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आप के अरविंद केजरीवाल खुद नहीं चाहते हैं देश में स्टेबिलिटी

Arvind Kejriwal in Varanasi
वाराणसी। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल जब वाराण्सी पहुंचे तो पूरे देश का मीडिया गंगा के तट पर कैमरा लगाकर खड़ा हो गया। जैसे ही केजरीवाल ने वाराणसी से चुनाव लड़ने का ऐलान किया वैसे ही आम बनारसी के मन में इस बात का कौतूहल मचने लगा कि अब किसे वोट करें? पूरा देश जानता है कि इस बार लोकसभा चुनाव का केंद्र बिंदु काशी ही है और काशी के वासी ही तय करेंगे कि मोदी प्रधानमंत्री बनेंगे या नहीं। खैर लोगों के मन में एक सवाल और चल रहा है, वो है आख‍िर केजरीवाल का मकसद क्या है?

तो इस पर हम कोई चुनावी समीक्षा नहीं लिखने जा रहे हैं और न ही हमने किसी आप कार्यकर्ता से बात की है, क्योंकि केजरीवाल ने खुद साफ कर दिया है कि वो 2014 में ही दोबारा लोकसभा चुनाव चाहते हैं।

पढ़ें- केजरीवाल हैं लोकसभा चुनाव के जिम कैरी

मंगलवार को केजरीवाल ने अपने कहा, "मैं आपके सामने प्रस्ताव रखता हूं। हम मिलकर यूपीए और एनडीए को हरायेंगे। यूपीए के शहंशाह राहुल गांधी, एनडीए के मोदी हैं। इन दोनों को इन चुनावों में हरा दिया, तो ये दोनों सेनाएं ध्वस्त हो जायेंगी। अगर ये दोनों हार जाती हैं, तो देश की राजनीति में भूचाल आ जायेगा। आज तक आप इन पार्टियों के गुलाम थे, इन दोनों पार्टियों को अब उखाड़ फेंको। इन चुनावों को क्रांति में बदल दो। इस बार राहुल, मोदी को हराना है। इस बार केवल दो संसदीय क्षेत्रों में होगा- अमेठी और वाराणसी में।

केजरीवाल ने आगे कहा- अगर इन दोनों को हरा दिया तो एक साल के अंदर दोबारा चुनाव होंगे, और तब ईमानदार लोग चुने जायेंगे और देश में ईमानदार चाहिये। इन लोगों को स्टेबिलिटी चाहिये। किसको चाहिये स्टेबिलिटी? स्टेबिलिटी तो अंबानी को चाहिये। हमें कोई प्रॉबलम नहीं है, अगर दोबारा चुनाव होते हैं।

केजरीवाल के भाषण में साफ है कि वो देश में स्टेबिलिटी नहीं चाहते, यानी वो नहीं चाहते कि देश स्थाई रूप से आगे बढ़े। उन्हें देश की राजनीति में उथलपुथल अच्छी लगी है, शायद इसीलिये उन्होंने दिल्ली विधानसभा को 49 दिन में ही भंग कर दी और इस्तीफा दे दिया। अगर आप यह सोच रहे हैं कि वो केजरीवाल की मजबूरी थी क्योंकि वो अल्पमत में थे, तो हम आपको बताना चाहेंगे कि बिहार में नीतीश कुमार की सरकार भी अल्पमत में चल रही है, लेकिन नीतीश मजबूती से डटे हुए हैं और बिहार को प्रगति के नये पथ की ओर ले जा रहे हैं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी के काउंसिलर, लखनऊ के श्री जय नारायण पीजी कॉलेज के रीडर एवं अख‍िल भारतीय अध‍िकार संगठन के अध्यक्ष डा. आलोक चांटिया का कहना है कि अगर केजरीवाल लोकपाल बिल के चक्कर में नहीं पड़कर दिल्ली में सरकार को चलाते रहते और विकास की नई ऊंचाईयों को छूते, तो अन्य राज्यों में उन्हें निश्च‍ित तौर पर मिलती। केजरीवाल की यह सोच कि लोकपाल ही भ्रष्टाचार खत्म कर सकता है, गलत है, क्योंकि लोकपाल तो सिर्फ एक प्रहरी होगा, भ्रष्टाचार को रोकना तो मंत्रियों और अध‍िकारियों का काम होता है।

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