दो ट्रेनों के निजीकरण पर रेल मंत्री की संसद में सफाई, बोले अभी कुछ तय नहीं

रेलवे के निजीकरण पर मोदी सरकार ने तोड़ी चुप्पी, रेल मंत्री पीयूष गोयल ने दिया ये जवाब

नई दिल्ली। दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस को प्राइवेट सेक्टर द्वारा चलाए जाने और रेलवे का निजीकरण किए जाने की खबरों पर रेल मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में बड़ा बयान दिया है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को लोकसभा में इस मामले पर स्पष्ट करते हुए बताया कि भारतीय रेलवे के निजीकरण का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। लोकसभा में दो ट्रेनों को निजी सेक्टर को सौंपे जाने के सवाल का लिखित तौर पर जवाब देते हुए पीयूष गोयल ने कहा, 'अभी तक निजी सेक्टर को सौंपे जाने के लिए किसी भी विशेष यात्री ट्रेन को चिन्हित नहीं किया गया है। गौरतलब है कि मंगलवार को खबर आई थी कि रेलवे ने नई दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस का संचालन निजी सेक्टर को सौंपने का फैसला लिया है, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी।

'निजीकरण का कोई प्रस्ताव नहीं'

'निजीकरण का कोई प्रस्ताव नहीं'

एक सवाल के जवाब में रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगाड़ी ने कहा कि इस मुद्दे पर अभी विचार-विमर्श जारी हैं और आने वाले दिनों में इसे लेकर ट्रायल किया जाएगा। वहीं, अपने लिखित जवाब में पीयूष गोयल ने कहा कि भारतीय रेलवे के निजीकरण का कोई प्रस्ताव नहीं है। दरअसल लोकसभा में पीयूष गोयल से पूछा गया कि क्या वह जानते हैं कि सितंबर 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को सौंपी गई एक रिपोर्ट में मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर निजीकरण द्वारा प्रस्तुत चुनौतियों को उजागर किया गया था। एक अलग लिखित जवाब में पीयूष गोयल ने कहा कि इस साल 1 अप्रैल को विभिन्न चरणों में 21443 किलोमीटर की कुल 189 नई लाइन परियोजनाएं बनाई गई हैं, जो अभी तक कवर नहीं किए गए क्षेत्रों को रेलवे नेटवर्क के तहत जोड़ेंगी।

दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस को लेकर आई थी खबर

दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस को लेकर आई थी खबर

आपको बता दें कि मंगलवार को मीडिया में खबरें आईं थी कि रेलवे ने अपनी दो गाड़ियों के परिचालन को निजी क्षेत्र को सौंपने का 100 दिनों का एजेंडा तय किया है। सूत्रों के हवाले से खबर थी कि दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस निजी सेक्टर द्वारा संचालित की जाने वाली पहली ट्रेन बनने जा रही है। यह भी खबर थी कि रेलवे बोर्ड ऐसे ही एक और रूट पर प्राइवेट ट्रेन चलाने के लिए तेजी से काम कर रहा है, जो 500 किलोमीटर की दूरी के दायरे में होगा। हालांकि, रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली-लखनऊ पहला रूट है, जिसपर चलने वाली ट्रेनों का संचालन निजी ऑपरेटर्स को सौंपा जा रहा है। रेलवे बोर्ड के अधिकारी के मुताबिक, 'एक महीने के अंदर इस बारे में फैसला ले लिया जाएगा। आईआरसीटीसी फिलहाल इसके मॉडल पर विचार विमर्श कर रही है।'

100 दिनों के एजेंडे का था जिक्र

100 दिनों के एजेंडे का था जिक्र

दिल्ली लखनऊ तेजस एक्सप्रेस ट्रेन की घोषणा 2016 में की गई थी, लेकिन हाल ही में इसे नए टाइम टेबल के साथ लाया गया है। इस रूट की सबसे ज्यादा चर्चित और प्रतिक्षित ट्रेनों में से एक दिल्ली लखनऊ तेजस एक्सप्रेस फिलहाल यूपी के आनंदनगर रेलवे स्टेशन पर खड़ी है। खबर थी कि खुली बोली प्रक्रिया के बाद यह ट्रेन परिचालन के लिए निजी ऑपरेटर्स को सौंप दी जाएगी। आईआरएफसी के मुताबिक, ट्रेनों की निगरानी की जिम्मेदारी आईआरसीटीसी को सौंपी जाएगी, जो इसके लीज चार्ज से लेकर बाकी सभी शुल्कों का भुगतान वित्त विभाग को करेगी। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'फिलहाल ये दोनों ट्रेनें प्रयोग के आधार पर सौंपी जाएंगी और हमें उम्मीद है कि अगले 100 दिनों के भीतर हम इनमें से कम से कम एक ट्रेन को चला पाने में सक्षम होंगे।'

दिल्ली-लखनऊ रूट पर एक भी राजधानी ट्रेन नहीं

दिल्ली-लखनऊ रूट पर एक भी राजधानी ट्रेन नहीं

गौरतलब है कि फिलहाल दिल्ली-लखनऊ रूट पर 53 ट्रेनों का संचालन हो रहा है, लेकिन इस रूट पर एक भी राजधानी ट्रेन नहीं है। स्वर्ण शताब्दी इस रूट की सबसे डिमांडिग ट्रेन है, दिल्ली से लखनऊ पहुंचने में करीब 6.30 घंटे लेती है। सूत्रों के हवाले से खबर आई थी कि आईआरसीटीसी को शुरुआत में संचालन के लिए केवल दो ट्रेनें सौंपी जाएंगी। खबर के मुताबिक आईआरसीटीसी से कहा गया है कि वो इसके लिए 10 जुलाई तक प्रपोजल रिपोर्ट तैयार करे और बीते 4 जुलाई को हुई आईआरसीटीसी के अधिकारियों, बोर्ड मेंबर व ट्रैफिक अधिकारियों के बीच हुई मीटिंग के बाद इसे रेलवे बोर्ड के पास जमा कराए। 100 दिवसीय योजना में रेलवे बोर्ड ने प्रस्ताव दिया था कि ऑपरेटरों को ऐसी दो ट्रेनों की पेशकश की जाए, जो महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ने वाली ट्रेनों को चलाने के लिए बोली प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए तैयार हों।

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