकी है।
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विश्लेषकों का मानना है कि बीजेडी को डर है कि अगर वह केंद्र सरकार के खिलाफ ज्यादा आक्रामक रुख अपनाएगा, तो उसके कुछ और सांसद भी बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। चूंकि पार्टी लोकसभा में पहले से ही बिना किसी सांसद के है, ऐसे में राज्यसभा में अपनी मौजूदा स्थिति को कमजोर करने का जोखिम नहीं लेना चाहता।












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