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35 साल पहले भोपाल गैस त्रासदी की जंग जीतने वाले पांच लोग Coronavirus से हारे, मौत

भोपाल। भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 10,000 के पार जा चुकी है। महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। वैश्विक महामारी से देशभर में अब तक कुल 377 लोगों की मौत हो चुकी है, इनमें से पांच लोग वह भी थे जिन्होंने 35 साल पहले हुई त्रासदी 'भोपाल गैस कांड' का सामना किया था। मृतकों ने उस भयावह औद्योगिक त्रासदी से तो जिंदगी की जंग जीत ली लेकिन कोरोना वायरस महामारी से लड़ाई हार गए।

पांच अप्रैल से 12 अप्रैल के बीच हुई सभी मौतें

पांच अप्रैल से 12 अप्रैल के बीच हुई सभी मौतें

मध्य प्रदेश में कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा प्रकोप भोपाल, इंदौर जैसे बड़े शहरों में है। कोरोना वायरस से मरने वाले सभी लोगों की मौत पांच अप्रैल से लेकर 12 अप्रैल के बीच हुई। हैरान करने वाली बात यह है कि भोपाल में महामारी से कुल पांच लोगों की मौत हुई है और यह पांचों मरीज भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ित थे।

35 साल पहले घटी थी औद्योगिक त्रासदी

35 साल पहले घटी थी औद्योगिक त्रासदी

मालूम हो कि 35 साल पहले 2-3 दिसंबर, 1984 में भोपाल में बहुत बड़ी औद्योगिक त्रासदी हुई थी जिसे लोग 'भोपाल गैस कांड' के नाम से भी जानते हैं। उस रात यूनियन कार्बाइड के कारखाने से रिसने वाली जहरीली गैस 'मिक' ने पूरे भोपाल सहित आस-पास के क्षेत्रों को भी चपेट में ले लिया था। उस भयानक घटना में हजारों लोगों की जानें गईं और हादसे के करीब साढ़े तीन दशक तक उस त्रासदी के पीड़ितों को तमाम स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा था।

गैस त्रासदी पीड़ितों के लिए बने अस्पताल में नहीं हो रहा इलाज

गैस त्रासदी पीड़ितों के लिए बने अस्पताल में नहीं हो रहा इलाज

'भोपाल गैस त्रासदी' में जीवित बचे लोगों के हितों के लिए अरसे से काम करने वाले संगठन 'भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन' की सदस्य रचना ढींगरा ने बुधवार को दावा किया है कि भोपाल में कोरोना वायरस से मरने वाले पांचों लोग भोपाल गैस कांड के पीड़ित थे। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण से अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है।

सरकार ने बीएमएचआरसी को कोरोना जांच के लिए किया चिन्हित

सरकार ने बीएमएचआरसी को कोरोना जांच के लिए किया चिन्हित

रचना ढींगरा का आरोप है कि राज्य सरकार ने कोरोना संकट को देखते हुए भोपाल गैस पीड़ितों के लिए बने अस्पताल 'भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर' (बीएमएचआरसी) को महामारी उपचार सेंटर के रूप में चिन्हित किया है। इस वजह से अस्पताल में सिर्फ कोरोना पीड़ितों का ही इलाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा, सरकार के इस फैसले से भोपाल गैस पीड़ितों को अपना इलाज कराने में मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।

रचना ढींगरा ने केंद्र सरकार से की शिकायत

रचना ढींगरा ने केंद्र सरकार से की शिकायत

रचना ढींगरा ने आगे कहा कि उन्होंने इस दिशा में राज्य एवं केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखकर जानकारी दी थी। 21 मार्च को लिखे पत्र में कहा गया कि गैस पीड़ितों में कोरोना का संक्रमण होने की आशंका अन्य लोगों की तुलना में पांच गुना ज्यादा है। ढींगरा का आरोप है कि सरकार ने उनकी चिट्ठी पर कोई ध्यान नहीं दिया और अस्पताल बीएमएचआरसी को भोपाल गैस पीड़ितों के इलाज के लिए पूर्ण रूप से बंद कर दिया है। रचना ढींगरा ने बताया कि 5 अप्रैल को कोरोना वायरस से मरने वाले 55 वर्षीय व्यक्ति गैस कांड से गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे और उन्हें फेफड़े की समस्या थी।

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