उमरान मलिक: जम्मू-कश्मीर के क्रिकेटर जो रातोंरात हीरो बन गए हैं

जम्मू शहर के निवासी और फल और सब्ज़ी बेचने वाले अब्दुल रशीद के सबसे छोटे बेटे उमरान मलिक भारतीय क्रिकेट के नए सितारे बन कर उभरे हैं.

रविवार को सनराइज़र्स हैदराबाद के लिए दुबई में अपने करियर का तीसरा मैच खेलते हुए उमरान ने इस सीज़न की सबसे तेज़ गेंदबाज़ी करते हुए बल्लेबाज़ों के छक्के छुड़ा​ दिए.

कोलकाता नाइट राइडर्स के ख़िलाफ़ अपने डेब्यू मैच में उमरान मलिक ने 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से गेंद फेंकी. उमरान ने अपनी तेज़ रफ़्तार और शानदार गेंदबाज़ी से अपना न केवल सिक्का जमाया बल्कि आने वाले दिनों में भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की करने के लिए मज़बूत दावेदारी भी पेश कर दी है.

Umran Malik gets emotional after message from family

उमरान के बेहतरीन प्रदर्शन के बाद क्रिकेट के वरिष्ठ खिलाड़ी, कॉमेंटेटर, क्रिकेट जानकार और क्रिकेट प्रेमी - सभी उनकी प्रशंसा कर रहे हैं.

लंबे समय से जम्मू शहर में क्लब क्रिकेट खेल रहे उमरान ने इसी साल जम्मू और कश्मीर टीम के साथ अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की है. हैदराबाद के ख़िलाफ़ मैच खेलने से पहले उन्होंने सिर्फ़ दो ही मैच खेले हैं. ये दोनों अलग-अलग फ़ॉर्मेट के इनके डेब्यू मैच थे.

सबसे पहले इस साल जनवरी में सैयद मुश्ताक़ अली ट्रॉफ़ी में अपने राज्य के लिए इन्होंने अपना पहला टी-20 मैच खेला. इस मैच में उमरान ने चार ओवर में 24 रन देकर 3 विकेट झटके थे. उसके बाद फ़रवरी में विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी के दौरान इन्होंने अपने प्रथम श्रेणी क्रिकेट करियर की शुरुआत की.

हैदराबाद के ख़िलाफ़ रविवार को खेले गए मैच में उमरान ने चार ओवर में 27 रन दिए. इस मैच में, हालांकि उन्हें एक भी विकेट नहीं मिल पाया, लेकिन इन्होंने अपनी गति से सबका दिल मोह लिया.

उमरान कैसे हुए टीम में शामिल

जम्मू में उमरान मालिक के परिवार के एक सदस्य ने बीबीसी हिंदी को बताया कि उमरान की क़िस्मत का सितारा तब चमका, जब हैदराबाद की टीम मैनेजमेंट एक खिलाड़ी के बीमार होने पर उनका रिप्लेसमेंट तलाश रही थी.

उस समय उमरान डेविड वॉर्नर को नेट में बैटिंग की प्रैक्टिस करवा रहे थे. उमरान की सटीक गेंदबाज़ी और तेज़ रफ़्तार के चलते वॉर्नर को उनकी गेंद को खेलने में कठिनाई हो रही थी. नेट प्रैक्टिस पर नज़र रख रही टीम मैनेजमेंट के एक सदस्य ने, तब उमरान को मौक़ा देने का प्रस्ताव दिया.

इस तरह हैदराबाद की टीम मैनेजमेंट ने टी. नटराजन की जगह उमरान मलिक को टीम में शामिल करने का फ़ैसला कर लिया. उमरान मलिक सनराइज़र्स हैदराबाद के साथ नेट बॉलर के रूप में जुड़े हुए थे.

इरफ़ान पठान ने तराशा है उमरान को

कभी क्रिकेट खिलाड़ी रहे रणजीत कालरा, जम्मू और कश्मीर क्रिकेट संघ के प्रति​निधि की हैसियत से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की 1988-89 की आम बैठक में हिस्सा ले चुके हैं. उन्होंने बीबीसी हिंदी को बताया कि उमरान मलिक को तराशने में जम्मू और कश्मीर टीम के कोच रहे पूर्व गेंदबाज़ इरफ़ान पठान का बड़ा हाथ है.

कालरा कहते हैं कि इरफ़ान पठान ने परवेज़ रसूल के साथ मिलकर उमरान के बॉलिंग एक्शन से लेकर उनके टेंपरामेंट को सुधारकर उन्हें एक अच्छा खिलाड़ी बनाया है.

