Triple Talaq Facts: पढ़ें, मुस्लिम महिलाओं के दर्द को बयां करते आंकड़े
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को अवैध करार अवैध करार दे दिया है। पिछले कुछ महीनों से देश में इस मुद्दे पर जोरदार बहस चल रही थी। मुस्लिम धर्मगुरु इसे रिलीजियस फ्रीडम से जोड़कर देख रहे थे, तो वहीं कई इस्लाम के जानकार मानते हैं कि तीन तलाक का एग्जीक्यूशन यानी जिस तरीके से तीन तलाक दिए जाते हैं वह इस्लाम के खिलाफ है। मसलन, वॉट्सएप, ई-मेल और फोन पर तलाक देना कुरान के खिलाफ है। बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट आज यह तय कर दिया है कि तीन तलाक अवैध है। आइए बताते हैं आपको इससे जुड़े कुछ अहम तथ्य....

- भारत दुनिया का तीसरा सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश है। एक अनुमान के मुताबिक, अब तक करीब 9 करोड़ महिलाएं तलाक झेल चुकी हैं। ये तलाक कोर्ट के बाहर दिए गए, यानी शरिया के तहत।
- शरिया के तहत ही पुरुष को तीन तलाक देने का अधिकार दिया गया है, लेकिन आपको बता दें कि बड़ी संख्या में मुस्लिम राष्ट्रों ने तीन तलाक पर बैना लगा रखा है।
- 2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक, 13.5 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं की शादी 15 साल की उम्र से पहले की कर दी गई, जबकि 49 प्रतिशत महिलाओं की शादी 14 से 19 वर्ष के बीच कर दी गई। वहीं, 18 प्रतिशत का निकाह 20 से 21 साल की उम्र में कर दिया गया। इतनी कम उम्र में शादी से न केवल ये महिलाएं शिक्षा से वंचित हुईं, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी जूझना पड़ रहा है।
- भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन के मुताबिक, भारत में जिन महिलाओं को तलाक दिया गया, उनमें 80 से 95 प्रतिशत को किसी प्रकार का गुजारा भत्ता तक नहीं दिया गया। हाल ही में एक दर्दनाक घटना देशभर की मीडिया में सुर्खी बनी, जिसमें एक गर्भवती महिला को तलाक देकर घर से बाहर निकाल दिया गया। इस महिला का नाम है शगुफ्ता शाह। इनके पति ने बस तलाक बोला और घर से निकाल दिया।
- जिन मुस्लिम महिलाओं को तलाक की इस विभीषिका का सामना करना पड़ा, उनमें करीब 65 प्रतिशत को ओरल डायवोर्स यानी सिर्फ मुंह से तलाक बोल दिया और बस रिश्ता खत्म।
- इलाहाबाद हाईकोर्ट तीन तलाक असंवैधानिक करार दे चुका है।












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