कुंवारे पुरुषों को नहीं था वोटिंग का अधिकार, हिन्दू भी नहीं दे सकते थे वोट, जानिए गोवा के चुनाव का रोचक इतिहास

18वें लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारी पूरे देशभर में चल रही है। इस बार देशभर में 7 फेजों में चुनाव आयोजित किए जायेंगे और परिणाम 4 जून 2024 को घोषित किए जाएंगे। आज से 4 दिन बाद 19 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होगा। गोवा में तीसरे चरण में वोटिंग होगी।

गोवा में लोकसभा सीटों पर एक ही दिन मतदान होना है। आज गोवा में कोई भी व्यस्क भारतीय मतदान कर सकता है लेकिन एक वक्त था जब इस तटीय प्रदेश में हर कोई वोटिंग नहीं कर सकता था। हिन्दुओं को वोटिंग करने के लिए कई शर्तों को पूरा करना पड़ता था। महिलाओं को भी वोटिंग की आजादी नहीं थी। आइये जानते हैं गोवा के चुनाव का रोचक इतिहास।

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गोवा में मतदान की प्रक्रिया पुर्तगाली शासन के दौरान 1821 में शुरू हुई थी। 1961 में गोवा के भारत में शामिल होने से पहले तक गोवा में 'विशेषधिकार प्राप्त' गोवावासी ही मतदान के पात्र माने जाते थे। गोवा करीब 450 साल तक पुर्तगालियों के अधीन रहा था।

भारत में शामिल होने से पहले गोवा में चुनावी प्रक्रिया अलग तरह की थी। संसदीय चुनावों में उम्मीदवारों को एलिगिविस और मतदाताओं को एलिटोरेस कहा जाता था। आजादी से पहले गोवा में मतदान की आयु सीमा 25 साल की होती थी। मतदान करने के लिए व्यक्ति का विवाहित होना अनिवार्य था। महिलाओं को मतदान की अनुमति नहीं थी।

अपनी पुस्तक, द एनकाउंटर विद द बैलट इन कोलोनियल गोवा: ए हिस्टोरिकल एंड एनालिटिकल स्टडी (1821-1961) में, शर्मिला पेस ई मार्टिंस ने गोवा में पुर्तगाली शासन के दौरान गोवा की चुनाव प्रणाली का उल्लेख किया है।

गोवा में मतदान की न्यूनतम उम्र 25 साल थी लेकिन अगर किसी मतदाता ने शिक्षा में उच्च डिग्री प्राप्त कर ली हो तो वह 21 वर्ष का होने पर भी मतदान कर सकता था। न सिर्फ वोटिंग के लिए बल्कि संसद का चुनाव लड़ने के लिए भी उच्च शिक्षा की डिग्री चाहिए होती थी।

गोवा में साल 1911 में हिंदुओं को भी पहली बार मतदान का अधिकार मिल गया। हालांकि इसके बाद काफी हिन्दू मतदान का हिस्सा नहीं बन पाए। क्योंकि मतदान के लिए मतदाता का पुर्तगाली भाषा का ज्ञान होना आवश्यक था। हालांकि इस पुर्तगाली भाषा साक्षरता नियम (सेबर लेर ई एस्क्रेवर) को 1918 में वापस ले लिया गया।

लेकिन 1945 के बाद पुर्तगाली भारत में चुनाव फिर से शुरू होने पर इसे बरकरार रखा गया था। हालाँकि, जोर सामान्य साक्षरता पर था। एक मतदाता को हस्तलिखित आवेदन के माध्यम से अपनी साक्षरता साबित करनी होती थी, जिसकी वास्तविकता को नोटरी द्वारा प्रमाणित किया जाना होता था।

कौन मतदान कर सकता था?

1852 से 1895 तक कुलीन वर्ग के अलावा आम लोगों ने भी गोवा की चुनावी प्रक्रिया में भाग लिया। हालांकि बाद में शर्तों के कारण मतदाताओं की संख्या में गिरावट और बढ़ोत्तरी होती रही। 1860 में गोवा में 6,311 मतदाता थे जो 1865 में घटकर 3,708 रह गए। हालांकि बाद में इसमें इजाफा हुआ।

1878 में 17,469 मतदाता थे जो 1894 में बढ़कर 74,621 हो गए। मतदाताओं की संख्या 1917 में घटकर 14,624 और 1958 में 11,000 हो गई। साल 2024 में 11,66,939 गोवावासी मतदान करेंगे। इसमें 565,628 पुरुष हैं जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 601,300 है। वहीं 11 तृतीय लिंग मतदाता हैं।

महिलाओं के लिए मतदान का अधिकार

1933 के पुर्तगाली संविधान के मुताबिक पहली बार माध्यमिक पाठ्यक्रम या शिक्षा में उच्च डिग्री वाली महिलाओं को चुनाव में मतदान करने की अनुमति मिली थी। हालांकि गोवा में 1961 तक महिलाओं ने मतदान नहीं किया।

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