पीपीएफ एक्ट को खत्म करेगी सरकार, जानिए आप पर क्या होगा इसका असर

नई दिल्ली। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने वित्तीय पेश किए गए बजट में प्रोविडेंट फंड अधिनियम (पीपीएफ) को खत्म करने का प्रस्ताव किया है। सरकार के इस फैसले को मध्यम वर्ग के लिए बड़ा झटका कहा जा रहा है। वित्त विधेयक 2018 में सरकार बचत प्रमाणपत्र अधियनियम-1959 और पीपीएफ अधिनियम 1968 को खत्म किए जाने का प्रस्ताव है। इन अधिनियमों से जुड़ी बचत योजनाओं को गवर्नमेंट सेविंग्स बैंक एक्ट-1873 में शामिल किया जाएगा। इसके लिए इस एक्ट में नए प्रावधानों को शामिल किया जाएगा। सरकार के इस नए प्रस्ताव का आपके पीएफ अकाउंट पर क्या असर होगा ये हम आपको बता रहे हैं।

 PPF अधिनियम 1968 को खत्म किए जाने का प्रस्ताव

PPF अधिनियम 1968 को खत्म किए जाने का प्रस्ताव

सरकार ने बजट में पीपीएफ एक्ट खत्म करने का एलान कर दिया है लेकिन पीपीएफ पर मिल रही सुविधाएं आगे भी जारी रहेंगी। साथ ही कर्ज या दूसरी देनदारी की वसूली के लिए बैंक भी पीपीएफ की रकम जब्त नहीं कर सकेंगे।

पीपीएफ के तहत मिलने वाली सभी टैक्स छूट जारी रहेगी। आईटी एक्ट के सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट जारी रहेगी और आईटी एक्ट के सेक्शन 10(15) के तहत टैक्स छूट जारी रहेगी।

कोर्ट के आदेश के जरिए पीपीएफ का पैसा जब्त नहीं होगा। कर्ज या दूसरी देनदारी के लिए पीपीएफ का पैसा जब्त नहीं होगा। अभी रकम की जब्ती से पीपीएफ एक्ट के तहत छूट मिलती थी। सरकारी बचत बैंक एक्ट के तहत आने के बावजूद छूट जारी रहेगी।

 पीपीएफ एक्ट खत्म होने से इन अकाउंट पर असर

पीपीएफ एक्ट खत्म होने से इन अकाउंट पर असर

इस एक्ट के खत्म हो जाने के बाद नये इन्वेस्टमेंट लोगों को ज्यादा ब्याज का फायदा नहीं मिलेगा। सभी नए इन्वेस्टमेंट सेविंग बैंक एक्ट 1873 के अनुसार होंगे। हालांकि उन लोगों को ज्यादा ब्याज का फायदा मिलेगा, जिन्होंने फाइनेंस एक्ट 2018 के लागू होने से पहले का इन्वेस्टमेंट कर रखा है।

पीपीएफ एक्ट के खत्म होने से पोस्ट ऑफिस सेविंग बैंक अकाउंट, नेशनल सेविंग मंथली इनकम, नेशनल सेविंग आरडी अकाउंट, सुकन्या समृद्धि अकाउंट, नेशनल सेविंग टाइम डिपॉजिट (1,2,3 और 5 साल), सीनियर सिटीजंस सेविंग स्कीम, एनएससी, पीपीएफ और किसान विकास पत्र अकाउंट्स पर सबसे ज्यादा असर होगा।

सोशल सिक्योरिटी केनाम पर चल रही योजनाओं पर पड़ेगा असर

सोशल सिक्योरिटी केनाम पर चल रही योजनाओं पर पड़ेगा असर

इस नए कानून के आ जाने के बाद देश भर में लागू सोशल सिक्युरिटी के नाम पर चल रही याजनाओं के तहत मिलने वाला ब्याज, बैंकों में मिलने वाले ब्याज के समान हो जाएगा। अभी पीपीएफ और एनएससी पर 7.6, केवीपी पर 7.3 फीसदी, सुकन्या समृद्धि खाते पर 8.1 फीसदी, एक से पांच साल तक के टर्म डिपोजिट पर ब्याज दर 6.6 से 7.4 फीसदी और पांच वर्षीय रिकरिंग डिपोजिट पर 6.9 फीसदी ब्याज दर है। अभी सरकारी बैंकों में सेविंग अकाउंट पर 3.50 से 4.50 फीसदी के बीच ब्याज मिलता है। वहीं प्राइवेट बैंकों में यह 6 फीसदी के करीब है।

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