यूपी चुनाव में क्या थी वो 'बड़ी गलती', जिसे 2024 में दोहराने के मूड में नहीं भाजपा
भाजपा का शीर्ष नेतृत्व सबसे पहले उन गलतियों को ठीक करने की योजना बना रहा है, जिन्होंने यूपी के विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए काफी मुश्किलें पैदा कीं।
लखनऊ, 12 मार्च: उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद भारतीय जनता पार्टी की निगाहें अब 2024 के लोकसभा चुनाव पर लगी हैं। लोकसभा चुनाव से पहले हालांकि गुजरात और हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं और इन्हें लेकर भाजपा ने अभी से तैयारी भी शुरू कर दी है। इस बीच सूत्रों के हवाले से खबर है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व सबसे पहले उन गलतियों को ठीक करने की योजना बना रहा है, जिन्होंने यूपी के विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए काफी मुश्किलें पैदा कीं। इसके लिए भाजपा ने एक पूरा एक्शन प्लान भी तैयार किया है।

भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बने थे बागी नेता
दरअसल, यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए उसके बागी नेता एक बड़ी चुनौती बने थे। चुनाव का बिगुल बजते ही स्वामी प्रसाद मौर्य, धर्म सिंह सैनी और दारा सिंह चौहान जैसे कई दिग्गज नेताओं ने भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। इन नेताओं के जाने से हालांकि भाजपा को यूपी चुनाव में कोई नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन उस वक्त चुनाव के दौरान पार्टी को लेकर एक नेगेटिव मैसेज जरूर गया। इनके अलावा वरुण गांधी ने भी पार्टी में ही रहकर भाजपा सरकार के खिलाफ कई बार बगावती तेवर दिखाए।

पार्टी ने माना, समय रहते इन नेताओं को निकाल देते तो...
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा नेताओं का मानना है कि यूपी चुनाव के दौरान पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर अगर समय रहते, पहले ही कार्रवाई हो जाती, तो उन नेताओं को उतनी तवज्जो नहीं मिलती, जो इनके पार्टी छोड़ने के बाद दूसरे दलों में मिली। बगावत की सुगबुगाहट के बावजूद इन नेताओं पर नरमी बरतना भाजपा के लिए उसकी चुनावी रणनीति में एक बड़ा रोड़ा साबित हुआ। ऐसे में अब भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन नेताओं पर कार्रवाई का मन बनाया है, जो पार्टी की नीतियों के खिलाफ बोलते हैं।

क्या है भाजपा का एक्शन प्लान
भाजपा ने जो एक्शन प्लान तैयार किया है, उसके मुताबिक यूपी में पार्टी के खिलाफ बोलने वाले लोकसभा सांसद सबसे पहले निशाने पर हैं। भाजपा का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में इन सांसदों के टिकट काटना ही केवल काफी नहीं होगा, क्योंकि अगर ये सांसद चुनाव के दौरान दूसरे दलों में गए, तो फिर से पार्टी की रणनीति पर असर पड़ेगा। इसलिए, ऐसे नेताओं को अभी से पार्टी से बाहर निकाला जाए। इससे ना केवल भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच अनुशासन को लेकर एक मजबूत संदेश जाएगा, बल्कि इन सांसदों की सीट पर अभी से दूसरे नेताओं को चुनावी तैयारी का मौका भी मिलेगा।

सपा नेताओं की भी टेंशन बढाएगा भाजपा के ये प्लान
भाजपा के इस प्लान से समाजवादी पार्टी के नेताओं की भी मुश्किलें बढ़ेंगी। दरअसल, यूपी में भाजपा के बाद समाजवादी पार्टी दूसरे नंबर पर रही है। ऐसे में भाजपा छोड़ने और भाजपा से निकाले जाने वाले नेताओं के लिए दूसरा विकल्प सपा बन रही है। अब अगर भाजपा अपने कुछ बागी सांसदों को पार्टी से निकालती है और वो सपा में शामिल होते हैं तो उनकी लोकसभा सीट पर पिछले पांच साल से तैयारी कर रहे सपा नेताओं को झटका लगेगा। इस तरह की परिस्थितियों से समाजवादी पार्टी के नेतृत्व को यूपी चुनाव में भी कई विधानसभा सीटों पर जूझना पड़ा था।
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