पठान के संपर्क में आने से पहले उमरान के कोच रणधीर सिंह मन्हास ने उन पर बहुत मेहनत की थी. 15 साल की उम्र में उमरान ट्रेनिंग के लिए जब जम्मू स्टेडियम पहुंचे थे, तो उनकी क्षमता को भांपते हुए वहां के क्रिकेट कोच रणधीर सिंह मन्हास ने उन पर काफ़ी काम किया.

रणजीत कालरा को पूरी उम्मीद है कि बीसीसीआई की टेक्निकल टीम और चयनकर्ता आने वाले समय में उमरान को भारतीय टीम में शामिल होने का कम से कम एक मौक़ा ज़रूर देंगे. साथ ही उनकी ट्रेनिंग पर और ध्यान दिया जाएगा ताकि अच्छे खिलाड़ी के तौर पर वो देश की सेवा कर सकें.

उमरान मलिक के घर ख़ुशी का माहौल

जम्मू में मलिक मार्केट के पास के मुहल्ले में रहने वाले अब्दुल रशीद मलिक के घर इस समय मुबारक देने वालों का तांता लगा हुआ है.

उनके रिश्तेदार और आस-पड़ोस के लोग उमरान की गेंदबाज़ी देखकर बहुत खुश हैं. सब मिलकर बस यही दुआ कर रहे हैं कि उमरान मलिक को आने वाले दिनों में भारतीय टीम में खेलने का मौक़ा मिले और वो देश का नाम रोशन करें.

बीबीसी हिंदी से बात करते हुए उनके पिता अब्दुल रशीद मलिक ने कहा, ''उमरान बचपन से ही क्रिकेट खेला करता था. उस समय उन्हें भूख-प्यास की चिंता नहीं रहती थी. वो स्कूल से घर आते ही अपना बैट-बॉल लेकर खेलने निकल जाता था. जब हम लोग उसे मना करते थे तो कहता था कि मैं कोई ग़लत काम नहीं कर रहा, सिर्फ़ क्रिकेट ही तो खेल रहा हूं.''

उनके पिता कहते हैं कि समय के साथ-साथ उमरान का क्रिकेट के प्रति लगाव बढ़ता गया और रात-दिन वो सिर्फ़ क्रिकेट में ही डूबा रहने लगा.

अब्दुल रशीद को उम्मीद है कि आने वालों दिनों में भी उमरान पूरी लगन से मेहनत करेगा और टीम इंडिया में अपनी जगह बनाने के लिए अच्छी गेंदबाज़ी करेगा. वो चाहते हैं कि उनका बेटा देश के लिए खेले और भारत का नाम रोशन करे.

सबका एक अरमान-जल्द भारतीय टीम में हो उमरान

उमरान की मां सीमा मलिक भी रविवार से अपने रिश्तेदारों से मिलकर अपनी ख़ुशियां बांट रही हैं.

बीबीसी हिंदी से बातचीत में उन्होंने बताया, ''मैच से पहले मुझे बड़ी टेंशन हो रही थी, लेकिन जब कॉमेंटेटर उमरान की गेंदबाज़ी की तारीफ़ करने लगे तो उसे सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा. मैं बहुत ख़ुश हूं कि मेरे बेटे ने अच्छी गेंदबाज़ी करके अपना और अपने देश का नाम रोशन किया है.''

उमरान के बचपन को याद करते हुए उनकी मां ने कहा, ''बचपन में उमरान सारा दिन बैट लेकर कहता था कि कोई बॉलिंग कर दो. कभी-कभी खाना भी नहीं खाने देता था. स्कूल से आते ही खेलने चला जाता था और देर शाम को घर आता था.''

सीमा मलिक कहती हैं कि उनके बेटे को खाने में मीट-मुर्गा बहुत पसंद है और वो सब्ज़ियां कम ही पसंद करता है.

वहीं शहीदी चौक के पास उनके पिता के साथ फल और सब्ज़ी की दुकान चलाने वाले उनके चाचा नज़ीर मलिक ने बीबीसी हिंदी को बताया, ''उमरान बचपन से ही लगातार मेहनत कर रहा था, जो अब जाकर सफल हुई है.''

उन्होंने कहा कि सब उमरान के जम्मू लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं, ताकि धूम-धाम से उनका स्वागत हो और उनकी सफलता का जश्न मनाया जाए.

बीसीसीआई यानी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की ओर से जम्मू और कश्मीर क्रिकेट संघ का कामकाज देखने के लिए तीन सदस्यों की एक समिति बनाई गई है.

उस समिति के एक सदस्य और पूर्व क्रिकेटर मिथुन मन्हास ने बीबीसी हिंदी को बताया, ''जम्मू और कश्मीर के युवाओं में क्रिकेट के प्रति लगाव को देखते हुए समय-समय पर राज्य में कैंप लगाए जा रहे हैं ताकि वहां के होनहार खिलाड़ियों का चयन हो सके और उन्हें निखरने के लिए बेहतर सुविधाएँ दी जा सकें.''

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