इस्तीफा देने के लिए बाबुल सुप्रियो ने ओम बिरला से मांगा समय, लगाया टाइम ने देने का आरोप

नई दिल्ली, अक्टूबर 01: मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री बाबुल सुप्रियो अब टीएमसी में शामिल हो गए हैं। अब बाबुल सुप्रियो द्वारा एक ट्वीट किए जाने के बाद ट्विटर पर वाकयुद्ध छिड़ गया है। जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें आश्चर्य है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उन्होंने अपनी सदस्यता से इस्तीफा देने के लिए समय मांगा, लेकिन समय नहीं दिया गया। आसनसोल के सांसद ने यह भी कहा कि उनके साथी लोकसभा सांसद और वरिष्ठ राजनेता प्रोफेसर सौगत रॉय ने भी स्पीकर से मामले में जवाब देने का अनुरोध किया है।

TMC Leader Babul Supriyo seeking an appointment with the Lok Sabha Speaker to put in his resignation

सुप्रियो ने 20 सितंबर को बिरला को उनके द्वारा लिखे गए एक पत्र की कॉपी साझा की है। जिसमें उनसे मिलने का समय मांगा गया था। पत्र में लोकसभा अध्यक्ष से 'अत्यंत जरूरी मामले' के लिए उन्हें वक्त देने का अनुरोध किया गया था। खबरों की मानें तो इस बार भी उन्हें अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया गया है। अब लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने कहा कि उन्हें सांसद के इस्तीफा देने के बारे में कोई सूचना नहीं मिली है।

अब लोकसभा सचिवालय ने बाबुल सुप्रियो के इस्तीफे के इरादे व स्पीकर से मुलाकात नहीं हो पाने को लेकर आई मीडिया रिपोर्टों को लेकर शुक्रवार को स्पष्टीकरण दिया है। लोकसभा सचिवालय ने कहा कि सांसद बाबुल सुप्रियो ने सदन से इस्तीफा देने का इरादा जाहिर करने के बाद स्पीकर कार्यालय से कभी संपर्क नहीं किया। सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि स्पीकर दो अक्तूबर से पांच अक्तूबर 2021 तक दिल्ली में मौजूद रहेंगे। सुप्रियो यदि चाहें तो इस दौरान स्पीकर से मुलाकात का समय तय कर सकते हैं।

लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि पूरे पत्र में इस्तीफा शब्द का एक बार भी उल्लेख नहीं किया गया था। इसमें आसनसोल के सांसद ने बस एक बेहद जरूरी मामले में लोकसभा अध्यक्ष से मिलने का समय मांगा है। सूत्रों ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष को संसद सदस्यों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों से बहुत सारे पत्र मिलते हैं, और वह उन्हें तात्कालिकता और उनकी उपलब्धता के आधार पर उठाते हैं।

सूत्रों ने बताया कि पिछले सप्ताह से 10 दिनों तक लोकसभा अध्यक्ष लगातार यात्रा कर रहे हैं और दिल्ली में उनकी उपलब्धता महज कुछ दिनों के लिए ही है। गायक से नेता बने बाबुल सुप्रियो ने 2014 में भाजपा में शामिल होकर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। 2014 में उन्होंने आसनसोल से लोकसभा चुनाव जीता और 2019 में अपने प्रदर्शन को दोहराया। 2014 से 2021 तक, सुप्रियो मोदी सरकार में शहरी विकास, भारी उद्योग और पर्यावरण मंत्रालय सहित विभिन्न विभागों के मंत्री बने। 7 जुलाई, 2021 को मोदी 2.0 सरकार के पहले बड़े फेरबदल में सुप्रियो को हटा दिया गया था।

पद से हटाए जाने के कुछ दिनों बाद उन्होंने फेसबुक पर संकेत दिया कि वे लोकसभा सांसद और भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा देना चाहते हैं। फिर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की बाबुल के साथ गंभीर चर्चा हुई, जिसके बाद उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया और कहा कि वह लोकसभा सांसद के रूप में बने रहेंगे लेकिन किसी भी राजनीतिक गतिविधि में भाग नहीं लेंगे। हालांकि कुछ दिनों बाद उन्होंने बीजेपी से इस्तीफा देकर टीएमसी ज्वाइन कर ली।

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