महाराष्ट्र में बढ़ सकती है पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस की मुश्किल, जानें पूरा मामला
Trouble of former Chief Minister Fadnavis may increase in Maharashtra, know the whole matter महाराष्ट्र में बढ़ सकती पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस की मुश्किल, जानें पूरा मामला
बेंगलुरु। महाराट्र में महाविकास अघाड़ी सरकार के मुख्यमंत्री अब भाजपा से आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए मोर्चा खोल दिया हैं। महाराष्ट्र सरकार के 100 दिन पूरे होने के साथ ही शिवसेना प्रमुख और सीएम उद्वव ठाकरे ने पूर्व मुख्यमंत्री को घेरने में जुट चुकी हैं। ऐसे में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

फोन टैपिंग मामले में लगा है ये आरोप
बता दें महाराष्ट्र सरकार ने फोन टेप मामले में पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस को घेरना शुरु कर दिया हैं। मालूम हो कि राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने जनवरी में यह आरोप लगाया था कि पिछले साल लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सुप्रीमो शरद पवार, शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे और शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे के फोन की टैपिंग की गई थी।

फडणवीस कह चुके है ये बात
हालांकि महाराष्ट्र में पिछली भाजपा शिवसेना की सरकार में पांच वर्षों के शासनकाल के दौरान गृह विभाग देखने वाले पूर्व सीएम फडणवीस ने साफ किया कि पुलिस या फिर सरकारी तंत्र को इस तरह का कोई आदेश नहीं दिया गया था।

छह सप्ताह में जांच कमेटी सौंप देगी रिपोर्ट
इस मामले में सरकार ने समिति गठित कर जांच के आदेश दिए हैं। विगत सोमवार को गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि फोन टेप मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की इस मामले में छह सप्ताह के अंदर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगी।

क्या है पूरा मामला
माना जा रहा है कि सरकार के इस कदम से पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस की परेशानी बढ़ सकती हैं। देशमुख ने कहा कि अक्तूबर में हुए विधानसभा चुनाव और उसके पहले कांग्रेस-एनसीपी सहित शिवसेना के बड़े नेताओं के फोन टेप किए गए थे। इसके लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया गया था। इस संबंध में कई शिकायतें मिली हैं। इसके मद्देनजर यह समिति बनायी गठित की गयी है ताकि देवेन्द्र फडणवीस की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार के दौरान फोन टैपिंग के आरोपों की सच्चाई का पता लगाया जा सके।

ये अधिकारी करेंगे जांच
महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार के दो अधिकारियों का एक पैनल बनाया। जिन्हें इस जांच को पूरा करने के लिए उन्हें छह हफ्ते का वक्त दिया है। इस टीम में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (गृह) श्रीकांत सिंह और ज्वाइंट कमिश्नर (इंटेलिजेंस) अमितेश कुमार है जिन्हें मामले की जांच के लिए नियुक्त किया गया है। एडिशन चीफ सेक्रेटरी (होम) संजय कुमार ने कहा "सुबह हमें गृह मंत्री से फोन टैपिंग मामले की जांच के लिए समिति बनाने का पत्र मिला है। इसे अब मुख्यमंत्री (उद्धव ठाकरे) के पास स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।" देशमुख ने बताया कि जरूरत पड़ने पर समिति को तकनीकी विशेषज्ञ भी मुहैया कराए जाएंगे। समिति के अधिकारी विभिन्न टेलिकॉम कंपनियों से भी बातचीत करेंगे।

जांच में संलिप्त अधिकारियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
महाराष्ट्र सरकार ने यह साफ कर दिया है कि जांच में जो भी अधिकारी फोन टेपिंग प्रक्रिया में शामिल पाया जाता है उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक फडणवीस सरकार के कार्यकाल में एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, शिवसेना प्रवक्ता संजय राऊत आदि के फोन टेप किए गए थे।

विदेश से मंगाए गए थे साफ्टवेयर
गृहमंत्री देशमुख ने बताया कि विपक्षी नेताओं के फोन टेप करने के लिए इजराइल से साफ्टवेयर लाया गया था। चुनाव में राजनीतिक फायदे के लिए फोन टेप किए गए। इसके लिए पुलिस विभाग के अधिकारियों को इजराइल भेजा गया था। उन्होंने कहा कि इस जांच से पता चलेगा कि वह कौन-कौन अधिकारी थे जो इजराइल गए थे।
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