संसद में तेजी से पास हो रहे बिलों पर TMC के डेरेक ओ ब्रायन बोले - क्या हम पिज्जा डिलीवर कर रहे है?
नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने मोदी सरकार पर संसद में तेजी से बिल पास कराने को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने ये हमला तीन तलाक बिल पेश होने के एक दिन बाद बोला। मंगलवार को तीन तलाक बिल राज्यसभा में पारित हो गया। इस बिल में तीन तलाक को अपराध माना गया है। ऐसे मामलों में क्रिमिनल केस चलेगा और इसमें 3 साल की सजा का भी प्रावधान है।

क्या हम पिज्जा डिलीवर कर रहे है?
टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने बुधवार को एक ट्वीट शेयर करके कहा कि संसद विधेयकों की समीक्षा करती है। ये चार्ट बताता है कि इस सत्र में कैसे ये किया गया है। क्या हम पिज्जा डिलीवर कर रहे हैं या बिल पारित कर रहे हैं? उन्होंने एक ग्राफिक चार्ट भी शेयर किया है, इसमें बताया गया है मोदी सरकार और कांग्रेस कितने बिलों को समीक्षा के लिए भेजा है? इसमें बताया गया है कि मौजूदा लोकसभा में पारित किए गए 18 बिलों में केवल एक की समीक्षा की गई। इसमें 5 फीसदी की गिरावट आई है।
'संसद का मजाक उड़ाया जा रहा है'
मंगलवार को टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के सबसे विश्वसनीय पार्टी नेताओं में एक डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि जिस तरह से बिलों को तेजी से पास किया जा रहा है, वो संसद का मजाक है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का ये तरीका विपक्ष विपक्ष की आवाज दबाने के लिए है। टीएमसी नेता के शेयर किए चार्ट के मुताबिक 2009 से 2014 के बीच कांग्रेस के कार्यकाल में सबसे ज्यादा 71 फीसदी बिलों की समीक्षा की गई। जबकि बीजेपी सरकार के पिछले कार्यकाल में 26 फीसदी बिलों की समीक्षा की गई।

तीन तलाक बिल पास
मंगलवार को तीन तलाक बिल विपक्ष के विरोध और वॉकआउट के वाबजूद पास हो गया। जेडीयू,टीआरएस और एआईएडीएमके समेत कई दलों ने बिल का विरोध किया। जेडीयू और एआईएडीएमके ने बिल के विरोध में वॉकआउट किया। टीआरएस और पीडीपी के सासंद भी वोटिंग से दूर रहे। विपक्षी दलों ने कई सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। टीएमसी के 13 में से 12 सांसदों ने विरोध में वोट डाला। मुस्लिम महिला(विवाह अधिकार संरक्षण) को राज्यसभा में चर्चा के बाद 84 के मुकाबले 99 मतों से पारित हुआ।

आरटीआई बिल पास कराने पर घेरा
टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने पिछले हफ्ते कहा था कि सरकार ने लोकसभा में दोषपूर्ण आरटीआई बिल को पास कराने के लिए भी अपने प्रचंड बहुमत का इस्तेमाल किया। विपक्ष की आपत्तियों के बावजूद ये बिल भी राज्यसभा में पास हो गया। तब ब्रायन ने कहा था कि संसद को इसकी समीक्षा करनी होगी। इसके लिए समय चाहिए। ये ट्वेंटी-20 मैच नहीं है। 17 विपक्षी पार्टियों ने बिलों के पास होने में जल्दबाजी को लेकर उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति को पत्र भी लिखा था।
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