क्या छापे से बचने के लिए BJP को चंदा देती थीं कंपनियां? सवाल पर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने क्या जवाब दिया?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एसबीआई ने इलेक्टोरल बॉन्ड यानी चुनावी चंदे से जुड़ी सभी जानकारी चुनाव आयोग को दे दी थी जिसके बाद इसे गुरुवार शाम को सार्वजनिक कर दिया गया।
आयोग ने अपनी वेबसाइट पर इसे दो भागों में जारी किया है। एक भाग में उन लोगों के नाम हैं, जिन्होंने अब तक इलेक्टोरल बॉन्ड्स खरीदे हैं। इसके अलावा दूसरे भाग में बॉन्ड से चंदा पाने वाली पार्टियों के नाम शामिल हैं।

इस डेटा से पता चला है कि 12 अप्रैल 2019 से 24 जनवरी 2024 तक चुनावी बॉन्ड खरीदने वाली टॉप 30 कंपनियों में से कम से कम 14 को केंद्रीय या राज्य जांच एजेंसियों द्वारा कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।
इस बारे में सवाल पूछे जाने पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ये बस एक 'धारणा' है। वित्त मंत्री ने कहा कि मुझे लगता है कि आपने यह धारणा बना ली है कि पहले ईडी ने छापेमारी की जिसके बाद उन्होंने पार्टी को चंदा दिया।
सीतारमण ने कहा कि ऐसा भी हुआ होगा कि उन्होंने हमें पैसा दिया मगर फिर भी उसके दरवाजे पर ईडी गई और उसने उनके खिलाफ एक्शन लिया। वित्त मंत्री ने कहा कि बस ये एक धारणा बन गई है कि ईडी ने जाकर उनके दरवाजे खटखटाए इसके बाद वे खुद को बचाने के लिए हमारे पास आए और हमें चंदा दिया।
वित्त मंत्री निर्माला सीतारमण ने कहा कि दूसरा सवाल ये भी है कि क्या आप निश्चिंत हैं कि वो पैसा हमें ही मिला है... किसी दूसरे दलों को नहीं मिला है? वित्त मंत्री ने ये भी कहा कि राजनीतिक दलों को चंदा देने की पिछली प्रणाली में कई खामियां थी।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को SBI द्वारा बिना यूनिक नंबरों के इलेक्टोरल बॉन्ड का डेटा पेश करने पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को राजनीतिक दलों द्वारा प्राप्त चुनावी बॉन्ड की यूनिक अल्फा-न्यूमेरिक नंबर का खुलासा करना चाहिए था।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, सीतारमण ने कहा, "मामला अभी भी अदालत में है, फैसला आ गया है और भारतीय स्टेट बैंक को जो कहना है वह प्रस्तुत करेगा ।" वित्त मंत्री ने कहा, "मेरे पूर्ववर्ती (पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली) ने क्या कहा था जब वह यह चुनावी बांड योजना लाए थे।
उन्होंने कहा था कि 'यह पिछली प्रणालियों से बेहतर है क्योंकि पैसा खातों से पार्टी के खाते में जा रहा है।" वित्त मंत्री ने आगे कहा, ''कह सकते हैं कि यह एक आदर्श प्रणाली नहीं है, लेकिन हम एक ऐसी सिस्टम से आगे बढ़े हैं जहां हर किसी ने वही किया जो वे करना चाहते थे।''
किन कंपनियों पर पड़ी रेड?
- मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड
- हल्दिया एनर्जी लिमिटेड
- वेदांता लिमिटेड
- यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल
- DLF कमर्शियल डेवलपर्स लिमिटेड
- जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड
- चेन्नई ग्रीनवुड्स प्राइवेट लिमिटेड
- डॉक्टर रेड्डीज लैबोरेटरीज लिमिटेड
- IFB एग्रो लिमिटेड
- NCC लिमिटेड
- Divi S लेबोरेटरी लिमिटेड
- यूनाइटेड फॉस्फोरस इंडिया लिमिटेड
- अरबिंदो फार्मा
वन इंडिया एक्स्ट्रा
आपको बता दें कि भारत सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना की घोषणा 2017 में की थी। इस योजना को 29 जनवरी 2018 को लागू किया गया था। भारत सरकार ने इस योजना की शुरुआत करते हुए कहा था कि इलेक्टोरल बॉन्ड देश में राजनीतिक फंडिंग की व्यवस्था को साफ कर देगा। हालांकि इसकी इसलिए भी आलोचना होती रही है कि इसमें बड़े कॉर्पोरेट घरानों को उनकी पहचान बताए बिना पैसे दान करने में मदद मिलती है।












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