'संसद परिसर में तंदूरी चिकन...' विवाद पर TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा- 'ये मूर्ख आत्माएं...'
'संसद परिसर में तंदूरी चिकन...' विवाद पर TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा- 'ये मूर्ख आत्माएं...'
नई दिल्ली, 29 जुलाई: विपक्ष के निलंबित सांसदों ने विरोध में संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष बुधवार की पूरी रात गुजारी थी। निलंबित विपक्षी सांसदों ने लगभग 50 घंटे का धरना दिया। इस विरोध प्रदर्शन को लेकर बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए लिखा कि संसद में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने प्रदर्शन कर रहे कुछ निलंबित सांसदों ने 'तंदूरी चिकन' खाया है। बीजेपी के नेताओं ने इसको तमाशा और पिकनिक कहा है। अब इस पूरे मामले पर तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने तंदूरी चिकन पंक्ति पर टिप्पणी की है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने 'संसद परिसर में तंदूरी चिकन...' विवाद पर ट्वीट किया है।

महुआ मोइत्रा ने ट्वीट कर लिखा, ''बीजेपी के किराए के 'नौकर' ये कमेंट करते हैं कि निलंबित सांसद धरने पर क्या खाना खाते हैं। ये मूर्ख आत्माएं हैं! क्या आप नहीं जानते कि आपके मास्टर जीभ और गाल दोनों की सेवा करते हैं ?!"
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50 घंटे से विपक्षी सांसद कर रहे हैं विरोध
निलंबित सांसद 50 घंटे से लगातार संसद परिसर में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। अलग-अलग पार्टियां अपने खाने-पीने का खुद ही ध्यान रख रहे हैं। उन्होंने अपने ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर के लिए उसी के हिसाब से रोस्टर बनाया है। गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस ने कथित तौर पर तंदूरी चिकन खाने की व्यवस्था की थी। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने गांधी प्रतिमा के सामने मांसाहारी भोजन परोसे जाने पर आपत्ति जताई और विरोध की गंभीरता पर सवाल उठाया।
'ये विरोध या पिकनिक...'
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, ''मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक संसद में गांधी प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे कुछ निलंबित सांसदों ने तंदूरी चिकन खाया। सभी जानते हैं कि गांधी जी के जानवरों के वध पर कट्टर विचार थे। कई लोग पूछ रहे हैं कि क्या यह एक विरोध है या एक तमाशा या पिकनिक मनाया जा रहा है।''
सुष्मिता देव ने किया पलटवार
तृणमूल की सुष्मिता देव ने पलटवार करते हुए कहा कि बंद दरवाजों के पीछे आरएसएस के नेता सब कुछ खा रहे हैं और परोसा गया खाने में समस्या क्या है। इसलिए, हमारे भोजन पर कोई टिप्पणी न करें। वे यह बर्दाश्त नहीं कर सकते कि भोजन हमारे घर से नहीं, बल्कि अन्य सांसदों द्वारा लाया जा रहा है। वे इस एकजुटता से डरे हुए हैं।
एक अन्य विरोध करने वाले नेता ने कहा, "जबकि कुछ लोग दोपहर के भोजन में रोटी खाते हैं, हमारे पास फिश करी और चावल या चिकन होता है। इसमें गलत क्या है? हमें जो चाहिए वो खाने का अधिकार है।"












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