मोदी के लिए डबल बोनांजा : अदालत से राहत पर केन्द्र का ‘बोनस’!

अहमदाबाद। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए आज का दिन यानी 26 दिसम्बर, 2013 का दिन यादगार रहा। कल तक मीडिया में आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल छाए हुए थे और पिछले कुछ दिनों से मोदी सुर्खियों से गायब थे, परंतु गुरुवार का दिन फिर मोदीमय बन गया।

गुरुवार का दिन यानी 26 दिसम्बर, 2013 का दिन नरेन्द्र मोदी के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ। आज सबसे बड़ी बात यह थी कि मोदी ने गुजरात में तीसरी बार सत्ता संभाले एक साल पूरा किया था। मोदी ने यह जानकारी स्वयं ट्विटर पर अपने शपथ ग्रहण समारोह की तसवीर पोस्ट कर शेयर की थी। गुजरात विधानसभा चुनाव 2012 में तीसरी बार बहुमत हासिल कर नरेन्द्र मोदी ने 26 दिसम्बर, 2012 को शपथ ग्रहण की थी और आज उसकी पहली वर्षगाँठ थी। एक तरफ नरेन्द्र मोदी व उनकी सरकार पहली वर्षगाँठ मना रही थी, तो दूसरी तरफ सुबह से मीडिया में अहमदाबाद की मेट्रोपोलिटन अदालत के फैसले को लेकर चर्चाएँ थीं। गुजरात दंगों पर एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट ने मोदी को क्लीन चिट दी थी और एसआईटी की रिपोर्ट को मान्यता मिलेगी या नहीं? यह जानने को सभी आतुर थे और तभी केन्द्र सरकार ने धमाका किया।

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केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने अहमदाबाद की अदालत के फैसले से पहले बड़ा धमाका करते हुए गुजरात में महिला जाससी कांड की जाँच के लिए आयोग बैठाने की घोषणा कर दी। पहली नजर में तो यह फैसला मोदी विरोधी था, परंतु राजनीतिक दृष्टि से यह फैसला मोदी के लिए फायेदमंद ही साबित होगा। लोकसभा चुनाव 2014 में कांग्रेस और भाजपा तथा नरेन्द्र मोदी और राहुल गांधी के बीच सीधा मुकाबला है। ऐसे में केन्द्र का इस तरह का कदम जनता में यह संदेश दे सकता है कि केन्द्र सरकार नरेन्द्र मोदी को चुनाव से ऐन पहले फँसाने की जुगत में है।

इस प्रकार राजनीतिक विश्लेषकों की मानें, तो नरेन्द्र मोदी के लिए केन्द्र का यह फैसला फायदेमंद ही साबित होने वाला है, क्योंकि पूर्व में भी जब-जब नरेन्द्र मोदी को इस प्रकार रोकने या दबाने की कोशिश की गई, वे दोहरी गति से उभरते रहे हैं। वसे भी मोदी सीबीआई का नाम लेकर केन्द्र पर हमला करते रहे हैं और जनता के गले उनकी बात भी उतरती ही है। अब मोदी इस आयोग के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरेंगे, इसमें कोई दोराय नहीं ह।

केन्द्र के इस निर्णय पर बहसबाजी चल ही रही थी कि अहमदाबाद की अदालत का फैसला भी आ गया। यह फैसला मोदी के लिए बड़ी राहत था। अदालत ने एसआईटी द्वारा मोदी को गुजरात दंगों को लेकर दी गई क्लीन चिट को सही ठहराया। एसआईटी ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में मोदी को क्लीन चिट दी थी, जिसे जाकिया जाफरी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, परंतु सुप्रीम कोर्ट ने केस की सुनवाई अहमदाबाद की स्थानीय अदालत में ही करने को कहा था और अहमदाबाद की अदालत का फैसला भी आ गया।

नरेन्द्र मोदी के लिए एक तरफ अहमदाबाद की अदालत से बड़ी राहत देने वाला फैसला आया, तो इस फैसले से पहले ही केन्द्र सरकार ने राजनीतिक रूप से बोनस साबित होने वाला जाँच आयोग गठन का फैसला कर डाला। इस प्रकार देखा जाए, तो नरेन्द्र मोदी के लिए आज का दिन यानी 26 दिसम्बर, 2013 का दिन डबल बोनांजा साबित हुआ।

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