Tripura election 2023: कौन रोकेगा BJP का रथ ? CPM-कांग्रेस गठबंधन या TMC,जानिए जमीनी हाल
Tripura election 2023:भाजपा को सीपीएम-कांग्रेस गठबंधन से मिल रही है चुनौती। टीएमसी भी है रेस में। लेकिन, भाजपा और IPFT का गठबंधन कायम रहा तो मजबूत हो सकती है स्थिति।

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव 2023 का बिगुल बज चुका है। नागालैंड और मेघालय समेत यहां भी चुनाव होने जा रहे हैं। पांच साल से त्रिपुरा में बीजेपी की सत्ता है, इसलिए उसके सामने सरकार बचाए रखने की चुनौती है। 2018 में उसने प्रचंड बहुमत के साथ लेफ्ट की ढाई दशक पुरानी सत्ता को उखाड़ फेंका था। जबकि, उससे पहले राज्य विधानसभा में उसका एक भी विधायक नहीं था। लेकिन, अबकी बार भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ राज्य के दोनों पारंपरिक सियासी विरोधियों कांग्रेस और लेफ्ट ने बीजेपी का रथ रोकने के लिए हाथ मिला लिया है। दोनों ने गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने का फैसला किया है। दूसरी तरफ मैदान में एक और बड़ी खिलाड़ी है। पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस। ममता बनर्जी की पार्टी ने राज्य में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी की है।

2018 का विधानसभा चुनाव
त्रिपुरा में विधानसभा की कुल 60 सीटें हैं। इनमें से 30 सामान्य विधानसभा चुनाव क्षेत्र हैं। जबकि, 20 अनुसूचित जनतजातियों और 10 अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित किए गए हैं। पिछली बार 60 में से 59 सीटों पर ही साथ चुनाव हुए थे।
2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन
भाजपा ने सिर्फ 51 पर ही अपने उम्मीदवार उतारे थे और उसने कुल 43.59% वोट के साथ 35 सीटें लेकर सरकार बना ली थी। जिन सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार लड़े थे, वहां उसे कुल 51.71% वोट हासिल हुए थे। भाजपा ने जो 8 सीटें छोड़ी थीं, उसपर उसकी सहयोगी इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT) लड़ी थी और सारी का सारी सीटें जीत गई थी। यह एक आदिवासियों के प्रभाव वाली पार्टी है और सत्ताधारी दल ने अबकी बार भी साथ चुनाव लड़ने का संकेत दिया है।
सीपीएम ढाई दशक बाद सत्ता से हुई थी बेदखल
लेकिन, तब ढाई दशक से त्रिपुरा की सत्ता पर काबिज रही सीपीएम को बहुत बड़ा झटका लगा था। उसने 57 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और सिर्फ 16 पर ही उसका उम्मीदवार जीता था। अलबत्ता वोट शेयर उसके भी 42.22% थे। सीपीएम की बाकी सहयोगी पार्टियों सीपीआई, ऑल इंडिया फॉरबर्ड ब्लॉक और आरएसपी की भी चुनावी बत्ती गुल हो गई थी।
कांग्रेस और तृणमूल का क्या रहा था हाल ?
कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस का प्रदर्शन तो बहुत ही निराशाजनक रहा था। पिछले चुनाव तक लेफ्ट के खिलाफ विपक्षी पार्टी की भूमिका निभाने वाली कांग्रेस ने उम्मीदवार तो सभी 59 सीटों पर उतारे थे, लेकिन 58 पर उसकी जमानत भी नहीं बची थी। उसे सिर्फ 1.79% वोट मिले थे। इसी तरह से टीएमसी जो बंगाल से बाहर हाथ-पैर मारने की कोशिश में है, उसने पिछली बार वहां कुल 24 उम्मीदवार उतारे थे और सबकी जमानतें जब्त हो गई थीं। पार्टी को सिर्फ 0.30% वोट मिल पाए थे।
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बीजेपी ने पिछले साल बदला था मुख्यमंत्री
भाजपा ने पिछले साल मई में अचानक बिप्लब देव की जगह माणिक साहा को मुख्यमंत्री बना दिया था। साहा कभी कांग्रेस में ही हुआ करते थे। वह पेशे से डॉक्टर हैं और लोगों के बीच काफी लोकप्रिय माने जाते हैं। फीफा वर्ल्ड कप फुटबॉल के दौरान वे तब काफी सुर्खियों में आए थे, जब बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा के साथ अगरतला में प्रोटोकॉल तोड़कर खुद ही कार ड्राइव करते हुए लोगों के बीच मैच देखने पहुंच गए थे।












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