Vande Bharat Train: वंदे भारत में बंधुआ मजदूरी! 10 हजार सैलरी और 18 घंटे काम, स्टाफ का दर्द सुन लाल हुए सांसद
Vande Bharat Imran Masood Video: सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने वंदे भारत एक्सप्रेस में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार को उजागर कर रेलवे प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। सफर के दौरान जब कर्मचारियों ने अपना दर्द साझा किया, तो पता चला कि आधुनिकता का प्रतीक मानी जाने वाली इस ट्रेन के पीछे 'शोषण का काला खेल' चल रहा है।
मात्र 10 हजार रुपये के वेतन पर युवाओं से 18-18 घंटे काम लिया जा रहा है। मसूद ने इसे सीधे तौर पर रेलवे के निजीकरण का दुष्प्रभाव बताते हुए रेल मंत्री और लोकसभा में इस मुद्दे को पूरी ताकत से उठाने का संकल्प लिया है।

Vande Bharat staff salary: 10 हजार सैलरी और 18 घंटे की 'मजदूरी'
सांसद इमरान मसूद ने पाया कि क्लीनिंग और कैटरिंग स्टाफ को न्यूनतम वेतन (Basic Wages) के मानकों से भी कम पैसा दिया जा रहा है। 18 घंटे की कड़ी ड्यूटी के बावजूद उन्हें केवल 10,000 रुपये मिल रहे हैं। मसूद ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि ठेकेदारों के फायदे के लिए गरीब कर्मचारियों को मशीन की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने इसे श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन बताते हुए तुरंत इसकी जवाबदेही तय करने की मांग की है।
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सोने के लिए महज 3 घंटे और जगह का अभाव
रिपोर्ट के अनुसार, वंदे भारत का स्टाफ भयंकर थकान के बीच काम करने को मजबूर है। उन्हें 24 घंटे में केवल 3 घंटे सोने का समय मिल रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रीमियम ट्रेन होने के बावजूद स्टाफ के पास लेटने या आराम करने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं है। सांसद ने चिंता जताई कि जहां स्लीपर ट्रेनों में थोड़ी जगह मिल भी जाती थी, वहीं वंदे भारत के डिजाइन और सिस्टम ने इन कर्मचारियों का चैन छीन लिया है।
Vande Bharat cleaning staff issues: निजीकरण बना कर्मचारियों के लिए काल
इमरान मसूद ने इस पूरी समस्या की जड़ रेलवे के बढ़ते निजीकरण (Privatization) को बताया है। उनका आरोप है कि रेलवे बोर्ड ठेकेदारों को भारी भुगतान कर रहा है, लेकिन वह पैसा जमीनी स्तर पर काम करने वाले युवाओं तक नहीं पहुंच रहा। ठेकेदार मुनाफा कमा रहे हैं और स्टाफ का उत्पीड़न हो रहा है। उन्होंने कहा कि निजीकरण के नाम पर यह व्यवस्था गरीबों को पीस रही है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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संसद से रेल मंत्रालय तक बड़ी घेराबंदी
इस मुद्दे को संसद के पटल पर रखने के लिए मसूद ने अपनी टीम को 'नियम 377' के तहत नोटिस तैयार करने का निर्देश दिया है। उन्होंने 28 फरवरी को रेल मंत्री से मिलने का समय मांगा है ताकि इस शोषण को बंद कराया जा सके। इसके अलावा, उन्होंने वंदे भारत के संचालन और टाइमिंग में सुधार के सुझाव भी दिए, जिससे यात्रियों का समय बच सके और कर्मचारियों पर काम का बोझ कम हो।












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