यूपी की 93% ऑक्सीजन की मांग पूरी, दिल्ली के हिस्से आया सिर्फ 54%- रिपोर्ट
नई दिल्ली, 30 अप्रैल: इस महीने की शुरुआत में जब कोविड-19 की दूसरी लहर ने रफ्तार पकड़नी शुरू की थी, तब दिल्ली की अरविंद केजरीवाल और यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार दोनों ने ही अपनी रोजाना की ऑक्सीजन की खपत का अनुमान कम लगाया था। यह तब हुआ था जब केंद्र सरकार सभी राज्यों की जरूरतों का एक खाका तैयार कर रही थी। लेकिन, जब कोरोना ने कहर बरपाना शुरू किया और दोनों ही सरकारों ने अपनी ऑक्सीजन की मांग को संशोधित किया तो केंद्र से यूपी को तो नई मांग का करीब 93 फीसदी हिस्सा प्राप्त हो गया, लेकिन दिल्ली सरकार ने बाद में जितनी जरूरत को संशोधित करके पेश किया, उसका उसे सिर्फ 54 फीसदी हिस्सा ही पूरा हो पाया। हालांकि, इस दौरान कुछ राज्यों को उनकी मांग से भी ज्यादा ऑक्सीजन की पूर्ति हो पाई, जिसमें कई गैर-बीजेपी शासित राज्य भी शामिल हैं।

केंद्र के सामने अनुमानित मांग रखने में राज्यों से हुई चूक
ऑनलाइन पोर्टल दि प्रिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ऑक्सीजन को लेकर दाखिल एफिडेविट में जो आंकड़े दिए हैं, उसके मुताबिक दिल्ली सरकार ने अपनी ऑक्सीजन की मांग का अनुमान कुछ ही दिनों में 133 फीसदी बढ़ा दिया, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने बाद में पहले की तुलना में 100 फीसदी ज्यााद ऑक्सीजन की मांग की। केंद्र सरकार ने 200 पन्नों की एफिडेविट में बताया है कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि आने वाले दिनों में राज्यों को ऑक्सीजन की सप्लाई में दिक्कत ना आए, इसके लिए सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ जिसमें केंद्र सरकार के सबंधित मंत्रालय और ऑक्सीजन बनाने वालों के साथ एक मैपिंग एक्सरसाइज किया गया था। उसी के हिसाब से राज्यों को मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति की जानी थी। इस दौरान 11 से 14 अप्रैल के बीच राज्यों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बैठक की गई और उन्हें अपनी अनुमानित मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत बताने को कहा गया था। तब दिल्ली सरकार ने कहा था कि उसे 20 अप्रैल तक रोजाना 300 मीट्रिक टन, 25 अप्रैल तक 349 मीट्रिक टन और 30 अप्रैल तक सिर्फ 445 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन की ही आवश्यकता होगी। जबकि इसी अवधि के दौरान यूपी सरकार ने क्रमश: 400 एमटी, 650 एमटी और 800 एमटी की जरूरत बताई थी। बाकी राज्यों ने भी इसी तरह से अपनी अनुमानित मांग केंद्र के सामने पेश की थी।

राज्यों की ओर से अनुमान से 33% ज्यादा ऑक्सीजन की मांग की गई
देश के फेमस न्यूज एंकर रोहित सरदाना का निधन, कोरोना से थे संक्रमितराज्यों से मिली अनुमानित मांग के आधार पर केंद्र सरकार ने 20, 25 और 30 अप्रैल के लिए क्रमश: 4,880 एमटी,5,619 एमटी और 6,593 एमटी मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई का खाका तैयार किया था। लेकिन, बाद में दिल्ली ने अपनी मांग में 133 फीसदी और उत्तर प्रदेश ने 100 फीसदी का इजाफा कर दिया। मसलन, दिल्ली ने पहले 20 अप्रैल तक 300 एमटी मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत बताई थी, लेकिन कोविड के आंकड़े बढ़ने के बाद 700 एमटी की मांग कर दी। इसी तरह यूपी को पहले 20 अप्रैल तक 400 एमटी की आवश्यकता का अनुमान था, लेकिन फिर इसे संशोधित करके 800 एमटी कर दिया गया। अनुमानों में संशोधन दूसरे राज्यों ने भी किया, जैसे कि पहले राजस्थान ने 20 अप्रैल तक 125 एमटी की जरूरत बताई थी, लेकिन बाद में उसने 147 एमटी की आपूर्ति की मांग की। यह संशोधन तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने भी किया।इसका नतीजा ये हुआ कि कोविड से सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्य में मेडिकल ऑक्सीजन की मांग बाद में 33 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई।

आने वाले दिनों में दिल्ली को चाहिए 1,000 मीट्रिक टन ऑक्सीजन
इसका नतीजा ये हुआ कि केंद्र सरकार के लिए राज्यों के संशोधित अनुमानों के मुताबिक सप्लाई की पूर्ति करना मुश्किल हो गया। मसलन, 20 अप्रैल तक मेडिकल ऑक्सीजन की संशोधित मांग 6,527 एमटी थी, जबकि केंद्र की ओर से आवंटन सिर्फ 4,880 एमटी टन ही हो सकी। एफिडेविट के मुताबिक 18 तारीख के एक खत के अनुसार दिल्ली को 378 एमटी मेडिकल ऑक्सीजन आवंटित की गई, जो कि उसके संशोधित मांग की आधा से थोड़ा ही ज्यादा था। वहीं, उत्तर प्रदेश को 751 मीट्रिक टन का आवंटन हुई यानी उसकी संशोधित मांग की करीब 93 फीसदी पूर्ति हो गई। इसी तरह राजस्थान को 147 एमटी संशोधित मांग के बदले 160 एमटी की आपूर्ति हुई, तेलंगाना को 350 एमटी के बदले 360 एमटी, आंध्र प्रदेश को 400 एमटी की जगह 360 एमटी और उत्तराखंड को 75 एमटी की जगह 83 मीट्रिक टन का आवंटन हुआ। बात दिल्ली की करें तो शुरू में इसने 30 अप्रैल तक 445 मीट्रिक टन की मेडिकल ऑक्सीजन का अनुमान जताया था। जबकि, 26 अप्रैल को केंद्र सरकार ने राज्य के स्वास्थ्य सचिवों को भेजी चिट्ठी में दिल्ली के लिए आवंटन को बढ़ाकर 490 मीट्रिक टन कर दिया था। इस बीच गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में दिल्ली सरकार ने बताया है कि आने वाले दिनों में उसे रोजाना 1,000 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत पड़ेगी।
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