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उल्फा ने ली गुवाहाटी ब्लास्ट की ज़िम्मेदारी, दावे पर सवाल

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    गुवाहाटी में बम धमाके
    RAJIV SHARMA/BBC
    गुवाहाटी में बम धमाके

    असम के प्रतिबंधित सगंठन उल्फा आई के एक धड़े ने शनिवार को गुवाहाटी में हुए बम धमाके की ज़िम्मेदारी ली है और कहा कि ये 'धमाका राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) का विरोध कर रहे लोगों और बांग्लादेशी हिंदुओं को बसाने की कोशिश के ख़िलाफ़' है.

    राज्य में साल 2016 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के गठन के बाद से गुवाहाटी में ये पहला धमाका है, जिसकी ज़िम्मेदारी उल्फा ने ली है.

    हालांकि, पुलिस ने प्रतिबंधित संगठन के दावों पर सवाल उठाए हैं.

    दोपहर करीब 12 बजे ब्रह्मपुत्र नदी के करीब शुक्रेश्वर घाट पर हुए धमाके में चार लोग घायल हुए. पुलिस के मुताबिक इनमें से किसी को गंभीर चोट नहीं आई है.

    गुवाहाटी में बम धमाके
    RAJIV SHARMA/BBC
    गुवाहाटी में बम धमाके

    धमाके के कुछ देर बाद प्रतिबंधित संगठन उल्फा-आई के सरकार से बातचीत का विरोध करने वाले धड़े के प्रमुख परेश बरुआ ने स्थानीय टीवी चैनलों को फ़ोन किया और इस धमाके की जिम्मेदारी ली.

    रिपोर्टों के मुताबिक परेश बरुआ ने कहा, "हमने ये धमाका इसलिए किया है क्योंकि हम बांग्लादेशी हिंदुओं को असम में बसाने की कोशिश के ख़िलाफ है. जो लोग राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का विरोध कर रहे हैं, उन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. ये धमाका इसी कोशिश के विरोध में है. उल्फा आगे भी अपना सशस्त्र संघर्ष जारी रखेगा."

    हालांकि पुलिस ने उल्फा की ओर से किए गए दावे पर सवाल उठाए हैं. पुलिस के मुताबिक हमले में घायल हुए लोगों का कहना है कि धमाके के दौरान उन्हें पत्थर छिटककर लगे और इसी वजह से वो घायल हुए.

    गुवाहाटी पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर दिगंता बोरा ने मीडिया को बताया, "धमाके की जांच की जा रही है. धमाके में जिस तरह का विस्फोटक इस्तेमाल हुआ है उससे ये नहीं लगता कि ये धमाका किसी अलगाववादी संगठन ने किया हो."

    उधर, धमाके के बाद राज्य सरकार ने उल्फा की निंदा की है. धमाके के बाद मौके पर पहुंचे असम के क़ानून मंत्री सिद्धार्थ भट्टाचार्य ने कहा है, "अगर उल्फा इस घटना में शामिल है तो ये उनकी शर्मनाक कार्रवाई है."

    भावनाओं को हथियार बनाने की कोशिश

    असम की राजनीति और उल्फा की गतिविधियों पर नज़र रखने वाले विश्लेषकों का दावा है कि उल्फा का बरुआ गुट लगातार हाशिए पर है और प्रासंगिक बने रहने के लिए असम के लोगों की भावनाओं को हथियार बनाना चाहता है.

    गुवाहाटी में बम धमाके
    DILIP SHARMA/BBC
    गुवाहाटी में बम धमाके

    वरिष्ठ पत्रकार बैकुंठ गोस्वामी कहते हैं, "बरुआ ख़ुद को अहमियत न मिलने को लेकर परेशान हैं. अलगाववादी नेता के तौर पर वो लंबे वक्त से शांत बैठे हैं. उनके निर्देश पर हुई हिंसक घटनाओं में निर्दोष लोगों की जानें गई हैं. उसके बाद से प्रदेश में उल्फा का समर्थन ख़त्म सा हो गया है."

    गोस्वामी ये दावा भी करते हैं कि बरुआ और उनके संगठन का असर सिर्फ़ उनके गृहज़िले तिनसुकिया के एक दो गांवों तक है.

    उन्होंने कहा, "असम के लोग उल्फा या परेश बरुआ के प्रति किसी तरह का समर्थन नहीं करते. इसलिए असमिया लोगों की भावनाओं से जुड़े मुद्दों में सहानुभूति बटोरने के लिए वो ऐसी छोटी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं. या ख़ुद के शामिल होने का दावा कर रहे हैं."

    उल्फा का असर कम होने की वजह से इस संगठन से जुड़े अलगाववादी जबरन धन वसूली नहीं कर पा रहे हैं.

    सवाल राज्य में पुलिस की चौकसी पर भी उठ रहे हैं. पुलिस ने तीन दिन पहले ही ऐसी ही किसी घटना को लेकर अलर्ट जारी किया था. कड़ी चौकसी के बाद भी शनिवार के धमाके को रोका नहीं जा सका.

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    BBC Hindi
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    English summary
    ULFA question Liu Guwahati blast responsibility claim

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