Tirupati Laddu Row: तिरुपति लड्डू विवाद की अंतिम चार्जशीट से सियासी भूचाल, जानिए CBI-SIT के 5 बड़े खुलासे
Tirupati Laddu Row: तिरुपति के विश्व प्रसिद्ध 'लड्डू प्रसादम' में इस्तेमाल होने वाले घी में मिलावट के मामले में एक बड़ा मोड़ आ गया है। कथित मिलावटी घी को लेकर दायर CBI के नेतृत्व वाली विशेष जांच टीम (SIT) की अंतिम चार्जशीट ने आंध्र प्रदेश की राजनीति में जबरदस्त विवाद खड़ा कर दिया है।
23 जनवरी को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में दाखिल 219 पन्नों की इस चार्जशीट में साफ कहा गया है कि तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को सप्लाई किया गया घी पशु वसा (Animal Fat) से नहीं बना था, लेकिन वह दूध से भी नहीं बना था।

Tirupati Laddu Ghee SIT Report 2026 चार्जशीट के 5 बड़े खुलासे?
नकली घी का निर्माण: चार्जशीट के अनुसार, आरोपी डेयरी फर्म ने गाय के दूध का इस्तेमाल किए बिना ही 'घी' तैयार किया था। इसके लिए रिफाइंड पाम कर्नेल ऑयल, पाम ऑयल और पाम स्टीयरिन (Palm Stearin) का उपयोग किया गया।
पशु चर्बी के सबूत नहीं: SIT ने स्पष्ट किया है कि जांच में बीफ टैलो (गाय की चर्बी), सुअर की चर्बी या मछली के तेल की मौजूदगी के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले हैं। यह मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू द्वारा 2024 में किए गए दावों के ठीक विपरीत है।
बिना दूध की डेयरी: उत्तराखंड की 'भोले बाबा डेयरी' ने 2019-2024 के बीच 68 लाख किलो घी सप्लाई किया, लेकिन जांच में पाया गया कि इस डेयरी ने एक लीटर दूध या मक्खन भी नहीं खरीदा था। यह पूरी तरह से एक 'फर्जी' सेटअप था।
पाम ऑयल और केमिकल का मिश्रण: घी बनाने के लिए पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और पामोलिन का इस्तेमाल किया गया। लैब टेस्ट में शुद्धता दिखाने के लिए इसमें एसिटिक एसिड एस्टर और खुशबू के लिए आर्टिफिशियल फ्लेवर मिलाए गए थे।
₹250 करोड़ का घोटाला: नकली घी की सप्लाई के जरिए करीब 250 करोड़ रुपये का गबन किया गया। टेंडर की शर्तों में जानबूझकर ढील दी गई ताकि अयोग्य कंपनियां इस प्रक्रिया में शामिल हो सकें।
36 लोगों पर गाज: चार्जशीट में TTD के पूर्व अधिकारियों, डेयरी मालिकों और बिचौलियों सहित 36 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें तत्कालीन TTD चेयरमैन के निजी सहायक (PA) पर ₹25 प्रति किलो कमीशन मांगने का भी आरोप है।
TDP ने क्या कहा?
वहीं, सत्ताधारी दल TDP ने कहा कि मिलावट चाहे पशु चर्बी की हो या सिंथेटिक तेल की, यह एक अक्षम्य अपराध है। टीडीपी महासचिव नारा लोकेश ने कहा-YSRCP जनता को गुमराह कर रही है। SIT ने स्पष्ट किया है कि घी के नाम पर जहर सप्लाई किया गया। बिना दूध के केमिकल वाला घी खिलाना क्या महापाप नहीं है? इस साजिश में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
Animal Fat in Tirupati Laddu: नायडू के आरोपों से शुरू हुआ था विवाद
सितंबर 2024 में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सनसनीखेज आरोप लगाया था कि पिछली YSR कांग्रेस पार्टी (YSRCP) सरकार के दौरान तिरुमला लड्डू के घी में पशु वसा मिलाई गई थी। इस बयान ने धार्मिक भावनाओं और राजनीति-दोनों को झकझोर दिया था।
चार्जशीट सामने आने के बाद YSR कांग्रेस पार्टी ने दावा किया कि SIT रिपोर्ट ने तत्कालीन सरकार को क्लीन चिट दे दी है। पूर्व TTD चेयरमैन और वरिष्ठ YSRCP नेता भूमना करुणाकर रेड्डी ने कहा-CBI-SIT की रिपोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि तिरुपति लड्डू में कोई पशु वसा नहीं थी। यह पूरा मामला झूठे प्रचार और राजनीतिक ड्रामे का हिस्सा था। YSRCP ने मुख्यमंत्री नायडू और डिप्टी सीएम पवन कल्याण से सार्वजनिक माफी की मांग की।
किस-किस पर गिरी गाज?
चार्जशीट में भोले बाबा डेयरी के निदेशक पोमिल जैन और विपिन जैन, श्री वैष्णवी डेयरी के सीईओ अपूर्व चावड़ा और एआर डेयरी के एमडी राजू राजशेखरन समेत कई रसोइयों और अधिकारियों को नामजद किया गया है। साथ ही पूर्व चेयरमैन वाईवी सुब्बा रेड्डी के पीए कदुरू चिन्ना अपन्ना पर भी रिश्वत लेने का आरोप लगा है।
भले ही चार्जशीट में पशु चर्बी की बात खारिज कर दी गई हो, लेकिन 'सिंथेटिक घी' के बड़े रैकेट के खुलासे ने तत्कालीन प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह मामला कोर्ट की दहलीज पर है, जहाँ 36 आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी।












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