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त्रिपुरा, नागालैंड में बीजेपी की जीत के ये हैं 5 मायने

नई दिल्ली। त्रिपुरा में लेफ्ट का ढाई दशक का किला ढह गया है। 25 साल के शासन के बाद आखिरकार सीपीआईएम को यहां हार का मुंह देखना पड़ा है। भारतीय जनता पार्टी यहां दो तिहाई सीटों पर जीत की ओर आगे बढ़ रही है। लेफ्ट की इस बार के बाद वह अब देश में सिर्फ एक ही सीट पर सिमटकर रह गई है। लेफ्ट अब सिर्फ केरल में सीमिट होकर रह गई है। त्रिपुरा और नागालैंड की जीत के बाद भाजपा देश के 21 राज्यों में सरकार में है। इस जीत के साथ ही भारतीय जनता पार्टी ने असम के बाद दूसरे बड़े राज्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

25 साल का लेफ्ट का एकमात्र मजबूत किला ढहाने में कामयाब

25 साल का लेफ्ट का एकमात्र मजबूत किला ढहाने में कामयाब

त्रिपुरा व नागालैंड में भारतीय जनता पार्टी की जीत कई मायने हैं, यहां की जीत के बाद भाजपा की रणनीति में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 की जीत के बाद लगातार पूर्वोत्तर राज्यों पर जोर दे रहे हैं और उन्होंने एक के बाद एक कई बार पूर्वोत्तर राज्यों का दौरा किया और यहां के राज्यों के लिए कई योजनाओं की घोषणा की। त्रिपुरा में भाजपा की जीत इसलिए भी काफी अहम है क्योंकि यहां पिछले 25 सालों तक लेफ्ट की सरकार थी और इसे लेफ्ट का काफी मजबूत गढ़ माना जाता था।

देश के 21 राज्यों में भाजपा का शासन

देश के 21 राज्यों में भाजपा का शासन

भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद लगातार एक के बाद एक राज्यों में चुनाव जीतने का सिलसिला जारी किया। पार्टी ने ना सिर्फ पूर्व में राजस्थान, हरियाणा, जम्मू कश्मीर में जीत दर्ज की बल्कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात में भी शानदार जीत दर्ज की। पूर्वोत्तर में भाजपा की उपस्थिति लगभग ना के बराबर थी, लेकिन असम की जीत के बाद भाजपा ने पहली बार यहां अपनी जबरदस्त उपस्थिति दर्ज कराई। लेकिन जिस तरह से पार्टी ने त्रिपुरा व नागालैंड में जीत दर्ज की है उसने पार्टी को ना सिर्फ पूर्वोत्तर में मजबूत किया है बल्कि देश के 21 राज्यों में भाजपा या उसके सहयोग से सरकार चल रही है।

पूर्वोत्तर में कमल खिलाने का बीजेपी का बहुत पुराना सपना पूरा

पूर्वोत्तर में कमल खिलाने का बीजेपी का बहुत पुराना सपना पूरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद पूर्वोत्तर राज्यों में पार्टी को मजबूत करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहे थे, इसके लिए उन्होंने ना सिर्फ यहां ताबड़तोड़ दौरे, चुनावी रैलियां की बल्कि कई योजनाए भी यहां के लोगों के लिए शुरू की, जिसमे पूर्वोत्तर के राज्यों को सीधे दिल्ली से जोड़ने के लिए रेलवे की नई ट्रेन का भी ऐलान किया। पूर्वोत्तर के लोगों को लुभाने के लिए किरन रिजिजू को भाजपा ने कैबिनेट में अहम मंत्रालय दिया। ऐसे में असम के बाद त्रिपुरा व नागालैंड की जीत ने भाजपा को वास्तविक रूप में राष्ट्रीय दल के तौर पर स्थापित किया है।

पूर्वोत्तर में मोदी सरकार की नीतियों को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा

पूर्वोत्तर में मोदी सरकार की नीतियों को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा

त्रिपुरा की बंपर जीत के बाद मोदी सरकार अपनी तमाम योजनाओं को पूर्वोत्तर राज्यो में बेहतर तरीके से लागू करने पर अपना ध्यान केंद्रित करेगी। तमाम योजनाएं जो पूर्वोत्तर राज्यों में नहीं पहुंच पाती थी, उसे अब बेहतर तरीके से यहां लागू किया जा सकता है। कई अहम योजनाओं को लागू करने में पार्टी को इसलिए भी काफी मुश्किल का सामना करना पड़ता था क्योंकि यहां लेफ्ट की सरकार मोदी सरकार की धुर विरोधी थी।

बांग्लादेशी, रोहिंग्या घुसपैठियों के मुद्दे पर पार्टी और सख्ती दिखाएगी

बांग्लादेशी, रोहिंग्या घुसपैठियों के मुद्दे पर पार्टी और सख्ती दिखाएगी

म्यांमार में जिस तरह से हाल ही में रोहिंग्या मुसलमानों की समस्या सामने आई थी। लेकिन त्रिपुरा व नागालैंड की जीत के बाद पार्टी रोहिंग्या मुसलमानों के मुद्दे पर अपना रुख और सख्त करेगी। साथ ही बांग्लादेश के अवैध नागरिकों के मुद्दे पर भी पार्टी अपना सख्त रूख सामने रखेगी। बांग्लादेश के अवैध नागरिकों का मुद्दा शुरू से ही भाजपा के लिए अहम मुद्दा रहा है। बहरहाल देखने वाली बात यह होगी आने वाले समय में भाजपा किस तरह से पूर्वोत्तर के राज्यों में अहम मुद्दों पर अपना रुख अख्तियार करती है।

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