क्या किया कानपुर ने जब कुपवाड़ा हमले के शहीद कैप्टन आयुष का शव पहुंचा शहर
25 वर्ष के शहीद कैप्टन आयुष यादव का शव जैसे ही पहुंचा कानपुर लोगों ने रास्ते में रुक-रुक कर किया उनकी शहादत को सलाम। तीन वर्ष पहले सेना में हुए थे कमीशंड और हाल में कैप्टन रैंक पर हुआ था प्रमोशन।
कानपुर। गुरुवार तड़के कुपवाड़ा के पंझगाम स्थित चौकीबल में सेना के कैंप पर आतंकी हमला हुआ। इस हमले में 25 वर्ष के कैप्टन आयुष यादव भी शहीद हो गए। उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले कैप्टन आयुष को तीन वर्ष पहले ही सेना में कमीशन मिला था और हाल ही में वह कैप्टन की रैंक पर प्रमोट हुए थे। जब उनका शव उनके गृहनगर कानपुर पहुंचा तो शहर ने जिस तरह से प्रतिक्रिया दी वह अपने आप में शायद बाकी लोगों को प्रेरित करने वाली हो सकती है।

जगह जगह लोगों ने किया सैल्युट
कैप्टन आयुष का शव सबसे पहले चकेरी स्थित एयरफोर्स स्टेशन पहुंचा और यहां से उसे उनके डिफेंस कॉलोनी स्थित घर ले जाया गया। जगह-जगह पर जिसने भी तिरंगे में लिपटे कैप्टन आयुष के शव को देखा वह वहीं रुक गया और फिर कैप्टन को सैल्युट देकर उनकी शहादत को सलाम किया गया।

याद रहेगी शहादत
आज कैप्टन आयुष का अंतिम संस्कार किया गया और निश्चित तौर पर यह पल आंख में आंसू लाने वाला होगा। कैप्टन आयुष के पिता पुलिस में हैं और उनके परदादा जी रॉयल एयरफोर्स में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। कैप्टन आयुष तीन वर्ष पहले ही सेना में कमीशंड हुए थे और हाल ही में वह कैप्टन की रैंक पर प्रमोट हुए थे।

हाल ही में आए थे अपने घर
कैप्टन आयुष की बड़ी बहन की शादी फरवरी में हुई थी और वह इस मौके पर अपने घर आए थे। वह अक्सर अपने माता-पिता से कहते थे कि वह श्रीनगर घूम जाएं लेकिन उनके पिता अक्सर उन्हें जवाब देते कि अभी पत्थरबाजी के माहौल में नहीं आ सकते। इस पर वह अपने कैप्टन पिता को जवाब देते कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं क्योंकि वह उनके साथ होंगे।

मां के बहुत करीब थे कैप्टन
गुरुवार को हमले से कुछ घंटे पहले ही कैप्टन आयुष ने अपने घर पर बात की थी। वह अपनी मां के बहुत करीब थे और उनसे हर बात शेयर करते थे। 312 मीडियम रेजीमेंट के कैप्टन आयुष के अलावा हमले में 155 मीडियम रेजीमेंट के सूबेदार भूप सिंह और 16 मद्रास रेजीमेंट के नायक बीवी रमन्ना शहीद हो गए वहीं पांच जवान घायल हैं।

पिता ने किया पीएम मोदी से सवाल
कैप्टन आयुष के पिता अरुण कांत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस समय जम्मू कश्मीर के हालातों पर ध्यान नहीं दे रही है। कैप्टन आयुष अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे।
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