भारतीय डॉक्टरों ने किया 'चमत्कार', 32 साल से नहीं बैठ पाई महिला का किया इलाज

नई दिल्ली: उज्बेकिस्तान की एक महिला 32 साल से बैठ नहीं पाई थीं। लेकिन, इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के सर्जनों ने महिला का इलाज किया गया और अब महिला बैठ सकती है। 37 साल की गुलनोरा रैपिखोवा नाम की महिला का बुधवार को ऑपरेशन किया गया। महिला पांच साल की उम्र से बैठ नहीं पा रही है। उसका कहना है कि उसने पढ़ाई भी क्लास में या तो लेट कर पूरी की या खड़े होकर।

पांच साल की उम्र में हुई थीं घटना का शिकार

पांच साल की उम्र में हुई थीं घटना का शिकार

गुलनोरा रैपिखोवा ने बताया कि एक दिन वो घर में अकेली थी, घर में आग लग गई। इसमें उसके पैर, जांघ और पीठ का नीचे का हिस्सा जल गया। उस समय उसकी उम्र महज पांच साल थी। उज्बेकिस्तान के एक छोटे से कसबे में रहने वाली महिला को डॉक्टरों की मदद नहीं मिल पाई, जिसके कारण उसका ठीक से इलाज नहीं हो पाया।

नहीं हो पाया गुलनोरा रैपिखोवा का इलाज

नहीं हो पाया गुलनोरा रैपिखोवा का इलाज

हालाकिं, गुलनोरा रैपिखोवा के माता-पिता ने उसे ठीक करने की पूरी कोशिश की, वो करीब 18 महीने अस्पताल में रही। लेकिन उसके घाव नहीं भर पाए। इलाज के लिए महिला को तजाकिस्तान लाया गया लेकिन कोई असर नहीं हुआ। आठ साल की उम्र में वो स्कूल जाने के लगी। इतने दर्द के बाद भी गुलनोरा रैपिखोवा स्कूल जाती रही। छह महीने पहले उसका जीवन पूरी तरह से बदल गया, जब उज्बेकिस्तान के सिडाराय में अपोलो के डॉक्टरों द्वारा एक फ्री कैंप का आयोजन किया गया था। गुलनोरा ने कहा कि उसे स्थानीय पॉलीक्लिनिक ने एक कॉल किया और बताया कि, 'कुछ भारतीय डॉक्टर आ रहे हैं। मैं बस इसलिए वहां गई क्योंकि मेरे पास खोने के लिए कुछ भी नहीं था।'

इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों ने किया महिला का इलाज

इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों ने किया महिला का इलाज

क्लीनिक में वो गई तो डॉक्टरों ने उसे बैठने के लिए कहा। डॉक्टरों को बताया गया कि वो बैठ नहीं सकती है। इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के डॉक्टर शाहिन नोरेयेजदान को जब इस बात का पता चला कि मैं 32 साल से बैठी नहीं हूं तो वो हैरान हो गए।' डॉक्टर शाहिन ने कहा कि वो जब मैंने महिला की जांघ देखी तो मैं आश्चर्य से लगभग गिर ही गया था। इससे पहले मैंने ऐसा घाव कहीं नहीं देखे थे। इसमें हैरान वाली बात ये थी कि महिला तीन दशकों से इन घाव के साथ जिंदा थीं।' रैपिखोवा को सर्जरी की आवश्यकता थी। लेकिन, उसके पास भारत आने के लिए पैसे नहीं थे। डॉक्टरों ने इसके लिए पैसे का इंतजाम किया और वो भारत आई, जहां उसका इलाज किया गया और अब वो पूरी तरह से ठीक है।

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