Mamata Banerjee के 'गढ़' में किसने किया विद्रोह? हार के बाद पार्टी पर सवाल उठाने वाले नेताओं को TMC का नोटिस
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदरूनी खेमे में हड़कंप मच गया है। चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी की कार्यप्रणाली और नेतृत्व पर सवाल उठाने वाले नेताओं के खिलाफ टीएमसी ने अब 'सख्त एक्शन' लेने की तैयारी कर ली है। पार्टी ने अपने ही 5 कद्दावर नेताओं को 'कारण बताओ' (Show Cause) नोटिस जारी कर सियासी गलियारों में सनसनी फैला दी है।
जैसे ही बंगाल में सत्ता परिवर्तन की तस्वीर साफ हुई, टीएमसी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के सुर अचानक बदल गए। पार्टी का आरोप है कि इन नेताओं ने न केवल नेतृत्व की क्षमताओं पर सवाल उठाए, बल्कि सार्वजनिक मंचों पर ऐसी बातें कीं जो पार्टी की विचारधारा और अनुशासन के बिल्कुल विपरीत थीं। नोटिस में स्पष्ट रूप से पूछा गया है कि जब पार्टी एक कठिन दौर से गुजर रही है, तब उन्होंने लीडरशिप के खिलाफ मोर्चा क्यों खोला?

नोटिस की लिस्ट में शामिल हैं ये बड़े नाम
जिन पांच नेताओं को नोटिस थमाया गया है, उनमें टीएमसी के तेज-तर्रार प्रवक्ता रिजू दत्ता और कोहिनूर मजूमदार का नाम प्रमुखता से शामिल है। इसके अलावा कृष्णेंदु चौधरी जैसे वरिष्ठ नेताओं को भी जवाब तलब किया गया है। पार्टी ने इन सभी से पूछा है कि "आपके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए? आपने पार्टी के हित के बजाय विरोधियों को फायदा पहुंचाने वाली बयानबाजी क्यों की?
24 घंटे का 'अल्टीमेटम' और भविष्य की रणनीति
टीएमसी ने इन सभी बागी तेवर दिखाने वाले नेताओं को अपना पक्ष रखने के लिए महज 24 घंटे का वक्त दिया है। माना जा रहा है कि यदि इनका जवाब संतोषजनक नहीं रहा, तो पार्टी इन्हें बाहर का रास्ता दिखाने में देर नहीं करेगी। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी इस समय पार्टी में किसी भी तरह के विद्रोह को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं और यह नोटिस बाकी नेताओं के लिए भी एक बड़ा कड़ा संदेश है।फिलहाल, इन नेताओं के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं कि क्या वे पार्टी के सामने झुकेंगे या फिर बंगाल की बदलती राजनीति में नई राह चुनेंगे।















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