आखिर फारूख अब्दुल्ला को क्यों लगता है लड़कियों से डर?

जनता का आक्रोश शुक्रवार को उस समय फूट पड़ा जब केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री फारुख अब्दुल्ला ने कहा कि आज तो आलम यह हो गया है कि पुरुष महिलाओं से बात तक करने में डरने लगे हैं, क्योंकि लगता है कि इससे उन्हें जेल हो सकती है। अब तो हम लड़कियों से भी बात करने में डरने लगे हैं। यहां तक कि हमें महिला सचिव रखने में भी डर लगने लगा है। हालांकि अब्दुल्ला ने आगे कहा कि इसके लिए समाज खुद जिम्मेदार है। मैं इस बात से सहमत हूं कि दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ गई हैं। जो कुछ भी हो रहा है, गलत है। दोष महिलाओं में नहीं, बल्कि समाज में है।
हालांकि फारूख अब्दुल्ला ने अपने बेटे उमर की तल्ख टिप्पणी के बाद माफी मांग ली लेकिन माफी मांगने से पहले ही उनके बयान पर बखेड़ा खड़ा हो चुका था।
लोगों ने ट्विटर पर लिखा है कि अगर वाकई में पुरुष महिलाओं से बात तक करने में डरने लगे हैं, तो तरूण तेजपाल केस और जस्टिस गांगुली जैसे लोग समाज में क्यों सामने आ रहे हैं? राह चलते कोई लड़की किसी के हवस का शिकार हो जाती है , लोगों की क्रूर और घिनौनी हरकतों के चलते आज मां-बाप अपनी बेटी को घर से बाहर भेजने में डरते हैं। आखिर क्यों हर समय महिलाओं को प्रत्यक्ष औऱ अप्रत्यक्ष रूप से दोषी ठहराया जाता है?
आम लोगों की तरह राजनैतिक पार्टियों और समाजिक कार्यकर्ताओं मे अब्दु्ल्ला के बयान की आलोचना की है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता स्मृति ईरानी ने कहा, "बहुत ही अनुचित बयान है, खासकर संसद की सीढ़ियों पर ऐसा बयान देना तो बेहद अनुचित है। उनका यह बयान यह संकेत देता है कि महिलाओं को सिर्फ इसलिए काम पर रखा जाता है कि उन्हें अपमानित किया जा सके या नीचा दिखाया जा सके।"
भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) की पूर्व अधिकारी किरण बेदी ने कहा, "जिन पुरुषों को खुद पर विश्वास है, वे ऐसी बयानबाजी नहीं करेंगे। जिनमें असुरक्षा की भावना होती है वहीं ऐसा कहेगा।" महिला एवं बाल कल्याण मंत्री कृष्णा तीरथ ने कहा, "अब तक महिलाएं पुरुषों से डरती रही हैं। ऐसा लग रहा है कि इस परिस्थिति में बदलाव आ रहा है।"












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