गैस और पेट्रोलियम को बायप्रोडेक्ट के रूप में किसान के खेतों में विकसित करना चाहिए: नितिन गडकरी
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर: सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित 'इंटरनेशनल सोया कॉन्क्लेव' में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि मैं मानता हूं कि गैस और पेट्रोलियम का आयात करने की बजाए हम बायप्रोडेक्ट के रूप में किसान के खेतों में इसे विकसित करें। उन्होंने कहा कि सोयाबीन तेल को पामोलीन और बाकी तेलों के साथ मिलाते हैं और नीचे छोटे अक्षरों में लिखते हैं, जो दिखता भी नहीं है। मिक्सिंग करके बेचने के खिलाफ आवाज उठानी होगी कि आपको मिक्सिंग करनी है तो करो, लेकिन बोल्ड टाइप में लिखो कि इस सोयाबीन तेल में 40% पामोलीन मिला है।

इससे पहले एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में बोलते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि पेट्रोल-डीजल के आयात को कम करना है और प्रदूषण कम करना है। उन्होंने कहा, 'हम लोग बायोफ्यूल, इथेनॉल, मेथेनॉल, इलेक्ट्रिक गाड़ियां, बायोडीजल, सीएनजी और अगर मजबूरी है तो एलएनजी और एलपीजी का प्रयोग करेंगे, लेकिन पेट्रोल-डीजल की मोनोपॉली यानी कि दादागीरी नहीं चलने देंगे।' उन्होंने कहा कि दिल्ली में कितना प्रदूषण है। हम लगातार डॉक्टरों के पास जाते हैं। 50 प्रतिशत बीमारी तो वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण की वजह से ही हैं।
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'भारत, ग्रीन हाइड्रोजन पूरे विश्व में एक्सपोर्ट करने वाली सबसे बड़ी ताकत होगी'
गडकरी ने कहा कि इन्हीं कारणों से मेरा स्पष्ट मत है कि पेट्रोल-डीजल के ऊपर किसी देश की दादागीरी नहीं चलेगी। वैकल्पिक व्यवस्था बनेगी। ग्रीन हाइड्रोजन, भविष्य का ईंधन है। उन्होंने कहा कि भारत ग्रीन हाइड्रोजन पूरे विश्व में एक्सपोर्ट करने वाली सबसे बड़ी ताकत होगी। गडकरी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्रीन हाइड्रोजन के लिए नई दिशा दी है। हमलोग वर्ल्ड लीडर होंगे। जैसे क्रूड ऑयल के मामले में ये लोग अपने टर्म डिक्टेट कर रहे हैं, वैसे हिंदुस्तान ग्रीन हाइड्रोजन के मामले में अपने टर्म डिक्टेट करेगा।












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