अब ज्यादा से ज्यादा महिलाएं कर सकेंगी पीएचडी

नई दिल्ली। देश के लगभग सभी विश्‍वविद्यालयों में जब महिलाएं रिसर्च में कदम रखती हैं, तो तमाम बाधायें आती हैं। पहला तो पंजीकरण में दिक्कत, उसके बाद जब शोध के बीच अगर शादी हो गई, तो दिक्कत, अगर गर्भवती हुई, तो दिक्कत। इन सभी समस्याओं का समाधान अब यूजीसी यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन ने कर दिया है।

देश की हर महिला को जानना चाहिए ये कानून

UGC's new rules to promote women for research work

महिलाओं को शोध के क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिये नये नियम बनाये हैं। ज्यादा से ज्यादा महिलाएं पीएचडी या एमफिल में दाखिला ले सकें और सफलतापूर्वक अपना शोध पूरा कर सकें, इसके लिये यूजीसी ने निम्न नियम बनाये हैं-

  • महिलाओं को पीएचडी पूरी करने के लिये दी गई अवधि में 2 साल और एमफिल में 1 साल की छूट दी जायेगी।
  • शादी होने पर अगर ससुराल किसी अन्‍य शहर में है, तो महिलाशोधार्थी अपना रिसर्च अन्‍य विश्‍वविद्यालय में स्‍थानांतरित करवा सकती है।
  • अगर महिला गर्भवती होती है, तो मैटरनिटी लीव के तौर पर उसे 240 दिन की छूट दी जायेगी।
  • यूजीसी ने विशेषकर महिलाओं के लिये सात विश्‍वविद्यालयों में शोध की व्‍यवस्‍था स्‍थापित करने के निर्देश दिये हैं।
  • यूजीसी ने पोस्‍ट-डॉक्‍टरल फेलोशिप प्रोग्राम विशेषकर महिलाओं के लिये चलाया है। जिसमें वो एडवांस रिसर्च कर सकती हैं।
  • फेलोशिप प्राप्त करने वाली महिलाओं को पहले दो वर्ष तक 38,800 रुपए प्रति माह और फिर अगले 3 वर्ष तक 46,500 रुपए का भत्‍ता दिया जायेगा।
  • इसके अंतर्गत हर साल 100 महिलाएं शोध कर सकेंगी।
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