'सुरक्षा कवर जारी रहेगा', फोगाट के 'महिला पहलवानों की सुरक्षा हटाई गई' के आरोपों पर दिल्ली पुलिस
भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में महिला पहलवान गवाही देने के लिए तैयार हैं। वहीं, शीर्ष पहलवान विनेश फोगट ने गुरुवार को कहा कि दिल्ली पुलिस ने उन महिला पहलवानों की सुरक्षा वापस ले ली है, जो गवाही देने वाली हैं।
पहलवानों ने अधिकारियों द्वारा उनकी सुरक्षा वापस लिए जाने पर चिंता जताते हुए दिल्ली की एक कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी कर सुरक्षा कवर को तत्काल बहाल करने का निर्देश दिया। सुरक्षा बहाल करने के अलावा कोर्ट ने पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) को शिकायतकर्ताओं से सुरक्षा वापस लेने के पीछे के कारणों की विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। यह रिपोर्ट अगली सुनवाई पर पेश की जानी है।

दिल्ली पुलिस का आरोपों से इनकार
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने इस आरोप से इनकार किया है। डीसीपी नई दिल्ली ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कहा कि पहलवानों को दी गई सुरक्षा वापस नहीं ली गई है। यह निर्णय लिया गया है कि भविष्य में हरियाणा पुलिस से यह जिम्मेदारी लेने का अनुरोध किया जाए, क्योंकि सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति आमतौर पर वहीं रहते हैं। नियुक्त दिल्ली पुलिस के पीएसओ इस निर्णय को गलत समझ गए और आज रिपोर्ट करने में देरी कर दी। स्थिति को सुधार लिया गया है। सुरक्षा कवर जारी रहेगा।
क्या है मामला?
कई महिला पहलवानों ने बृज भूषण पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था, हालांकि पूर्व बीजेपी सांसद ने इस आरोप को नकार दिया था। पिछले साल जनवरी में देश के शीर्ष पहलवानों ने बृज भूषण सिंह की गिरफ्तारी की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। यह विरोध कई महीनों तक चला था।
दिल्ली पुलिस ने पिछले साल अप्रैल में इस मामले में पहली प्राथमिकी दर्ज की थी, तथा पिछले साल जून में दिल्ली की एक अदालत में आरोपपत्र दायर किया गया था। इस वर्ष मई में दिल्ली की अदालत ने कहा था कि उसे छह में से पांच मामलों में बृजभूषण के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सामग्री मिली है।
इसके बाद, कोर्ट ने पांच शिकायतकर्ताओं के आरोपों के आधार पर सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 (शील भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) और 354 ए (यौन उत्पीड़न) के तहत आरोप तय किए। इसके अलावा, दो अलग-अलग मामलों में धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत भी आरोप तय किए गए।












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