IAS VK Pandian: ओडिशा में नेतृत्व के पीछे खड़ा एक चमत्कारिक व्यक्तित्व
21वीं शताब्दी के पहले दो दशकों में देश के जिन राज्यों ने सबसे बड़ा बदलाव देखा है, उनमें ओडिशा पहली कतार में खड़ा है। सामाजिक से लेकर आर्थिक जीवन के हर क्षेत्र में इस राज्य ने नई बुलंदियों को छूने में सफलता पाई है।
ओडिशा ने एक गरीब कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था वाले राज्य से खुद को देश की सबसे तेजी से विकसित होने वाली अर्थव्यवस्था में शामिल किया है, जिसका जोर पिछले कुछ वर्षों से टेक्नोलॉजी और नई तरह की अर्थव्यवस्था पर है। इसमें कोई दो राय नहीं कि ओडिशा में हुए बदलाव के पीछे राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का सुलझा हुआ नेतृत्व है। लेकिन, उसके पीछे खड़े एक चमत्कारिक इंसान को समझे बिना ओडिशा में हुए कायाकल्प को समझना नामुकिन है।

ओडिशा ने खासकर पिछले 15 वर्षो में जो बदलाव देखा है, उसके पीछे शासन-व्यवस्था में लाया गया गतिशील परिवर्तन है; और इस बदलाव के पीछे जिसने प्रभावी भूमिका निभाई है, वह कोई और नहीं, बल्कि सीएम पटनायक के भरोसेमंद सहयोगी वीके पांडियन हैं। ओडिशा ने आज जो भी तरक्की देखी है, उसके पीछे इन्हीं की लीडरशिप है, जो हमेशा विवादों से परे रही है।
साल 2000 में यह ऊर्जावान युवा नौकरशाह ओडिशा सरकार में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)के अधिकारी के तौर पर शामिल हुआ था। जब कालाहांडी के धर्मगढ़ में पहली बार इनकी सब-कलेक्टर के तौर पर तैनाती हुई थी, तभी इनमें जनता के कल्याण के लिए ललक की झलक दिख गई थी। इन्होंने वहां जिस तरह से जनहित के कदम उठाने शुरू किए यह बात मुख्यमंत्री तक पहुंचते देर नहीं लगी। जन-कल्याण के कार्यों के लिए सीएम की सराहना तभी से मिलनी शुरू हो गई थी।

जब पांडियन को ओडिशा के सबसे बड़े मयूरभंज जिले की जिम्मेदारी दी गई तो वे देश के सबसे युवा कलेक्टरों में शामिल थे। उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पूरी करने के लिए जिस तरह से दूर-दराज के गांवों के दौरे शुरू किए, उससे विकास योजनाओं को गति मिलने में मदद मिली। उन्होंने राष्ट्रीय और प्रादेशिक योजनाओं को अमल में लाना तो शुरू किया ही, दिव्यांगों के कल्याण के लिए जो कदम उठाए, उसकी वजह से मयूरभंज को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इसके बाद अलग-अलग जिम्मेदारी के साथ पांडियन की तैनाती और पुरस्कारों का क्रम चल पड़ा।
मयूरभंज में रहकर उन्होंने जिस तरह से जन-कल्याण के कार्यों को तामील कराया, उससे यह बात सामने आई कि कैसे जनहित वाले प्रशासन की मदद से नक्सलवाद को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इसके बाद वह गंजम के कलेक्टर बने और वहां भी लीक से अलग हटकर काम करके अपनी अलग पहचान कायम की। वे जहां भी रहे, वहां जन-कल्याण के कार्यों पर फोकस रहने के अलावा भ्रष्टाचार मिटाने के लिए प्रभावी कदम उठाते रहे। गंजम कलेक्टर रहते हुए एचआईवी पॉजिटिव लोगों के पुनर्वास के लिए भी उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। तबतक वीके पांडियन की ओडिशा ही नहीं, बल्कि देश की नौकरशाही में एक अलग पहचान बन चुकी थी।

