देश की जनता को उनके वादों पर भरोसा करना चाहिए? कांग्रेस के घोषणापत्र पर वित्त मंत्री ने दिया ये तर्क

आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियां जोरशोर से चुनाव प्रचार कर रही हैं। इस बीच कांग्रेस ने भी अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस के घोषणा पत्र पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के घोषणा पत्र पर मैं सिर्फ कर्नाटक का उदाहरण लूंगी। पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने जनता से बड़े वादे किए थे।

वित्त मंत्री ने कहा कि उन घोषणा पत्रों ने कांग्रेस को जिताया, लेकिन उन वादों को पूरा करने के लिए आपको बजट की जरूरत है। डीके शिवकुमार ने खुद कहा था कि उनके पास विकास कार्यों के लिए धन नहीं है, जिसके बाद बहुत बड़ा वित्तीय बोझ पड़ा। अगर एक राज्य में कांग्रेस की सरकार पर इतना बड़ा बोझ है, तो क्या देश की जनता को उनके वादों पर भरोसा करना चाहिए?

वित्त मंत्री ने कहा कि सबसे पहले मैं चाहती हूं कि कर्नाटक सरकार बताएं कि मई 2023 में कुल 20 हजार करोड़ रुपये की चार परियोजनाएं क्यों रोक दी गईं? 'जल जीवन मिशन' जो हर घर में पीने का पानी पहुंचा रहा है, क्यों बंद कर दिया गया है? प्रोत्साहित नहीं किया जा रहा है?

वित्त मंत्री ने कहा कि यही कारण है कि मैं उस टिप्पणी से बहुत प्रभावित हुआ जो मुझे लगता है कि उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने की है। पानी की कमी और बाकी सब चीजों के बावजूद, वह सड़कों के निर्माण के बजाय सिंचाई परियोजनाओं पर अधिक ध्यान केंद्रित करेंगे।

क्या खास है कांग्रेस के घोषणा पत्र में

कांग्रेस ने कहा है कि उनका घोषणा पत्र वर्क, वेल्थ और वेलफेयर पर आधारित है। वर्क से मतलब रोजगार, वेल्थ मतलब आमदनी और वेलफेयर मतलब, योजनाओं के फायदे दिलाना। इसके साथ ही उन्होंने वन नेशन वन इलेक्शन का विरोध किया है।

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