Jharkhand: कोई जॉइनिंग के दूसरे दिन रिटायर, किसी को रिटायरमेंट के बाद मिली सरकारी नौकरी, झारखंड में गजब खेल

Jharkhand Teacher Recruitment Controversy: झारखंड में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। राज्य सरकार ने 29 जून को 1000 से ज्यादा शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिए, लेकिन इनमें कुछ ऐसे शिक्षक भी थे जो अगले ही दिन सेवानिवृत्त हो गए।

इतना ही नहीं, एक शिक्षक को तो रिटायरमेंट के बाद नियुक्ति पत्र मिला। यह स्थिति भर्ती प्रक्रिया में हुई देरी और पारा शिक्षकों के लिए तय आयु सीमा के कारण बनी। अब यह मामला चर्चा का विषय बन गया है और लोग सवाल उठा रहे हैं कि ऐसी नियुक्ति का आखिर फायदा किसे मिला।

Jharkhand Teacher Recruitment Controversy

जॉइनिंग लेटर मिला, अगले ही दिन हो गए रिटायर

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची में आयोजित कार्यक्रम में नवनियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इनमें कुछ ऐसे शिक्षक भी शामिल थे, जिन्हें 29 जून को नियुक्ति पत्र मिला और 30 जून को उनकी 60 साल की उम्र पूरी होने के साथ ही वे सेवानिवृत्त हो गए। यानी नौकरी मिलने की खुशी सिर्फ एक दिन ही रह गई। यह मामला सामने आने के बाद भर्ती प्रक्रिया की टाइमिंग और देरी को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।

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एक शिक्षक को रिटायरमेंट के बाद मिला नियुक्ति पत्र

पलामू के शिक्षक मो. नियूम अंसारी का मामला सबसे ज्यादा चर्चा में है। उनकी उम्र 31 मई 2026 को 60 साल हो गई थी, यानी वे पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके थे। इसके बावजूद उन्हें 29 जून को नियुक्ति पत्र दिया गया। उन्होंने कहा कि अब इस नियुक्ति पत्र का कोई व्यावहारिक उपयोग नहीं है, इसलिए इसे वे अपनी जिंदगी की एक याद के तौर पर संभालकर रखेंगे।

भर्ती में देरी बनी बड़ी वजह

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पूरी स्थिति भर्ती प्रक्रिया में देरी के कारण बनी। जिन पारा शिक्षकों ने 2023 में 57-58 साल की उम्र में आवेदन किया था, उनकी चयन प्रक्रिया पूरी होते-होते तीन साल लग गए। इस दौरान कई उम्मीदवार 60 साल की आयु पूरी कर चुके थे। इसलिए जब नियुक्ति पत्र मिला, तब तक कुछ लोग रिटायर हो चुके थे और कुछ रिटायरमेंट के बिल्कुल करीब पहुंच गए थे।

पारा शिक्षकों के लिए अलग आयु सीमा का असर

झारखंड में शिक्षक भर्ती नियमों के तहत पारा शिक्षकों के लिए 50 फीसदी सीटें आरक्षित हैं। उनके लिए आवेदन की अधिकतम आयु सीमा 58 साल तय की गई थी। इसी नियम के तहत कई अनुभवी पारा शिक्षकों ने आवेदन किया था। लेकिन चयन और नियुक्ति में लंबा समय लगने की वजह से कई उम्मीदवार नौकरी मिलने तक सेवानिवृत्ति की उम्र तक पहुंच गए, जिससे यह असामान्य स्थिति पैदा हुई।

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नंदलाल रवानी की कहानी बनी चर्चा का विषय

जामताड़ा के नंदलाल रवानी वर्ष 2006 से पारा शिक्षक के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने 2016 में शिक्षक पात्रता परीक्षा पास की और 2023 में सहायक आचार्य भर्ती के लिए आवेदन किया। लंबी प्रक्रिया के बाद 29 जून 2026 को उन्हें नियुक्ति पत्र मिला, लेकिन अगले ही दिन 30 जून को उनकी 60 साल की उम्र पूरी हो गई और वे सेवानिवृत्त हो गए। उनका मामला अब झारखंड शिक्षक भर्ती की सबसे चर्चित कहानियों में शामिल हो गया है।

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