महाराष्ट्र में 'शिवसैनिक' कौन ? CM शिंदे और ठाकरे गुट के अपने-अपने दावे, सुप्रीम कोर्ट में 20 जुलाई को सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक याचिकाओं पर सुनवाई 20 जुलाई को हो सकती है।

नई दिल्ली, 17 जुलाई : महाराष्ट्र की सियासी उठापटक थम चुकी है।अब सुप्रीम कोर्ट में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कैंप और पूर्व सीएम सह शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे (Eknath Shinde Uddhav Thackeray) की याचिका पर सुनवाई करेगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक CM शिंदे और उद्धव ठाकरे की याचिकाओं पर देश की सबसे बड़ी अदालत 20 जुलाई को सुनवाई कर सकती है।

eknath shinde uddhav thackeray

CJI रमना के साथ इन जजों की बेंच में सुनवाई

महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट पर हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले धड़े दोनों ने विधायकों की अयोग्यता को लेकर शीर्ष अदालत का रुख किया है। इन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 20 जुलाई को सुनवाई होने की संभावना है। CJI एनवी रमना की अगुवाई वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ मामले की सुनवाई करेगी। सीजेआई के अलावा, जस्टिस कृष्णा मुरारी और हेमा कोहली में वह बेंच शामिल हो सकती हैं।

53 विधायकों को शो कॉज नोटिस

गौरतलब है कि महाराष्ट्र की राजनीतिक हलचल के बीच CM शिंदे और उद्धव ठाकरे के खेमे से जुड़े नेताओं ने अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। पिछले सोमवार को, सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष को शिवसेना विधायकों को अयोग्य घोषित करने पर कोई निर्णय नहीं लेने के लिए कहा था। विधायक सचिव राजेंद्र भागवत ने 53 विधायकों को व्हिप का पालन नहीं करने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

शिंदे गुट के 40 MLAs को नोटिस

अयोग्यता के मामले में 40 नोटिस शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को भेजे गए, जबकि अन्य 13 ठाकरे के वफादार बताए जाते हैं। दोनों समूहों ने प्रतिद्वंद्वी गुट के विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है।

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन की मांग

एक अन्य दिलचस्प घटनाक्रम में रविवार को शिवसेना सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने की याचिका पर अपना फैसला नहीं दे देती, महाराष्ट्र में प्रेसिडेंट रूल लगाया जाना चाहिए।

दो सप्ताह से दो मंत्रियों की कैबिनेट क्यों ?

संजय राउत ने ट्विटर पर लिखा, संविधान के अनुच्छेद 164 (1-ए) में कहा गया है कि राज्य के सीएम सहित मंत्रियों की संख्या 12 से कम नहीं होनी चाहिए। पिछले 2 सप्ताह से, सिर्फ 2 मंत्रियों वाली कैबिनेट ऐसे फैसले ले रही है जो संवैधानिक रूप से मान्य नहीं हैं। उन्होंने सवाल किया, माननीय राज्यपाल महोदय, क्या चल रहा है?

कैरेबियन मुल्क बारबाडोस से महाराष्ट्र की तुलना !

नए मंत्रिमंडल के गठन में देरी को लेकर नवगठित एकनाथ शिंदे सरकार पर कटाक्ष करते हुए, शिवसेना सांसद राउतने कहा, बारबाडोस की आबादी 2.5 लाख है और फिर भी 27 मंत्रियों की कैबिनेट है। महाराष्ट्र की 12 करोड़ की आबादी में एक कैबिनेट है। 2 सदस्य मनमाने निर्णय ले रहे हैं। संविधान का सम्मान कहां है ?

महा'सियासत' के कैरेक्टर्स !

बता दें कि महाराष्ट्र की कैबिनेट विस्तार से जुड़ी खबरों में कहा गया है कि महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (MNS) चीफ के बेटे को मंत्री पद ऑफर किया गया है। इसे पहले महाराष्ट्र में खुद को बालासाहेब ठाकरे का असली अनुयायी बताते हुए एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका था। ठाकरे ने कहा था कई विधायक अभी भी उनके समर्थन में हैं, लेकिन बाद में भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का समर्थन मिलने से उत्साहित शिंदे ने सरकार बनाने का दावा पेश किया था। एक नाटकीय घटनाक्रम में पहले सरकार में शामिल होने से इनकार करने वाले देवेंद्र फडणवीस बाद में डिप्टी सीएम बने।

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