मुख्यमंत्री पटनायक उनके कार्यों पर शुरू से नजर रख रहे थे। उनके गुणों को देखकर 2011 में वे उन्हें सीएमओ में ले आए और प्रदेश के विकास के लिए अपनी टीम में एक बड़ा रोल थमा दिया। पांडियन मुख्यमंत्री नवीन पटनाटक के प्राइवेट सेक्रेटरी बनाए गए। ओडिशा सरकार के अंदर यह ऐसी प्रशासनिक घटना थी, जिसके बाद न तो राज्य को और न ही पांडियन को फिर कभी पीछे मुड़कर देखने की जरूरत पड़ी।
मुख्यमंत्री को पता चल गया था कि यह युवा अधिकारी न सिर्फ दूरदर्शी प्रशासक है, बल्कि ऊर्जावान, स्पष्टवादी और मेहनती भी है। फिर ओडिशा ने सीएम नवीन पटनाटक की सोच के अनुसार 5T पहल से प्रेरित बदलाव का अभियान शुरू किया और पांडियन नए ओडिशा के रखवाले बनकर उभर आए। मुख्यमंत्री और पांडियन दोनों ने ओडिशा के आम आदमी को ध्यान में रखकर शासन का मॉडल तैयार किया और नए ओडिशा की कहानी तैयार होनी शुरू हो गई।

ओडिशा में 5T पहल की शुरुआत 2018 में हुई और राज्य में शासन और प्रशासन का तरीका ही बदल गया, जिसके केंद्र में आम आदमी हो गया। पिछले कुछ वर्षों में ओडिशा के विकास में जो कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं, उनमें मो सरकार (Mo Sarkar), ऐतिहासिक और धार्मिक स्थानों का बदलाव, पुरी में हेरीटेज कॉरिडोर प्रोजेक्ट, 5T हाई स्कूल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम, ओडिशो को भारत का स्पोर्टिंग हब बनाना, पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं में परिवर्तन, सभी जिलों में सिंचाई सुविधाओं का पुनरुत्थान, मिशन शक्ति के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना और ओडिशा को देश का स्टील मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना शामिल है।
पांडियन की उपलब्धियों में कोविड-19 की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करना भी शामिल है। उनके नेतृत्व में समय से पहले ओडिशा में इस चुनौती से निपटने की व्यवस्था पूरी की गई। महामारी के दौरान ओडिशा देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल रहा है, जहां सबसे कम जनहानि हुई। रिकॉर्ड समय में देश का सबसे बड़ा अस्पताल खड़ा किया गया और देशभर में ऑक्सीजन सप्लाई सुनिश्चित करके लाखों लोगों की जान बचाई।
ओडिशा आज देश में स्पोर्टिंग हब की तरह विकसित हो रहा है तो उसके पीछे भी पांडियन की भूमिका महत्वपूर्ण है। पांडियन ने शुरू से एक रोल बखूबी निभाया है। मुख्यमंत्री की सोच आम आदमी के विकास को लेकर केंद्रित है और राज्य भर में उसे जमीनी स्तर पर पहुंचाने की जिम्मेदारी पांडियन ने संभाल रखी है। पिछले 6 महीनों में उन्होंने पूरे राज्य का दौरा किया है और लाखों लोगों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनी हैं; और 5T पहल की वजह से उनमें से 90 फीसदी समस्याओं को फौरन समाधान हो चुका है।

ओडिशा के लोगों में आज एक विश्वास है कि नवीन सरकार में पांडियन ही वह व्यक्ति हैं, जो प्रदेश में विकास और परिवर्तन ला सकते हैं और उनकी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। मंगलवार को पूर्व आईएएस अधिकारी वीके पांडियन को '5T'और 'नबीन ओडिशा' का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने उन्हें अपनी सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया है।
पांडियन प्रशासनिक जीवन में जितने ही अकल्पनीय प्रतिभा के धनी व्यक्ति हैं, निजी जीवन में उतने ही सादगी पसंद इंसान हैं। उन्हें सिविल सर्विस में पहले पंजाब कैडर मिला था। लेकिन, सुजाता राउत से विवाह के बाद उन्होंने ओडिशा को अपना कर्म क्षेत्र बनाने का फैसला किया। सुजाता राउत अभी ओडिशा में मिशन शक्ति की कमिश्नर-कम-सेक्रेटरी हैं।
ओडिशा के लोगों के में उनके प्रति जो एक लगाव है, वह अद्भुत है। यह बात भी सही है कि उन्हें ओडिशा के लोगों से दामाद होने का भी सम्मान मिलता है। क्योंकि, हाल ही में केंद्रपाड़ा के लोगों ने उन्हें जिस तरह से पारंपरिक स्वागत किया, उससे पता चलता है कि कैसे ओडिशा की जनता के दिलों में उन्होंने अपना घर बसा लिया है।












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