रेलवे लेकर आया बिना इंजन की 'ट्रेन 18', कुछ ही घंटों में पूरा होगा 777 किमी. का सफर

दिल्ली से भोपाल जा रहे यात्रियों के लिए खुशखबरी है। अब जल्द ही दिल्ली से भोपाल का सफर सिर्फ 5 घंटे का हो जाएगा। अगले साल इस रूट पर शताब्दी के जगह 'ट्रेन 18' दौड़ेगी, जिससे ये सफर और सुविधाजनक और छोटा हो जाएगा।

Indian Railways

नई दिल्ली। दिल्ली से भोपाल जा रहे यात्रियों के लिए खुशखबरी है। अब जल्द ही दिल्ली से भोपाल का सफर सिर्फ 5 घंटे का हो जाएगा। अगले साल इस रूट पर शताब्दी के जगह 'ट्रेन 18' दौड़ेगी, जिससे ये सफर और सुविधाजनक और छोटा हो जाएगा। 'ट्रेन 18' भारत की पहली ट्रेन होगी जो बिना इंजन के पटरी पर दौड़ेगी। अभी तक यात्रियों को दिल्ली से भोपाल जाने में 8 घंटे लगते थे, लेकिन इस सेमी-हाई स्पीड ट्रेन के आने के बाद सफर केवल पांच घंटे का हो जाएगा।

सितंबर में लॉन्च होगी ट्रेन

सितंबर में लॉन्च होगी ट्रेन

देश में अभी तक बिना इंजन के ट्रेन केवल मेट्रो में चलती हैं, लेकिन अब भारतीय रेलवे की पहली ट्रेन बिना इंजन के चलने के लिए तैयार है। रेलवे का महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट 'ट्रेन 18' सितंबर में लॉन्च होगा। ट्रेन 18 का निर्माण मेक इन इंडिया के तहत इंटिग्रल कोच फैक्टरी चेन्नई कर रही है। इस ट्रेन की खास बात ये है कि इसे दौड़ने के लिए इंजन की जरूरत नहीं होगी।

देश की पहली इंजनलेस ट्रेन

देश की पहली इंजनलेस ट्रेन

ट्रेन के तीन ट्रायल पूरे हो चुके हैं और ये जल्द ही सबसे तेज चलने वाली शताब्दी, भोपाल-नई दिल्ली शताब्दी की जगह ले लेगी। रेलवे के राष्ट्री प्रवक्ता आरडी वाजपेयी ने कहा कि भारतीय रेलवे की टेक्निकल एडवाइजर रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन (RDSO) इसका टेस्ट लेगी और अपनी मान्यता देगी। इस ट्रेन की टाइमिंग और रेट वही रहेगा, केवल रेक में बदलाव किया गया है। इस ट्रेन में शताब्दी के मुकाबले कई ज्यादा सुविधाएं होंगी।

160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी

160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी

ये ट्रेन मेट्रो ट्रेनों की तरह इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर सेल्फ-प्रोपेल्ड चलेंगी। इंटर सिटी ट्रैवल को और बेहतर बनाने के लिए 'ट्रेन 18' को लाया जा रहा है। ट्रेन में ऑटोमैटिक दरवाजे होंगे, वाई-फाई और इंफोटेनमेंट की सुविधा होगी, बायो-वैक्यून सिस्टम के साथ मॉड्यूलर टॉयलेट और ग्लास विंडो होगी। ये पूरी ट्रेन एसी चेयर कार होगी और 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी।

तो इसलिए रखा गया है 'ट्रेन 18' नाम

तो इसलिए रखा गया है 'ट्रेन 18' नाम

पहले रेक में 16 चेयर कार कोच होंगे, जिसमें दो एग्जीक्यूटिव चेयर कार होंगे जिनमें 56 यात्री बैठ सकते हैं। नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयर कार में 78 सीटें होंगी। 'ट्रेन 18' को बाहर से मंगाए गए कोच के मुकाबले आधी कीमत में बनाया जा रहा है। इस ट्रेन का नाम इसके बनने वाले साल पर रखा गया है। साल 2018 में बनी ट्रेन का नाम 'ट्रेन 18' रखा गया है। इसी तरह रेलवे इसके अपग्रेड वर्जन पर भी काम कर रही है, 'ट्रेन 20' जिसे साल 2020 में लॉन्च किया जा सकता है।

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