जाति नहीं अर्थव्‍यवस्‍था की वोटर्स के लिए अ‍हमियत

election survey
नई दिल्‍ली। बसपा, कांग्रेस, बीजेपी और सपा, देश की इन चारों बड़ी पार्टियों में मौजूद नेताओं के एक बड़े समूह का मानना है कि क्षेत्रवाद या जातिगत राजनीति के दम पर एक बड़े वोट बैंक को अपनी ओर खींचा जा सकता है। लेकिन शायद यह सभी नेता नहीं जानते कि ऐसा हरगिज नहीं है और यह सिर्फ एक मिथ है।

पेंन्सिलवेनिया यूनिवार्सिटी के सेंटर फॉर एंडवांस्‍ड स्‍टडी ऑफ इंडिया (सीएएसआई) की ओर से करीब 70,000 वोटर्स पर एक सर्वे कराया गया है। लोक फाउंडनेशन के लिए कराए गए इस सर्वे में देश के 24 राज्‍यों के वोटर्स को शामिल किया गया।

वोटर्स ने जाति के आधार पर नहीं बल्कि देश की अर्थव्‍यवस्‍था और भ्रष्‍टाचार को आधार मानकर वोट करने की बात कही। इस सर्वे में पांच ऐसे मिथ्‍स के बारे में बताया गया है जो इस बारे के चुनावों में खासे अहम साबित हो सकते हैं।

ऑक्‍अस रिसर्च एंड इनवेस्‍टमेंट के चेयरमैन सुरजीत भल्‍ला की मानें तो हजारों वोटर्स से बात कर और इस सर्वे में उनको शामिल कर यह बात साफ हो गई है कि उनके लिए जाति या क्षेत्रवाद की राजनीति अब मायने नहीं रखती है। उन्‍हें देश के विकास और भ्रष्‍टाचार जैसे मुद्दों से इत्‍तेफाक है।

मिथ नंबर 1
-पार्टियां मानती हैं कि क्षेत्रवाद या जाति की राजनीति उनकी जीत की गारंटी है। सर्वे में शामिल समाजशास्त्रियों की मानें तो मयावती जैसे नेताओं को अब मान लेना चाहिए कि पिछड़ी जाति या अनुसूचित जाति जैसा कोई भी मजबूत‍ बिंदु कभी किसी चुनाव में सफल ही नहीं हो सका है।

अगर जाति के आधार पर भी वोट डाले जाएं तो भी मयावती की जीत पक्‍की नहीं हो सकती है।

मिथ नंबर 2
-ज्‍यादातर नेता इस बात पर यकीन करते हैं कि अर्थव्‍यवस्‍था की चुनावों के दौरान कोई अहमियत नहीं होती है जबकि रिपोर्ट में साफ है कि वोटर्स के लिए आर्थिक प्रगति, भ्रष्‍टाचार और महंगाई तीन चिंता के सबसे बड़े पहलू हैं।

इस सर्वे में भी बीजेपी की जीत को पक्‍का करार दिया गया है

मिथ नंबर 3
-शहरी और ग्रामीण वोटर्स की सोच में अंतर होता है। शहरों में रहने वाला अपर कास्‍ट और शहरी हिंदुओं का एक तबका भाजपा और गरीब किसानों का एक तबका कांग्रेस के लिए वोट करेगा। रिपोर्ट ने इस मिथ को सिरे से नकार दिया है।

सर्वे के मुताबिक अब ज्‍यादातर लोग गांवों से शहर में आ बसे हैं। सर्वे के डाटा की मानें तो साक्षरता के स्‍तर मेंअंतर या शहर और गांव में रहने जैसी वजहें भी पार्टियों की पसंद को प्रभावित नहीं कर सकती हैं।

मिथ नंबर4
वोटर्स को परिवारवाद की राजनीति से जरा भी फर्क नहीं पड़ता है।

मिथ नंबर 5
वोट करते समय वोटर्स इस बात पर ध्‍यान नहीं देता कि संसद में कितने सांसद आपराधिक छवि वाले हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+