TN Election 2026: 24 मुकदमे, ₹3.74 करोड़ की संपत्ति—कौन हैं सीमन? ‘तमिल राष्ट्रवादी’ नेता का प्रोफाइल
TN Election 2026 (Who is Seeman): तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से पहले एक नाम तेजी से सुर्खियों में है-सीमन। 'नाम तमिझर काची' के प्रमुख समन्वयक सीमन ने कराईकुडी सीट से नामांकन दाखिल कर दिया है, लेकिन इस बार चर्चा सिर्फ उनकी उम्मीदवारी की नहीं, बल्कि उनके हलफनामे और विवादित बयानों की भी है। 24 लंबित मुकदमे, करोड़ों की संपत्ति और हिंदी भाषियों को लेकर दिए गए बयान ने उन्हें चुनावी बहस के केंद्र में ला दिया है।
कराईकुडी से नामांकन, परिवार भी साथ (Nomination Filed in Karaikudi)
सीमन ने शिवगंगा जिले के देवकोट्टई सब-कलेक्टर कार्यालय में कराईकुडी विधानसभा सीट से अपना नामांकन दाखिल किया। इस दौरान उनके साथ उनकी मां अन्नम्मल, पत्नी कयालविझी और पार्टी के कई नेता मौजूद रहे। नामांकन प्रक्रिया के तहत उनकी पत्नी कयालविझी ने बैकअप उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन भी दाखिल किया। यह रणनीति आमतौर पर चुनावी अनिश्चितताओं को देखते हुए अपनाई जाती है।

Seeman Net Worth: ₹3.74 करोड़ की संपत्ति, 24 केस लंबित
- हलफनामे के मुताबिक सीमन और उनकी पत्नी की कुल संपत्ति करीब ₹3.74 करोड़ है। सीमन के पास ₹50,000 नकद, ₹7.72 लाख बैंक में जमा, ₹12 लाख की कार और करीब 150 ग्राम सोना (₹19.50 लाख) है। उनकी कुल चल संपत्ति लगभग ₹39.81 लाख है और उन पर ₹5.11 लाख का कर्ज भी है।
- सबसे अहम बात यह है कि उनके खिलाफ 24 मामले लंबित हैं, हालांकि किसी में भी उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है। उनकी पत्नी कयालविझी के पास ₹35,000 नकद, ₹5.27 लाख बैंक में, ₹3.5 लाख के शेयर निवेश, दो कारें (₹25 लाख और ₹4 लाख) और 1600 ग्राम सोना (करीब ₹2.08 करोड़) है। उनकी कुल चल संपत्ति ₹2.57 करोड़ के आसपास है।
- अचल संपत्ति की बात करें तो उनके पास 25.45 एकड़ कृषि भूमि (₹51 लाख) और 10 एकड़ गैर-कृषि भूमि (₹36 लाख) है। इस तरह कुल अचल संपत्ति ₹87 लाख की है और उन पर ₹18.29 लाख का कर्ज है।

फिल्मी दुनिया से राजनीति तक का सफर
सीमन का असली नाम सेंथमिझन सीमन है। उन्होंने 1990 के दशक में फिल्म निर्माता के रूप में करियर शुरू किया, लेकिन शुरुआती दौर में खास सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने राजनीति की राह पकड़ी और 2010 के आसपास 'नाम तमिझर काची' पार्टी की शुरुआत की। उनका फोकस हमेशा तमिल पहचान और स्थानीय मुद्दों पर रहा है।
सीमन का नाम हमेशा विवादों से जुड़ा रहा है। लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे - LTTE) के समर्थन में बयान देने के कारण उन्हें धमकियां भी मिलीं। इतना ही नहीं, उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत दो बार हिरासत में लिया गया। श्रीलंकाई नौसेना द्वारा तमिल मछुआरे की हत्या के विरोध में दिए गए भड़काऊ भाषण के चलते भी वे विवादों में रहे। 2011 में वेल्लोर जेल में पांच महीने बिताने के बाद उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ जोरदार प्रचार किया था।
हिंदी भाषियों पर बयान से बढ़ा विवाद
हाल ही में सीमन एक बार फिर चर्चा में आए जब उन्होंने एक जनसभा में हिंदी भाषियों को लेकर विवादित बयान दिया। वायरल वीडियो में वे कहते नजर आए कि हिंदी बोलने वालों के साथ सख्ती से पेश आना चाहिए और उन्हें राज्य छोड़ने पर मजबूर कर देंगे। इस बयान के बाद उनकी तीखी आलोचना हुई और राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया।
तमिलनाडु की राजनीति में जहां DMK और AIADMK जैसे बड़े दलों का दबदबा रहा है, वहीं सीमन खुद को एक मजबूत क्षेत्रीय विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। कराईकुडी सीट से उनका चुनाव लड़ना सिर्फ एक सीट का मुकाबला नहीं, बल्कि तमिल राष्ट्रवाद और मुख्यधारा राजनीति के बीच टकराव की कहानी भी है। अब देखना होगा कि 24 मुकदमों और विवादों के बीच सीमन जनता का कितना भरोसा जीत पाते हैं।












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