क्या यूएई का बैन कतर पाएगा इंडियन मुजाहिद्दीन के पर
बेंगलुरु। इंडियन मुजाहिद्दीन (आईएम) और लश्कर-ए-तैयबा, दो आतंकी संगठन और दोनों पिछले कई वर्षों से भारत को अपनी साजिशों का शिकार बना रहे हैं और इसे तबाह करने की साजिशों को अंजाम दे रहे हैं। सोमवार को खबर आई कि यूएई की ओर से 86 आतंकी संगठनों को बैन कर दिया गया है जिसमें आईएम और लश्कर का नाम प्रमुखता से शामिल है। भारत के लिहाज से अगर देखा जाए तो यह एक अच्छी खबर है।

जो अमेरिका नहीं कर पाया वह यूएई करेगा
आईएम और लश्कर दोनों का मकसद सिर्फ भारत को तबाह करना है। इससे पहले अमेरिका की ओर से इन दोनों ही संगठनों को बैन किया जा चुका है लेकिन इसके बावजूद इनकी साजिशों में कोई कमी नहीं आई। लेकिन यूएई की ओर से लगाया गया यह बैन वाकई भारतीय एजेंसियों के लिए संजीवनी की तरह है।
यूएई दुनिया की वह जगह है जो आईएम के दूसरे घर के तौर पर इसके सदस्यों के बीच मशहूर है। यह जगह आईएम के उन आतंकियों और ऑपरेटिव्स के लिए स्वर्ग में तब्दील हो गई थी जो अक्सर यूएई और भारत आते जाते रहते हैं।
वाराणसी ब्लास्ट के बाद आईएम के बाद यासीन भटकल के साथ जिस असादुल्ला अख्तर को पकड़ा गया था, वही यहीं पर छिपा हुआ था। जब भारतीय एजेंसियां उसकी तलाश कर रही थीं, तब वह यूएई में था और यहीं से अपने मॉड्यूल को नियंत्रित कर रहा था।
बैन से टूटेगी आइएम की कमर
इंडियन एजेंसियों की मानें तो आईएम को बैन करने का जो सबसे बड़ा फायदा उन्हें हासिल होगा वह है इस संगठन को मिलने वाली आर्थिक सहायता पर लगने वाली लगाम। आईएम को सबसे ज्यादा आर्थिक मदद इसी जगह से मिलती है।
पिछले कुछ दशकों पर गौर किया जाए तो आईएम के ऑपरेटिव्स जिनमें यासिन भटकल भी शामिल है, तो पता चलता है कि उन्होंने सिर्फ यूएई में शरण लेने के लिए भारत को छोड़ दिया। इसके बाद यूएई पहुंचकर उन्होंने अपने संगठन को एक नया रंग और रूप दे डाला।
जो ऑपरेटिव्स भारत छोड़कर यूएई जा पहुंचे उनमें यासिन के अलावा असादुल्ला अख्तर, डॉक्टर शहनवाज, अब्दुल वाहिद भटकल और अब्दुल सतार जैसे कुछ नाम शामिल हैं।
भारतीय एजेंसियों का कहना है कि यूएई की ओर से उन्हें आतंक के इस संगठन को कमजोर करने में जो मदद मिली है वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है। अब इस बैन के बाद संगठनों के आतंकियों के लिए यूएई में रह पाना और
सांस ले पाना एक दूभर काम होगा। बैन से पहले यह संगठन खास जानकारियों को यूएई भेजता और फिर आतंकियों को यूएई डिपोर्ट करने की कोशिशें होती। अब इस तरह की गतिविधियों के प्रकाश में आने पर यूएई ऐसे लोगो के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकेगा।
यूएई मॉड्यूल ने दी आईएम को नई पहचान
यह बैन और भी प्रभावी इसलिए है क्योंकि यूएई मॉड्यूल ही वह मॉड्यूल है जिसने आईएम को फिर से सिर उठाने में काफी मदद की। वर्ष 2010 में आईएम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हुई और तब से ही यह संगठन सुस्त हो गया था।
लेकिन यूएई मॉड्यूल की वजह से संगठन को नई ताकत मिली और संगठन हरकत में आ गया। पुरानी दिल्ली और वाराणसी में हुए ब्लास्ट इसकी सबसे बड़ी पहचान थे।
वाराणसी ब्लास्ट में हुई जांच के बाद पता लगा कि आईएम के यूएई मॉडयूल की ओर से इन हमलों को अंजाम दिया गया था। भले ही वह हमला कम तीव्रता वाला था लेकिन इसने आईएम के कैडर्स को एक नई जान दी जिसके बाद यह फिर से आतंक के बिजनेस में वापस लौट सका।
आईबी की रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टर शहनवाज और असादुल्ला अख्तर जो यूएई चले गए थे, इन हमलों के मास्टरमाइंड थे। भारत छोड़कर गए इन दोनों को व्यक्तियों को शारजाह में पनाह मिली थी। आईबी के मुताबिक वाराणसी ब्लास्ट पहला मौका था जब आईएम के यूएई मॉड्यूल को एक नई पहचान मिली थी।
तब से ही आईएम एजेंसियों के लिए एक सिरदर्द बन गया था। यूएई में न सिर्फ इनकों छिपने की जगह मिलती बल्कि हर तरह से यह संगठन अपने लिए रकम इकट्ठा करने में भी सफल रहते। अब इस बैन के बाद आईएम की आगे की राह काफी मुश्किल हो सकेगी। फिलहाल भारतीय एजेंसियां तो इसी बात पर यकीन करती हैं।
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