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जब केंद्रीय बजट हो गया था लीक, जानिए पूरा किस्‍सा और इसके बाद क्‍या बदले नियम?

Union Budget: हर साल की तरह साल 2026 का यूनियन बजट भी 1 फरवरी को पेश किया जाएगा। भारत का आम बजट सिर्फ एक सरकारी डॉक्यूमेंट नहीं होता हैं, ये देश की इकोनॉमिक डायरेक्शन तय करने वाला ब्लूप्रिंट होता है। इसमें टैक्स, सरकारी स्कीम्स और इकोनॉमिक पॉलिसीज़ की सेंसिटिव इंफॉर्मेशन होती है। अगर ये इंफॉर्मेशन संसद में बजट में पेश होने से पहले लीक हो जाए, तो इससे बड़ी उधल-पुथल मच सकती है।

बजट की गोपनीयता क्यों होती है इतनी जरूरी?

इसलिए बजट तैयार करना हमेशा टॉप सीक्रेट रहता है। इसका सिंपल रीजन ये है कि अगर टैक्स, सब्सिडी या नई स्कीम्स की इंफॉर्मेशन टाइम से पहले बाहर चली जाए, तो लोग और कंपनियां अपने प्लान बदल सकते हैं, शेयर मार्केट में बवंडर आ सकता है। इससे देश की इकोनॉमी को नुकसान हो सकता है। इसलिए बजट से पहले गवर्नमेंट इसकी एक्स्ट्रा सिक्योरिटी करती है।

Union Budget

आज हम आपसे एक ऐसा रोचक किस्सा शेयर करने वाले हैं, जब पूरा बजट टाइम से पहले ही लीक हो गया था। हां, वही बजट, जिसे पेश होने से पहले टॉप सीक्रेट रखा जाता है, अचानक सबके हाथ लग गया। सोचिए, सरकार और अफ़िसियल्स का क्‍या हाल हुआ होगा?

साल 1950 जब बजट हो गया था लीक

आजादी के बाद भारत की हिस्ट्री में ऐसा भी मौका आया, जब बजट पेश होने से पहले ही लीक हो गया था। 1950 में तब पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्‍व वाली कांग्रेस सरकार थी और फाइनेंस मिनिस्टर जॉन मथाई थे। यूनियन बजट के सेंसिटिव गवर्नमेंट डॉक्यूमेंट्स टाइम से पहले लीक हो गए। ये लीक राष्ट्रपति भवन प्रेस से हुआ, जिसने पूरे देश को शॉक कर दिया।

गवर्नमेंट की साख पर उठे सवाल

इस सीरियस लीक के बाद गवर्नमेंट की इमेज और बजट प्रोसेस की रियलायबिलिटी पर सवाल उठने लगे। मामला इतना सीरियस था कि फाइनेंस मिनिस्टर जॉन मथाई ने एथिकल रिस्पॉन्सिबिलिटी लेते हुए रिज़ाइन दे दिया। ये इवेंट सिस्टम के लिए एक वेकअप कॉल था।

1950 का बजट लीक था टर्निंग पॉइंट

1950 का बजट लीक इंडिया के फाइनेंशियल हिस्ट्री में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस इवेंट ने साफ कर दिया कि बजट डॉक्यूमेंट्स की सीक्रेसी सिर्फ फॉर्मैलिटी नहीं, बल्कि नेशनल इंटरेस्ट से जुड़ा सीरियस मुद्दा है।
इसी वजह से आज भी बजट सिक्योरिटी सिस्टम इतना स्ट्रिक्ट है और इसका इम्पैक्ट हर साल देखा जा सकता है।

बजट सिक्योरिटी में किए गए बड़े बदलाव

1950 की इस इवेंट के बाद गवर्नमेंट ने बजट प्रोसेस को कंप्लीटली री-डिज़ाइन किया। बजट प्रिंट करने के लिए अब नार्थ ब्लॉक जैसे हाईली सिक्योर लोकेशंस का चुनाव किया गया। साथ ही सिक्योरिटी रूल्स और स्ट्रिक्ट कर दिए गए, ताकि फ्यूचर में कोई भी लीक न हो।

Lock-in period: बजट सिक्योरिटी का सबसे स्ट्रिक्ट नियम

बजट लीक की किसी भी संभावना को खत्म करने के लिए गवर्नमेंट ने 'लॉक-इन पीरियड' का सिस्टम इम्प्लीमेंट किया। इसके अंडर, बजट प्रिंट और प्रिपरेशन में इनवॉल्व्ड अफ़िशियल्स पूरी तरह एक्सटर्नल वर्ल्ड से कट ऑफ हो जाते हैं। इस दौरान उन्हें फोन, इंटरनेट या किसी से कॉन्टैक्ट करने की परमिशन नहीं होती।

North Block: बजट सिक्योरिटी का सेंटर

लॉक-इन पीरियड में बजट प्रिपेयर और प्रिंट करने वाले अफ़िशियल्स North Block के अंदर ही रहते हैं। ये लोग तब तक बाहर नहीं निकलते, जब तक फाइनेंस मिनिस्टर पार्लियामेंट में बजट प्रेजेंट नहीं कर देते। इसे फाइनेंस मिनिस्टर की जिम्‍मेदारी का मोस्ट कॉन्फिडेंशियल फेज़ माना जाता है।

Halwa Ceremony: बजट की स्टार्ट

हर साल बजट की कॉन्फिडेंशियल प्रोसेस की फॉर्मल स्टार्ट ट्रैडिशनल 'हलवा सेरेमनी' से होती है। इस ऑकेज़न पर फाइनेंस मिनिस्टर के अफ़िशियल्स को हलवा खिलाया जाता है। ये सिंबल है कि बजट रेडी है और अब लॉक-इन पीरियड स्टार्ट हो गया है।

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