ऐतिहासिक ! पहली बार भारत में रिपेयर होगा US नेवी का पोत, तमिनलाडु में बना इतिहास
अमेरिकी नौसेना का जहाज रिपोयरिंग के लिए भारत आया है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इतिहास में पहली बार यूएस नेवी का कोई पोत रिपेयरिंग या मेंटेनेंस के लिए भारत आया है। US navy ship Charles Drew at Kattupalli Chennai Shipyard
चेन्नई, 07 अगस्त : US navy ship Charles Drew के चेन्नई पहुंचने के साथ ही भारत के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। अमेरिकी नौसेना का ये जहाज तमिलनाडु के शिपयार्ड में मरम्मत किया जाएगा। भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी में उस समय एक नया आयाम जुड़ गया जब यूएस नेवी शिप (USNS) चार्ल्स ड्रू मरम्मत और अन्य सेवाओं के लिए रविवार को चेन्नई के कट्टुपल्ली शिपयार्ड पहुंचा। USNS Charles Drew 11 दिनों की अवधि के लिए कट्टुपल्ली शिपयार्ड में रहेगा और विभिन्न क्षेत्रों में मरम्मत की जाएगी।

इतिहास में पहली बार
भारत के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इतिहास में भारत में अमेरिकी नौसेना के जहाज की यह पहली मरम्मत है। अमेरिकी नौसेना ने जहाज के रखरखाव के लिए कट्टुपल्ली में एलएंडटी के शिपयार्ड को एक अनुबंध दिया गया था। US navy ship Charles Drew का चेन्नई शिपयार्ड में आना वैश्विक जहाज मरम्मत बाजार में भारतीय शिपयार्ड की क्षमताओं का प्रतीक है। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय शिपयार्ड उन्नत समुद्री प्रौद्योगिकी प्लेटफार्मों का उपयोग करते हुए व्यापक और लागत प्रभावी जहाज मरम्मत और रखरखाव सेवाएं प्रदान करते हैं।

भारत अमेरिका रणनीतिक साझेदारी
आत्मनिर्भर भारत अभियान का जिक्र कर रक्षा मंत्रालय ने कहा, इससे डिफेंस में आत्मनिर्भरता और मेक इन इंडिया जैसे अभियान को मदद मिलेगी। रक्षा सचिव अजय कुमार ने कहा, भारत को अमेरिकी नौसेना के जहाज USNS Charles Drew का स्वागत करने और पोत की तमिलनाडु यात्रा पर वास्तव में प्रसन्नता हो रही है। भारत की पहल, अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में भी विशेष महत्व रखती है। यह गहरे जुड़ाव की दिशा में नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है।

भारत के पास खुद का डिजाइन हाउस
उन्होंने कहा कि मरम्मत के लिए आया USNS Charles Drew भारतीय जहाज निर्माण उद्योग के परिपक्व होने का भी संकेत है। उन्होंने कहा कि आज, भारत में लगभग 2 बिलियन अमरीकी डॉलर के कारोबार के साथ छह प्रमुख शिपयार्ड हैं। हम न केवल अपनी आवश्यकताओं के लिए जहाज बना रहे हैं। हमारे पास अपना खुद का डिज़ाइन हाउस है जो सभी प्रकार के अत्याधुनिक जहाजों को बनाने में सक्षम है। देश का पहला स्वदेशी विमान वाहक पोत विक्रांत भारतीय जहाज निर्माण उद्योग के विकास का एक चमकदार उदाहरण है।

नवीनतम तकनीक, शानदार पोत
बकौल रक्षा सचिव, नए इनोवेशन और पारिस्थितिकी तंत्र के तहत, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड और कुछ स्टार्ट-अप्स की मदद से ऐसे पोत तैयार किए गए हैं जो ऑटोनोमस मिशन में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। नवीनतम तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है।

डिफेंस एक्सपोर्ट 800 परसेंट बढ़ा
रक्षा सचिव ने कहा कि भारत और अमेरिका संबंधों का बड़े पैमाने और दायरे में विस्तार हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा उद्योग सहयोग में जबरदस्त वृद्धि हुई है। उन्होंने डिफेंस एक्सपोर्ट का जिक्र कर कहा, पिछले चार-पांच वर्षों में भारतीय रक्षा निर्यात में भारी वृद्धि देखी गई है। 2015-16 में निर्यात लगभग 1,500 करोड़ रुपये का था, अब 800% बढ़कर लगभग 13,000 करोड़ रुपये हो गया है।

अमेरिकी पोत का स्वागत
रक्षा सचिव अजय कुमार, वाइस चीफ ऑफ नेवल स्टाफ वाइस एडमिरल एसएन घोरमडे, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग तमिलनाडु और पुडुचेरी नेवल एरिया रियर एडमिरल एस वेंकट रमन और रक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने अमेरिकी पोत US navy ship Charles Drew का स्वागत करने के लिए चेन्नई के शिपयार्ड का दौरा किया। चेन्नई में अमेरिकी दूतावास के महावाणिज्य दूत जुडिथ रेविन और नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास में रक्षा अताशे रियर एडमिरल माइकल बेकर भी उपस्थित रहे।












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