बीजेपी नेता मनोज तिवारी के लिए दिल्ली में एंबुलेंस रोके रखने की सच्चाई: फ़ैक्ट चेक

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ट्रैफ़िक के बीच खड़ी एक एंबुलेंस का वीडियो सोशल मीडिया पर इस दावे के साथ शेयर किया जा रहा है कि 'दिल्ली के किसी बड़े नेता के लिए पुलिस ने एंबुलेंस को नाके पर रोके रखा जिसमें एक बच्ची ज़िंदगी और मौत से लड़ रही थी'.

क़रीब डेढ़ मिनट के इस वीडियो में एंबुलेंस ड्राइवर को यह कहते सुना जा सकता है कि "बच्चे का ख़ून बह रहा है, बुरा हाल है." साथ ही वो सवाल करता है कि "अगर ये बच्चा एंबुलेंस में मर गया तो इसका ज़िम्मेदार कौन होगा?"

इस वायरल वीडियो में कई लोग दिल्ली पुलिस से बहस करते हुए दिखते हैं कि एंबुलेंस को वीआईपी मूवमेंट के बावजूद रोका ना जाए.

वरिष्ठ पत्रकार और लेखिका तवलीन सिंह ने बुधवार को यह वीडियो ट्वीट किया था जिसे अब तक 83 हज़ार से ज़्यादा बार देखा जा चुका है और तीन हज़ार से ज़्यादा लोग उनके ट्वीट को शेयर कर चुके हैं.

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तवलीन ने अपने ट्वीट में लिखा, "भयावह है ये वीडियो जिसमें दिखता है कि दिल्ली पुलिस ने किसी वीआईपी नेता के लिए एक एंबुलेंस को रोका हुआ है जो एक दम तोड़ते बच्चे को लेकर जा रही थी. आख़िर कब समाप्त होगा ये वीआईपी कल्चर?"

हमने पाया कि बीते कुछ दिनों में फ़ेसबुक और ट्विटर पर सैकड़ों लोग इस वीडियो को अलग-अलग दावों के साथ शेयर कर चुके हैं.

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कुछ लोगों ने दावा किया है कि इस एंबुलेंस को भाजपा सांसद मनोज तिवारी के लिए रोका गया था. जबकि कुछ ने लिखा है कि किसी कांग्रेस लीडर के लिए यह एंबुलेंस रोकी गई थी.

लेकिन अपनी पड़ताल में हमने पाया कि ये वीडियो सवा दो साल पुराना है और पहले भी सोशल मीडिया पर भ्रामक संदेशों के साथ इसे वायरल किया जा चुका है.

इस एंबुलेंस को किसी भाजपा या कांग्रेस नेता के लिए नहीं, बल्कि भारत सरकार के एक विदेशी मेहमान की आवाजाही के लिए रोका गया था.

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कब, कहाँ और क्यों रोकी गई एंबुलेंस?

रिवर्स इमेज सर्च से पता चलता है कि यह वीडियो 1 अप्रैल 2017 को सुबह 9 बजकर 59 मिनट पर रिकॉर्ड किया गया था.

दिल्ली में रहने वाले प्रीत नरुला नाम के एक शख़्स ने इस वीडियो को फ़ेसबुक लाइव पर रिकॉर्ड किया था और लिखा था कि 'वीआईपी लोग एंबुलेंस में लेटे इस बच्चे से ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं'.

प्रीत नरुला द्वारा रिकॉर्ड किये गए इस वीडियो को उनके फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल से अब तक क़रीब 21 हज़ार लोग शेयर कर चुके हैं और 13 लाख से ज़्यादा बार यह वीडियो देखा गया है.

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उनका यह वीडियो अप्रैल 2017 में वायरल हो गया था जिसपर समाचार एजेंसी पीटीआई ने भी एक रिपोर्ट की थी.

पीटीआई के अनुसार, यह घटना दिल्ली में स्थित इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम के गेट नंबर 14 के सामने हुई थी. इन गाड़ियों को भारतीय मेहमान और मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री मोहम्मद नजीब तुन रज़ाक की आवाजाही के लिए रोका गया था.

समाचार एजेंसी एएनआई के एक पुराने ट्वीट से इस बात की पुष्टि होती है कि मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री मोहम्मद नजीब तुन रज़ाक 1 अप्रैल 2017 को क़रीब सवा दस बजे इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम से कुछ ही दूरी पर स्थित राजघाट पहुँचे थे और उन्होंने महात्मा गांधी के समाधि स्थल पर श्रद्धांजलि दी थी.

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भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, मोहम्मद नजीब तुन रज़ाक 30 मार्च से 4 अप्रैल 2017 तक भारत के दौरे पर थे और इस दौरान उन्होंने दिल्ली समेत जयपुर और चेन्नई का भी दौरा किया था.

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मनोज तिवारी का ट्वीट

कुछ पुरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस घटना पर दिल्ली पुलिस ने यह दलील दी थी कि पुलिस ने प्रोटोकॉल का पालन करते हुए उन गाड़ियों को रोका था और एंबुलेंस को कुछ ही मिनट बाद जाने की अनुमति दे दी गई थी.

इन रिपोर्ट्स के मुताबिक़, घायल बच्चे को हरियाणा के सोनीपत ज़िले से दिल्ली लाया गया था जिसके सिर में चोट लगी थी और उसकी नाक से ख़ून बह रहा था.

हालांकि किसी भी मीडिया रिपोर्ट से इस बात की पुष्टि नहीं की जा सकी कि उपचार के बाद उस बच्चे का क्या हुआ था.

पुलिस ने उस समय यह दावा ज़रूर किया था कि घायल बच्चे के परिजनों ने दिल्ली पुलिस से इस संबंध में कोई शिक़ायत नहीं की है.

हाल ही में अपने नाम पर यह भ्रामक वीडियो शेयर होता देख, भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने इस संबंध में एक ट्वीट किया था.

उन्होंने लिखा था, "दिल्ली में कभी भी, कहीं भी किसी सांसद के लिए ट्रैफ़िक नहीं रोका गया. ये एक पुराना वीडियो है और ट्रैफ़िक रोके जाने का संबंध दिल्ली आये एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि से था."

मनोज तिवारी ने दिल्ली पुलिस से यह अफ़वाह फैलाने वालों के ख़िलाफ़ केस दर्ज करने की अपील भी की है.

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