विजय बन सकते थे 'कांग्रेस के CM', 2009 में अगर राहुल गांधी ये फैसला लेते, तो तमिलनाडु की राजनीति अलग होती!
चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में जब साउथ के सुपरस्टार विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तो उनके बगल में खड़े राहुल गांधी के चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान थी। लेकिन इस मुस्कान के पीछे 15 साल पुरानी एक ऐसी कहानी छिपी है, जिसने न सिर्फ तमिलनाडु बल्कि पूरे देश की राजनीति का रुख बदल दिया होता।
आज जब विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) ने डीएमके और एआईएडीएमके के दशकों पुराने वर्चस्व को खत्म कर दिया है, तो यहां एक सवाल उठता है- क्या विजय 'कांग्रेस के मुख्यमंत्री' बन सकते थे? आइए आपको 2009 का वो किस्सा बताते हैं, जब विजय कांग्रेस में शामिल होना चाहते थे और राहुल गांधी ने उस वक्त उन्हें क्या सलाह दी।

▶️2009 की वो मुलाकात और राहुल गांधी की सलाह
किस्सा साल 2009 का है। मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उस वक्त सुपरस्टार विजय ने कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा जताई थी। दिलचस्प बात यह थी कि विजय ने पार्टी से न तो कोई बड़ा पद मांगा था और न ही चुनाव के लिए टिकट। वे सिर्फ एक साधारण सदस्य के तौर पर जुड़ना चाहते थे।
लेकिन राहुल गांधी ने उस समय एक ऐसी सलाह दी जिसने इस पूरी प्रक्रिया पर ब्रेक लगा दिया। राहुल ने विजय से कहा कि उन्हें सीधे मुख्य राजनीति में आने के बजाय पहले 'यूथ कांग्रेस' के चुनाव लड़ने चाहिए। एक सुपरस्टार के लिए यह प्रस्ताव थोड़ा अजीब था। इस बीच विजय ने एनएसयूआई (NSUI) के राष्ट्रीय पदाधिकारियों से भी मुलाकात की थी, जिसकी तस्वीर हाल ही में कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने साझा की है। नतीजा यह हुआ कि विजय कांग्रेस से दूर हो गए और पार्टी ने तमिलनाडु में सत्ता में वापसी का एक सुनहरा मौका गंवा दिया।
▶️क्या कांग्रेस को भारी पड़ी अपनी ही 'जिद्द'?
इतिहास गवाह है कि यह पहली बार नहीं था जब कांग्रेस ने अपने उभरते हुए चेहरों को पहचाने में गलती की। अगर हम फ्लैशबैक में जाएं, तो ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं:
- आंध्र प्रदेश और जगन मोहन रेड्डी: वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के निधन के बाद उनके बेटे जगन मुख्यमंत्री बनना चाहते थे। कांग्रेस आलाकमान ने उनकी मांग नहीं मानी। नतीजा? जगन ने अपनी पार्टी बनाई और आज कांग्रेस आंध्र प्रदेश में हाशिए पर है।
- असम और हिमंत बिस्वा सरमा: हिमंत कांग्रेस के एक कद्दावर नेता थे, लेकिन राहुल गांधी ने तरुण गोगोई पर भरोसा जताया। आज हिमंत बिस्वा सरमा भाजपा के सबसे ताकतवर मुख्यमंत्रियों में से एक हैं और कांग्रेस असम में लगातार तीन चुनाव हार चुकी है।
- तमिलनाडु में भी कुछ ऐसा ही हुआ। अगर 2009 में विजय कांग्रेस का हिस्सा बन जाते, तो शायद राज्य में सात दशकों से सत्ता का सूखा झेल रही कांग्रेस आज अपने दम पर सरकार चला रही होती और विजय TVK की जगह शायग कांग्रेस पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री बनते।

▶️डीएमके से दूरी और विजय से 'भाईचारा'
2026 के चुनावों के नतीजों के बाद कांग्रेस ने अपनी पुरानी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाले गठबंधन की हार के बाद कांग्रेस ने तुरंत अपनी 'गलती' सुधारी। पार्टी ने दशकों पुराने साथी डीएमके (DMK) से नाता तोड़ लिया और विजय की पार्टी टीवीके (TVK) के साथ लॉन्ग-टर्म समझौता कर लिया है।
यह समझौता सिर्फ सरकार बनाने तक सीमित नहीं है। आने वाले स्थानीय निकाय चुनाव, राज्यसभा और 2029 के लोकसभा चुनाव में भी अब 'विजय-कांग्रेस' की जोड़ी साथ दिखेगी। राहुल गांधी अब विजय को 'भाई' कहकर संबोधित कर रहे हैं, जो संबोधन वो कभी स्टालिन के लिए इस्तेमाल करते थे। चुनाव प्रचार के दौरान भी राहुल ने स्टालिन के साथ मंच साझा करने से परहेज किया था, जिसे अब विजय की ओर बढ़ते कदम के रूप में देखा जा रहा है।
▶️2029 का लक्ष्य और बदलता सियासी गणित
तमिलनाडु की राजनीति अब पूरी तरह बदल चुकी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में जिस डीएमके गठबंधन ने सभी 39 सीटें जीती थीं, उसकी जगह अब टीवीके-कांग्रेस गठबंधन ने ले ली है। हालांकि, फिलहाल विजय की सरकार कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन पर टिकी है, लेकिन सियासी गलियारों में सुगबुगाहट है कि एआईएडीएमके (AIADMK) के भीतर फूट पड़ सकती है। अगर ऐसा होता है, तो विजय की सरकार छोटे सहयोगियों पर अपनी निर्भरता कम कर सकती है।
कुल मिलाकर विजय का मुख्यमंत्री बनना सिर्फ एक फिल्मी सितारे की जीत नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस की उस रणनीति की भी जीत है जिसे सुधारने में उसे 15 साल लग गए। अब देखना यह होगा कि क्या यह 'सुपरस्टार और राहुल' की जोड़ी 2029 के रण में तमिलनाडु में क्लीन स्वीप कर पाएगी या नहीं।














Click it and Unblock the Notifications