'राष्ट्रीय स्तर पर बने सनातन धर्म रक्षणा बोर्ड', तिरुपति लड्डू विवाद पर पवन कल्याण की मांग
आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर में वितरित होने वाले प्रसाद को लेकर जिस तरह से चौंकाने वाली बात सामने आई है उसके बाद यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। यहां हरर वर्ष दर्शन के लिए आने वाले तकरीबन तीन करोड़ भक्तों को लड्डू का प्रसाद वितरित किया जाता है। लेकिन अब प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया है कि पूर्व की सरकार के कार्यकाल में इन लड्डुओं मे पशुओं की वसा का इस्तेमाल होता था। उन्होंने इसकी एक लैब टेस्ट को भी साझा किया है।
इस पूरे मामले में अब आंध्र सरकार में मंत्री और जनसेना पार्टी के चीफ पवन कल्याण ने अखिल भारतीय स्तर पर सनातन धर्म रक्षणा बोर्ड के गठन की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करके यह मांग उठाई है।

पवन कल्याण ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करके लिखा हम सभी तिरुपति बालाजी के प्रसाद में एनिमल फैट(मछली, सुअर और गाय की वसा) मिलने से आहत हैं। इस मामले में टीटीडी को कई सारे सवाल का जवाब देना है, जिसे तत्कालीन सरकार ने गठित किया था। हमारी सरकार इस मामले में हर संभव सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सनातन धर्म रक्षणा बोर्ड के गठन की जरूरत
पवन कल्याण ने कहा कि यह घटना हमारे पवित्र मंदिरों की पवित्रता को लेकर भी एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। मंदिर की पवित्रता, मंदिरी की जमीन और यहां पालन की जाने वाली धार्मिक रिवाजों की महत्ता को लेकर लोग खुलकर बोल रहे हैं। अब समय आ गया है कि सनातन धर्म रक्षणा बोर्ड का गठन राष्ट्रीय स्तर पर हो और पूरे भारत में मंदिर से जुड़े मसलों को इसमे उठाया जाए।
सबको साथ आने की जरूरत
राष्ट्रीय स्तर पर इसको लेकर एक बहस होनी चाहिए, इसमे सभी नीति बनाने वाले लोग, धार्मिक संगठनों के मुखिया, न्यायपालिका, नागरिक, मीडिया और अन्य वर्ग से जुड़े लोग हिस्सा लें। मुझे लगता है कि हम सभी को साथ आकर सनातन धर्म के अपमान को रोकना चाहिए।
लैब रिपोर्ट में खुलासा
बता दें कि मुख्यमंत्री नायडू ने मंदिर के लड़डुओं का मुद्दा 23 जुलाई को जारी एक परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर उठाया है। लड्डू प्रसाद तैयार करने में मिलावटी घी के इस्तेमाल की बात सामने आई है।
जिसमें संभवतः जानवरों की चर्बी और मछली का तेल मिलाया गया था। "पशु चर्बी" का मतलब जानवरों से प्राप्त वसा से है। लोग प्रसाद को काफी पवित्र मानते हैं, ऐसे में इसमे मांसाहार का पाया जाना लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ को दर्शाता है।
टीटीडी पर सवाल
तिरुपति मंदिर के प्रशासन की देखरेख तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) द्वारा की जाती है, जो आंध्र प्रदेश राज्य सरकार द्वारा स्थापित एक समिति है। यह निकाय प्रसाद लड्डू बनाने के लिए आवश्यक सभी सामग्रियों की खरीद के लिए जिम्मेदार है, जिन्हें स्वयंसेवकों द्वारा निर्धारित कीमतों पर खरीदा जाता है और भक्तों में इसे वितरित किया जाता है।
एनिमल फैट
"पशु चर्बी" का मतलब जानवरों से प्राप्त वसा से है, जो लाखों लोगों द्वारा पूजे जाने वाले प्रसाद में मांसाहारी तत्वों की मौजूदगी को और भी अधिक दर्शाता है। रिपोर्ट के निष्कर्षों ने न केवल भक्तों को चौंका दिया है, बल्कि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के शासन के तहत मंदिर के प्रबंधन प्रथाओं की अखंडता पर भी सवाल उठाए हैं।
हिंदू धर्म में प्रसाद का महत्व
प्रसाद का हिंदू धर्म में गहरा महत्व है, यह ईश्वरीय आशीर्वाद और देवता से सीधे मिलने का प्रतीक है। प्रसाद चढ़ाने और ग्रहण करने की क्रिया पवित्रता और भक्ति पर जोर देने वाले अनुष्ठानों में गहराई से समाहित है।
इसलिए, मिलावट के आरोप न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को खतरे में डालते हैं, बल्कि आध्यात्मिक विश्वासों को भी कमजोर करते हैं, जो संभावित रूप से उन भक्तों को अलग-थलग कर देते हैं जो प्रसाद की शुद्धता को बहुत महत्व देते हैं।
वाईएसआर ने बताया निराधार
इन आरोपों की गंभीरता के बावजूद, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने इन्हें निराधार बताते हुए विवाद को राजनीतिक प्रेरणाओं से प्रेरित बताया। टीटीडी के पूर्व अध्यक्ष ने प्रसाद के लड्डू में मिलावटी घी के इस्तेमाल से भी इनकार किया और कहा कि ऐसे दावे राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं।
हर साल 500 करोड़ की आय
बता दें कि तिरुपति मंदिर को सालाना लगभग तीन हज़ार करोड़ रुपये का चढ़ावा और दान प्राप्त करता है, अकेले लड्डू प्रसाद की बिक्री से लगभग 500 से 600 करोड़ रुपये कमाता है।












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