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वरुण गांधी को 'उलट बयानी' पर पहली बार पार्टी से मिली नसीहत, भाजपा सांसद बोले- वे बच्चे थे जब उनकी दादी ने.....

नई दिल्ली, 29 अक्टूबर: भारतीय जनता पार्टी के एक राज्यसभा सांसद ने पहली बार यूपी के पीलीभीत लोकसभा सीट से पार्टी सांसद वरुण गांधी को उनके बयानों को लेकर नसीहत दी है और कहा है कि उनके लिए ऐसा करना उचित नहीं है। पार्टी सांसद हरनाथ सिंह यादव ने दावा किया है कि वरुण को पार्टी में 'असुविधा' महसूस हो रही है और उनसे कहा है कि उन्हें वह दिन भूलना नहीं चाहिए, जब उनकी मां और बीजेपी एमपी मेनका गांधी पहली बार किन परिस्थितियों में बीजेपी में शामिल हुई थीं।

'उनकी दादी ने उनकी मां को बाहर कर दिया था, तब बीजेपी ने...'

'उनकी दादी ने उनकी मां को बाहर कर दिया था, तब बीजेपी ने...'

उत्तर प्रदेश से बीजेपी के राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने वरुण गांधी की ओर से पार्टी की नीतियों के खिलाफ लगातार 'उलट बयानबाजी' पर सवाल उठाया है और उन्हें सलाह दी है कि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। यादव ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा है, 'ऐसा लगता है कि वरुण गांधी को बीजेपी में असुविधा महसूस हो रही है। उन्हें वो दिन याद रखना चाहिए, जब वे बच्चे थे और उनकी दादी ने उनकी मां (मेनका गांधी) को बाहर कर दिया था। उस समय बीजेपी ही सिर्फ ऐसी पार्टी थी, जिसने उन्हें सुरक्षा दी थी। बाद में बीजेपी ने उन्हें एमपी बनाया और उनकी मां को मंत्री बनाया।'

यह उचित नहीं है- हरनाथ यादव

यह उचित नहीं है- हरनाथ यादव

यादव ने कहा है कि बीजेपी ने उन्हें इतना कुछ दिया है फिर भी 'वरुण गांधी इस तरह से पार्टी की नीतियों के खिलाफ बोल रहे हैं।' उनके मुताबिक, 'यह उचित नहीं है और मैं समझता हूं कि उन्होंने खूद ही अपनी अलग लाइन बना ली है।' गौरतलब है कि वरुण गांधी ने शुक्रवार को भी कहा है कि जबतक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्यों (एमएसपी) को कानूनी गारंटी नहीं मिलती, मंडियों में उनका उत्पीड़न होता रहेगा। वरुण ने अपना ही वीडियो शेयर करके ट्विटर पर लिखा, "जब तक एमएसपी की वैधानिक गारंटी नहीं होगी, ऐसे ही मंडियों में किसानों का शोषण होता रहेगा। इस पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।" उन्होंने यहां तक कहा है कि 'अब सरकार के आगे गिड़गिड़ाउंगा नहीं, किसानों के लिए सीधे कोर्ट जाऊंगा।'

वरुण गांधी अपनी ही पार्टी की नीतियों पर हैं हमलावर

वरुण गांधी अपनी ही पार्टी की नीतियों पर हैं हमलावर

बता दें कि लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के बाद से वरुण गांधी ने ऐसा कोई मौका नहीं छोड़ा है, जिससे उन्होंने अपनी ही सरकार को परेशानी में ना डाला हो। इसको लेकर उनके कांग्रेस में जाने तक की अटकलें लगाई जा चुकी हैं। इससे पहले 23 अक्टूबर को भी उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश के किसानों को उनकी फसलों का उचित दाम नहीं मिल रहा है और योगी आदित्यनाथ सरकार से कहा था कि किसानों को उनका अधिकार सुनिश्चित कराया जाए, जिसके वह हकदार हैं।

राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर किए जा चुके हैं वरुण

राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर किए जा चुके हैं वरुण

वरुण गांधी की ओर से पार्टी की सरकारों की नीतियों पर निशाना साधने के बाद उन्हें और सुलतानपुर से सांसद उनकी मां को बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से अलग किया गया था। हालांकि, मेनका ने साफ किया है वह भाजपा में लंबे समय से हैं और चाहती हैं कि नए लोगों को भी मौका मिलना चाहिए। लेकिन, लखीमपुर खीरी की वारदात के बाद वरुण के तेवर देखने के बाद यही कहा गया कि पार्टी ने इसी के चलते उन्हें इस पार्टी की इस महत्वपूर्ण संस्था से अलग किया है।

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