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महाराष्‍ट्र की उद्वव सरकार जल्द देगी मुसलमानों को 5 फीसदी आरक्षण

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बेंगलुरु। महाराष्‍ट्र की महाविकास अघाडी सरकार नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ विधानसभा में प्रस्‍ताव लाने से पीछे तो हट चुकी है लेकिन अब वह मुसलमानों को खुश करने प्रयास में जुट गयी हैं। जहां कांग्रेस की सरकार वाले राजस्थान और अन्य राज्यों में सीएए कानून के खिलाफ बिल पेश कर पारित कराए जा रहे हैं, वहीं कांग्रेस के गठबंधन वाली महाराष्ट्र सरकार ने सीएए प्रस्‍ताव को न कर दिया हैं। लेकिन अब महाराष्‍ट्र सरकार मुस्लिमों को आरक्षण देने पर चर्चा शुरु हो चुकी है। सत्ता पर काबिज शिवसेना-एनसीपी- कांग्रेस की महाराष्‍ट्र की महाविकास अघाडी सरकार जल्‍द ही इससे सबंधित प्रस्‍ताव विधानसभा में पेश करने वाली हैं।

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बता दें शिवसेना के वोट बैंक का बड़ा हिस्सा हिन्दू समुदाय से जुड़ा हुआ है लेकिन महाराष्‍ट्र में सरकार बनाने के बाद वो सीएए पर कदम पीछे करने के कारण राज्य के मुसलमानों को नाराज नहीं करना चाहती। इसलिए उन्‍हें आरक्षण का तोहफा देने के सरकार में सहयोगी पार्टी एनसीपी और कांग्रेस की इस मुद्दे में हां में हां मिला दी हैं।

कैबिनेट में हुई इस पर चर्चा

कैबिनेट में हुई इस पर चर्चा

सूत्रों के अनुसार मुसलमानों के लिए नौकरियों और प्रमोशन में आरक्षण शिवसेना के नेतृत्व वाले महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के एजेंडे में है। उद्धव कैबिनेट की पिछली कैबिनेट की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा भी हुई। बुधवार को हुई महाराष्‍ट्र कैबिनेट में इस पर चर्चा हुई कि मुस्लिमों को नौकरियों और प्रमोशन में 5 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।

 कांग्रेस-एनसीपी सरकार लाई थी अध्यादेश

कांग्रेस-एनसीपी सरकार लाई थी अध्यादेश

महत्वपूर्ण बात ये है कि साल 2014 से पहले जब महाराष्‍ट्र में में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एनसीपी की सरकार थी, तब मराठाओं को 16 प्रतिशत और मुसलमानों के लिए 5 फीसदी आरक्षण का प्रावधान ऑर्डिनेंस लाया गया था। इसी के बाद महाराष्‍ट्र में विधानसभा चुनाव हुए, तब भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना गठबंधन की सरकार सत्ता में आ गई।

 भाजपा-शिवसेना सरकार में हो गया था लैप्स

भाजपा-शिवसेना सरकार में हो गया था लैप्स

महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने मराठा आरक्षण बरकरार रखते हुए मराठाओं को 16 फीसदी आरक्षण देने के ऐलान पर अमल करते हुए विधानसभा और विधान परिषद से बिल पास करा लिया। इसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोग आरक्षण की मांग करने लगे। लेकिन मुसलमानों के लिए सरकार ने मुसलमानों के आरक्षण पर कोई कदम नहीं उठाया। यह अध्यादेश लैप्स हो गया था । तब भाजपा के साथ शिवसेना सत्ता में साझीदार थी, जब मुस्लिम आरक्षण के लिए अध्यादेश लैप्स हो गया था। हालांकि शिवसेना ने मुसलमानों को साधने के बाद पिछले दिनों कई बार मुस्लिम आरक्षण का राग अलापा था।

एक तीर से दो निशाना साधने की तैयारी में महाराष्‍ट्र सरकार

एक तीर से दो निशाना साधने की तैयारी में महाराष्‍ट्र सरकार

आपको बता दें पिछले सितम्बर माह में महाराष्ट्र में मुस्लिम मूक मोर्चा की ओर से पुणे में एक मार्च निकाला गया है जिसमें मांग की गई कि शिक्षा, नौकरी में मुसलमानों को भी 5 फीसदी का आरक्षण दिया जाए। आरक्षण को लेकर अब हर समुदाय की ओर से मांग बढ़ती जा रही है। कह सकते हैं सरकारों द्वारा वोट बैंक बढ़ाने का यह आसान तरीका समय-समय पर सरकारों के लिए गले का फंदा भी बनता रहा है। इसीलिए सरकार के नागरिकता कानून पर नाराज महाराष्‍ट्र के मुस्लिम समुदाय को आरक्षण देकर शिवसेना और एनसीपी, कांग्रेस एक तीर से दो दो निशाना साधने की फिराक में हैं। इस फैसले से सूबे के सभी मुसलमान खुश होंगे जो वर्तमान समय में सीएए को लेकर केन्‍द्र सरकार से नाराज चल रहे हैं।

मौके पर चौका मारना चाहती हैं सरकार

मौके पर चौका मारना चाहती हैं सरकार

महाराष्ट्र में एनसीपी-कांग्रेस के साथ न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तहत सरकार का गठन हुआ था। लंबे समय से कांग्रेस-एनसीपी की मांग है कि मुस्लिमों को 5 फीसदी आरक्षण मिले। इसलिए वह अब सरकार बनने के बाद शिवसेना पर पूरा दबाव भी बना रही है कि पिछली सरकार में किया गया वादा जल्‍द पूरा किया जाए। उनका मानना है कि यह समय मुसलमानाें को 5 प्रतिशत आरक्षण देने का बिलकुल सही समय हैं क्योंकि वर्तमान समय में सीएए को लेकर मुसलमानों में केन्‍द्र सरकार के खिलाफ जबरदस्‍त गुस्‍सा हैं।

एनसीपी नेता नवाब मलिक ने दिया था ये बयान

एनसीपी नेता नवाब मलिक ने दिया था ये बयान

बता दें जब महाराष्‍ट्र में दो माह पूर्व शिवसेना की भाजपा के साथ खटपट होने के बाद राज्य में सरकार गठन की कवायद ही चल रही थी तब एनसीपी के मुंबई इकाई के अध्यक्ष नवाब मलिक ने कहा था कि भाजपा ने शिवसेना को 5 साल तक अपमानित किया और अब उसे लग रहा है कि कुंजी एनसीपी के हाथों में है।

उन्होंने आरोप लगाया था कि शिवसेना ने भाजपा के साथ जाने के बाद ही धर्म की राजनीति शुरू की। तब शिवसेना की विचारधारा को लेकर मुंबई एनसीपी के अध्यक्ष ने कहा था कि उनकी विचारधारा आड़े नहीं आएगी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा से अलग होते ही शिवसेना की विचारधारा बदलेगी। उन्होंने बताया कि कॉन्ग्रेस के भीतर भी शिवसेना को समर्थन देने को लेकर कोई अंदरूनी विवाद नहीं है। तब मलिक ने कहा था कि शिवसेना ने मुस्लिमों को आरक्षण देने का भी वादा किया है।

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English summary
Maharashtra Udhav Government Can Give Reservation to Muslims Soon, Discussion in Cabinet.
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